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  • 4 months ago
पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के पंडुआ में 100 वर्षीय डॉ. काली गोपाल मुखर्जी आज भी मरीजों का इलाज कर रहे हैं. वर्ष 1950 से चिकित्सा सेवा में जुटे डॉ. मुखर्जी पिछले 76 वर्षों से गरीब और जरूरतमंद लोगों की सेवा कर रहे हैं. कैंसर के कारण एक आंख की रोशनी खोने और चलने के लिए वॉकर का सहारा लेने के बावजूद उनका सेवा भाव कम नहीं हुआ है. वे रोज अपनी क्लिनिक पहुंचकर मरीजों को देखते हैं. उनके पिता भी अंग्रेजों के दौर के गोल्ड मेडलिस्ट चिकित्सक थे, जिनसे उन्हें समाज सेवा की प्रेरणा मिली. आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने वाले डॉ. मुखर्जी ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा का प्रेरणादायक उदाहरण हैं और आज भी लोगों के लिए उम्मीद की मिसाल बने हुए हैं.

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Transcript
00:07गले में स्थेतोस्कोप, हाथों में गलव्स और दिल में गरीबों की सेवा की प्रबलभावना
00:13काली गोपाल मुखर जी पेशेस से डॉक्टर है, पिछले 76 सालों से मरीजों का इलाज कर रहे हैं
00:19अब शरीर साथ नहीं दे रहा, वो खुद से चल नहीं सकते, चलने के लिए वॉकर का सहारा लेना पड़ता
00:26है
00:26लेकिन अब भी लगता है कि अगर घर बैट जाएंगे तो घरीबों का इलाज कौन करेगा
00:33मैं लंबे समय से मेडिकल की प्रटिश कर रहा हूँ, मुझे याद नहीं कि कितने साल से
00:38अब भी मरीज आते हैं, अब पहले के जैसा सब कुछ नहीं हो पाता
00:43सिर्फ एक्छा शक्ती की वज़ा से सब चल रहा है
00:54काले गोपाल मुखर जी के पिता अंग्रेजों के जमाने में गोल्ड मेडिलिस्ट फिजिशिन रहे
00:59पिता से बिमार लोगों का इलाज करने की सीख मिली, तब से आज तक वो लोगों की सेवा कर रहे
01:05हैं
01:05सुभह शाम मरीज को देखने अपनी क्लिनिक में आते हैं
01:16सुभिदार नहीं थी, वो मरीज का नारी देखकर बिमारी को पहचान लेते हैं
01:21एक सा साल की उम्र में भी वो इलाज कर रहे हैं
01:24अगर कोई भगवान के बरावर है तो वो डॉक्टर है
01:28वो अग्रामीन शत्रों में स्वास्त सुभिदाएं दे रहे हैं
01:32डॉक्टर काली गोपाल मुखर जी का जन्म 5 मई 1927 को वर्धमान में हुआ
01:37वहीं से स्कूलिंग की, फिर आरजी कर मेडिकल कॉलेज से MBBS की डिग्री ली
01:42और डॉक्टर बन कर 1950 से लोगों की सेवा कर रहे हैं
01:46पिता की इच्छा से उन्होंने ग्रामिन इलाके को अपना कर्मक शेत्र चुना
01:50शुरू शुरू में वो 5 रुपए में लोगों का इलाज करते थे
01:54एक वक्त ऐसा भी आया जब वो फ्री में इलाज करने लगे
01:572025 में कैंसर ने उनकी एक आँख छीन ली
02:00अब वो एक आँख के सहारे ही मरीजों की सेवा करते हैं
02:05EGV भारत के लिए हुगली से पलाश मुखोबाध्याई की रिपोर्ट

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