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Shri Jagannath Mandir Ka Rahasya: श्री जगन्नाथ मंदिर के ऊपर स्थापित लाल ध्वज सदैव हवा के विपरीत दिशा में लहराता है। ऐसा किस कारण होता है यह तो वैज्ञानिक ही बता सकते हैं लेकिन यह निश्‍चित ही आश्चर्यजनक बात है। यह भी आश्‍चर्य है कि प्रतिदिन सायंकाल मंदिर के ऊपर स्थापित ध्वज को मानव द्वारा उल्टा चढ़कर बदला जाता है। ध्वज भी इतना भव्य है कि जब यह लहराता है तो इसे सब देखते ही रह जाते हैं। ध्वज पर शिव का चंद्र बना हुआ है। आओ जानते हैं इसका पौराणिक कारण।Shri Jagannath Mandir Ka Rahasya: Dhwaj Ulta Kyu Lehrata Hai,Asli Vajah ?

The red flag atop the Sri Jagannath Temple always flutters in the opposite direction of the wind. Only scientists can explain why this happens, but it's certainly surprising. It's also surprising that every evening, a human climbing upside down changes the flag. The flag is so magnificent that when it flutters, everyone is mesmerized. The moon of Shiva is depicted on the flag. Let's explore its mythological reason.

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Transcript
00:04श्री जगनाग के उपर इस्तेत लाल ध्वज हमेशा हवा के विपरीत दिशा में लहराता है।
00:11ऐसा क्यूं होता है कि तो आप सभी भक्तों के मन में सवाल जरूर उठता होगा।
00:17इसके पीछे का कारण तो वैज्ञानिक ही बता सकते हैं।
00:20लेकिन आज हम आपको इससे जुड़ी कथा के बारे में बताएंगे।
00:27द्वज के विपरीत दिशा में लहराने की कथा या कारण हनुमान जी से जुड़ी है।
00:35दरसल हनुमान जी शेत्र की दशों दिशाओं से रक्षा करते हैं।
00:39यहाँ के कड़कर में हनुमान जी का निवास हैं।
00:42हनुमान जी ने यहाँ कई तरह के चमतकार बताए हैं।
00:48उनी में से एक है समुद्र के पास स्थत मंदर के भीतर समुद्र की आवाज को रोक देना।
00:54इस आवाज को रोकने के चक्कर में ध्वज की दिशा भी बदल गई थी।
00:59दरसे लेग बार नारज जी भगवान जगनात के दर्शन के लिए पहुँचे तो उनका सामना हनुमान जी से हुआ।
01:05हनुमान जी ने कहा कि इस वक्त तो प्रभू विश्राम कर रहे हैं। आपको इंतजार करना होगा।
01:12नारज जी द्वार के बाहर खड़े होकर इंतजार करने लगे। कुछ वक्त बीते तो उन्होंने मंदर के द्वार के भीतर
01:19जहाता।
01:19तो प्रभु जगनाश्री लक्ष्मी के साथ उदास बैठी थे, उन्होंने प्रभु से इसका कारण पूछा, तो उन्होंने कहा कि ये
01:27समुद्र की आवाज मुझे सोने नहीं दे रही, नारत जीस ने ये बात बाहर आकर हनुमान जी को बताई, हनुमान
01:35जी ने क्रोधित होकर स
01:47ये महावीर हनुमान, ये आवाज रोकना मेरे बसकी नहीं है, जहां तक पवन वेग चलेगा, ये आवाज वहां तक जाएगी,
01:55आपको इसके लिए अपने पिता पवन देव से विनती करनी होगी, तब हनुमान जी ने अपने पिता पवन देव का
02:03आवाहन किया, और उनसे कह
02:05ये आप मंदर के दिशा में ना बहें, इस पर पवन देव ने कहा कि पुत्र ये संभव नहीं है,
02:11परंतो तुम्हे एक उपाय बताता हो, तुम्हें मंदर के आसपास ध्वनी रहे, वायू कोशिय व्रत्ति या विवर्तन बनाना होगा, हनुमान
02:20जी समझ गए, तब हनुमान
02:22जी ने अपनी शक्ती से खुद को दो भागों में विभाजत किया, और फिर वो वायू से भी तेज गती
02:28से मंदर के आसपार चक्र लगाने लगे, इससे वायू का ऐसा चक्र बना, कि समुद्र की भनी मंदर के भीतर
02:40ना जाकर मंदर के आसपास ही घूमती रही, और मंदर में
02:43श्री जगनात जी आराम से सोते रहे, यही कारण है कि तभी से मंदर के सिंगद्वार में पहला करदम प्रवेश
02:51पर ही, आप सागर द्वारा निर्मिक किसी भी ध्वनी को नहीं सुन सकते, लेकिन इसे शाम को स्पष्ट रूप से
02:59अनुभव किया जा सकता है, इसी तरह मंद
03:08से बाहर निकलेंगे, तभी आपको लाशों के जलने की गंद महसूस होगी, यह कहानी आपको कैसे लगी, अब नीचे कॉमन
03:16सेक्षन पर लिख कर बताना ना भूलिएगा, तल देन वीडियो को लाइक और शेयर करें, साथी चानल को भी जरूर
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