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Muharram Kyu Manaya Jata Hai: मोहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना है और इसे बेहद पवित्र माना जाता है। लेकिन मोहर्रम क्यों मनाया जाता है? इमाम हुसैन कौन थे और कर्बला की घटना का क्या महत्व है? इस वीडियो में जानिए इमाम हुसैन की शहादत, कर्बला की कहानी और यौम-ए-आशूरा का महत्व। इस वीडियो में जानिए: • मोहर्रम क्यों मनाया जाता है? • इमाम हुसैन कौन थे? • कर्बला की ऐतिहासिक घटना • यौम-ए-आशूरा का महत्व • सब्र, इंसाफ और कुर्बानी का संदेश • मोहर्रम से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं मोहर्रम केवल शोक का समय नहीं, बल्कि सत्य, न्याय, साहस और इंसानियत की सीख देने वाला अवसर भी माना जाता है।Muharram Kyu Manaya Jata Hai: Muharram Kyu Manaya Jata Hai,Imam Hussain Ki Kahani..

Muharram is the first month of the Islamic calendar and holds deep religious significance. But why is Muharram observed? Who was Imam Hussain, and what happened in Karbala? This video explains the story of Imam Hussain, the events of Karbala, and the significance of Ashura. In this video, learn about: • Why Muharram is observed • Who was Imam Hussain? • The historical event of Karbala • Importance of Ashura • Lessons of sacrifice, justice, and patience • Religious significance of Muharram Muharram is remembered as a time of reflection, sacrifice, justice, and humanity.

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00:04इस्लामिक कैलेंडर का पहला महिना यानी मुहर्रम जुसे दुनिया एक तेवहार समझती है असल में उसलाम की इतिहास का सबसे
00:12बड़ा मातम है एक ऐसा महिना जुसने तपते हुए रेगस्तान में इंसानियत और जुल्म की सबसे बड़ी जंग देखी आखिर
00:19क्यूं मनाया ज
00:28कहानी शुरू होती है सन 680 इसवी में इसलाम के पैगंबर हजरत मुहमद के दुनिया से जाने के बार सीरिया
00:38की गदी पर एक क्रूर और लालची शासक बैठा जिसका नाम था यजीद यजीद पूरे इसलामी सामराज्य पर कबजा चाहता
00:46था और चाहता था कि लोग उसे अ
00:57नवासे इमाम हुसैन इमाम हुसैन ने यजीद के जल्म और उसकी बुरी आदतों के आगे जुकने से साफ इंकार कर
01:05दिया वो अपने परिवार और बहत्तर साथियों के साथ मदीना चोड़कर इराक के कर्बला नाम की एक ऐसे तपते हुरे
01:12रेगिस्तान में पहुँच गया
01:13यजीद ने अपनी हजारों की सेना भेज़कर इमाम हुसैन के छोटे से गाफिले को चारों तरफ से घेर लिया
01:20मोहरम की साथ तरीक को यजीद की फौज ने इमाम हुसेन के परिवार के लिए फरात नदी का पानी बंद
01:28कर दिया
01:29छोटे छोटे बच्चे प्यास से तड़पने लगे लेकिन हुसेन का इरादा नहीं बदला
01:35अब बात करते हूं सुराद की जोसे इतिहार श्रब आशुरा यानि नौवी मोहरम की रात कहता है
01:43कल मौत सामने खड़ी थी इमाम हुसेन ने अपने खेमे के सारे दिये बुझा दिये
01:50और अपने साथियों से कहा यजीद को सर्फ मेरी जान चाहिए रात का अंधेरा है तुम सब अपनी जान बचा
01:57कर भाग जाओ मैं तुम्हें इजाज़त देता हूँ
02:00लेकिन इतिहास गवा है दिया दोबारा जला तो एक भी साथी अपनी जगह से नहीं हिला
02:06सब ने कहा या हुसैन हम अपनी जान दे देंगे लेकिन आपका साथ नहीं छोड़ेंगे
02:13उस पूरी रात इमाम हुसैन का परिवार पानी की एक एक बूंद के लिए तड़पता रहा
02:18लेकिन उन्होंने रोने बिलकने के बजाए अल्ला की इबादत में पूरी रात गुजार दी
02:24अगले दिन यानि दस महरम को वो हुआ जिसे सोच कर आज भी रूह काप जाती है
02:30एक एक करके इमाम हुसैन के भाई उनके बेटे और उनके साथी शहीद हो गए
02:36आखिर में जब इमाम हुसैन सजदे में थे तब जालिमों ने उनकी गर्दन काट दी
02:43हुसैन सिर्ख कटा कर भी जंग जीत गए क्योंकि उन्होंने जुल्म के आगे घुटने नहीं टेके
02:48इसी शहादत की याद में मुहरम मनाय चाता है
02:52और ताजिये निकाले जाते हैं
02:55वो असल में इमाम हुसैन की उसी मगबरे का एक प्रतीक रूप है
02:59कर्बला हमें सिखाता है कि चाहे पूरी दुनिया आपके खिलाफ खड़ी हो
03:04हक और सच्चाई का रास्ता कभी नहीं छोड़ना चाहिए
03:08अगर आपको इतिहास कि ये दास्ता दिल को चूगई हो
03:11तो वीडियो को लाइक और शेयर जरूर करें
03:14ऐसी ही और जानकारियों के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें

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