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Yogini Ekadashi Niyam 2026: योगिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है. यह व्रत जाने-अनजाने में हुए पापों के प्रभाव को नष्ट करता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, कुबेर देव के सेवक हेममाली को शिव जी के शाप से कुष्ठ रोग हो गया था. तब मार्कण्डेय ऋषि के कहने पर उसने योगिनी एकादशी का व्रत किया, जिसके प्रभाव से वह पूरी तरह रोगमुक्त और रूपवान हो गया. इसलिए शारीरिक कष्टों और बीमारियों से मुक्ति के लिए यह व्रत अचूक माना जाता है.Yogini Ekadashi Niyam 2026: Yogini Ekadashi Ke Din Kya Kare Kya Nahi,Vrat Puja Se Kya Fal Milega ?

On the day of Yogini Ekadashi, wake up during Brahma Muhurta, take a bath, and wear clean or yellow clothes. Afterward, thoroughly clean the place of worship and install an idol or picture of Lord Vishnu. Offer yellow flowers, basil leaves, sandalwood, incense, lamps, seasonal fruits, and Panchamrit to the deity. Chant the mantra Om Namo Bhagwate Vasudevaya during the puja. Following this, reciting the Vishnu Sahasranama, Vishnu Chalisa, or the Yogini Ekadashi Vrat Katha is considered auspicious. Finally, perform an aarti (sacred ritual) for the deity and distribute prasad to all family members.

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~HT.318~ED.120~PR.111~PR.552~VG.HM~
Transcript
00:00क्रश्नाए वाशुदेवाए हरे परमात्मने प्रणता क्लेश्वनाशाए गोविंदाए नमो नमा प्यारे मित्रों जैश्यारम जैमातादी
00:08मित्रों आज आप से चर्चा करते हैं योगनी एकाजसी जो की 10 जुलाई को योगनी एकाजसी का पावन पर्ब मनाया
00:18जाएगा
00:30आप से चर्चा करेंगे शास्त्रों में वरनित है कि जो शाधक स्रद्धा और भक्ति के साथ में विद्विधान से योगनी
00:39एकाजसी के वरत करते हैं उन्हें महान यग्यों का तीर्थ यात्राओं का बिशाल दान पुन्न करने का फल प्राप्त होता
00:48है यही कारण है कि भक्
00:51इस दिन उपवास करते हैं जब करते हैं ध्यान करते हैं पूजा करते हैं दान करते हैं और पुन्न करमों
00:58में विशेश रूप से सनलगन रहते हैं योगनी एकाजसी का जो पावन वरत है यह 10 जुलाई 2026 को योगनी
01:07एकाजसी का वरत रखा जाएगा योगनी एकाजसी का आ�
01:21प्रापों को नास करने वाली एकाजसी बताया गया है। सास्त्रों में कहा गया है कि जो फल 88000 ब्रामनों को
01:29भोजन कराने से प्राप्त होता है।
01:51प्राप्त नोत ही योगनी व्रत के नरह अर्थात जो फल 88000 ब्रामनों को भोजन कराने से प्राप्त होता है। वही
02:01फल योगनी एकाजसी के व्रत को करने से प्राप्त होता है। बड़े बड़े पापों का नास करने वाला यह व्रत
02:09बताया गया है।
02:10सरद्धालू अपनी च्छम्ता के अनुशार या परम्परा के अनुशार कोई निर्जला वृत, कोई जलाहार अथवा फलाहार रहकर के वृत को
02:23शंपन्न करते हैं, रात्री में जागरन करते हैं, भगवान का भजन, कीर्टन, इश्मरन करना अत्यंत शुब बताया गया है
02:33व्रत के दवरान कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, योगनी एकादसी भगवाने विश्टनू की अराधना के साथ मन, बचन और
02:42कर्म की शुद्ध पर्व मरताया गया है, इसलिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना है, तामशिक भोजन का प्रयोग नहीं
02:51करना है, ज�
02:55प्रोद, बिवाद और कट बचनों से दूर रहना है, इसके साथ ही अधिक बात्चीश से बच करके ईश्वर चिंतन में
03:03शमय वितीत करना है, भगवाने विश्टनू के नामों का जब करना है, रात्री में यथा शक्ति भगवान की पूया भजन
03:12करना चाहिए, योगनी एका
03:14जसी पर दान का भी विशेश महत्तो बताया गया है, शनातन धर्म में दान को धर्म का प्रमुक इस्तम्भ माना
03:22गया है, सास्त्रों में कहा गया है कि केवल दान करने एवं त्याग करने से नहीं बलकि करुणा, शेवा, परोपकार
03:32की भवना का विस्तार विशेश रूप से �
03:34एकादसी जैसे पुन्यों पर करना चाहिए, दान करने से उसका फल कई गुना प्राप्त होता है, योगनी एकादसी के दिन
03:43निम्न बस्तूओं का दान करना चाहिए, जैसे अन्न का दान, अनाज, फल, मिश्ठान, जल से भरे हुए घड़े का दान,
03:51जरुरत मंदों को भोजन क
03:53दान, दान की महिमा सास्त्रों में बहुत ही विस्तार से बताई गई है, भारती शंत्रकती में दान को शदयो सरवोच्च
04:01पुन्य करमों का इस्थान दिया गया है, हमारे धर्मग्रंथों के नुशार, रिसी दधीच, महादानी करण, और राजा, रतिद्यों जैसे महान
04:11दा
04:12दान वीरों की कथाएं प्राप्त होती हैं, जिन्होंने दूसरों के कल्यान के लिए अपना सरवश्य समर्पित कर दिया, ऐसे पामन
04:20व्रत को करने के साथ दान अवश्य करना चाहिए, आप चाहते हैं किसी भी तरह का पूजा पाटे गयनुष्ठान, तो
04:28भी शंपर करिए, म
04:29मैं पुना मिलता हूँ नए वीडियो में, तब तक के लिए आप सभी को जै स्री कृष्णा, जै स्यारम
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