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  • 8 months ago
स्ट्रॉबेरी की खेती ने दो दोस्तों की किस्मत बदल दी. ओडिशा के बालासोर के रहने वाले कालंदी चरण लेंका और सधाब राउल ने तीन साल पहले स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की. 2023 में हिमाचल प्रदेश से 25 स्ट्रॉबेरी के पौधे लेकर और फिर इनको प्लास्टिक ग्रो बैग में लगाए. तीन महीने में 18 किलोग्राम से ज्यादा फल आए. इससे उत्साहित होकर इस काम को आगे बढ़ाया. कालंदी पहले  एक प्लास्टिक मैन्युफ़ैक्चरिंग कंपनी में मैकेनिकल मेंटेनेंस वर्कर थे. अब खेती को ही फूल टाइम काम बना लिया है. वहीं इनके पार्टनर सधाब राउल, उस समय दूसरे राज्य में काम कर रहे थे. इस काम में आर्थिक मदद दी. आज दोनों दोस्त मिलकर फ़ार्म का प्रबंधन करते हैं और लोकल युवाओं को रोजगार दे रहे हैं. ये स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए आर्गेनिक तरीका अपनाते हैं. इनकी स्ट्रॉबेरी बालासोर के अलावा भद्रक, कटक, भुवनेश्वर और जाजपुर के बाजारों में सप्लाई की जाती हैं. जो काम सिर्फ़ 25 पौधों से शुरू हुआ था. अब एक सफल खेती का मॉडल बन गया है और दूसरो के लिए एक मिसाल है.

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00:00अश्ट्रोबेरी की खेती ने दो दोस्तों की किस्मत बदल दी ओडिसा के बाला सोर के रहने वाले कालंदी चर्णलेंका और सधाब राउल ने तीन साल पहले अश्ट्रोबेरी की खेती शुरू की
00:162023 में हिमाचल प्रदेश से 25 अश्ट्रोबेरी के पौधे लेकर और फिर इनको प्लास्टिक ग्रोब बैग में लगाए तीन महीने में 18 किलोग्राम से ज़्यादा फ़लाएं इससे उत्साहित होकर इस काम को आगे बढ़ाया
00:33यहां इस्ट्रोबेरी को इतनी अच्छी तरह से उखते देखकर मैंने और मेरे एक दोस्त ने अगले साल 3500 पौधे लगाए और लगबग 2 लाख रुपे कमाए
00:47बाद में हमने 14,000 पौधे लगाए और 5-6 लाख रुपे कमाए इस साल हमने 25,700 पौधे लगाए हैं
00:55कालंदी पहले एक प्लास्टिक मैनुफेक्चरिंग कमपणी में मेकनिकल मेंटनिंस वर कर थे
01:03अब खेती को ही फूल टाइम काम बना लिया है
01:06वहीं इनके पार्टनर सधाब राउल उस समय दूसरे राजे में काम कर रहे थे
01:13इस काम में आर्थिक मदद दी आज दोनों दोस्त मिलकर फार्म का प्रबंदन करते हैं
01:20और लोकल लिवाओं को रोजगार भी दे रहे हैं
01:24हमें रोज़ाना मजदूरी मिलती है और अब घर चलाने की चिंता नहीं है
01:33क्योंकि हम पूरे साल काम करते हैं
01:37कालंदी की पतिनी भी इस काम में मदद करती है
01:41पेड लगाना मेरी पती का पैशन है
01:45रेटायर्मेंट के बाद उन्होंने पूरी तरह से श्ट्रोबेरी की खीती पर ध्यान दिया
01:50लेकिन मैंने भी पानी देने, कटाई और पैकिंग में उनकी मदद करना शुरू कर दिया
01:54आसपास के गाउं के लोग हमारे पास आते हैं और पूसते रहते हैं
01:59यह खीती कैसे की जाती है ताकि वे भी ऐसा कर सकें
02:02यह अश्ट्रोबेरी की खेती के लिए औरगेनिक तरीका अपनाते हैं
02:10इनकी अश्ट्रोबेरी बाला सोर के अलावा भदरक, कटक, भुमनेश्वर और जाजपूर के बजारों में सप्लाई की जाती हैं
02:18जो काम सिर्फ 25 पौधों से शुरू हुआ था, अब एक सफल खेती का मौडल बन गया है
02:24और दूसरों के लिए एक मिसाल है
02:27बीरो रिपोर्ट, ETV भारत
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