00:03जेस्ट महा के शुकलपक्ष के एकादशी तिथी पर निर्जल एकादशी का पर्व मना जाता है।
00:59भी जरूर करने चाहिए।
01:00से गंगा जल, गुलाब जल, इत्र और चंदन मिलाकर ठाकुर्जी को स्नान कराए।
01:04स्नान कराते समय ओम नमो भगवति वासु दिवाय या हरी कृष्ण महामंत्र का जाप करे।
01:10स्नान के बाद हलके सूती वस्त्र या फूलों की पोशाक पहनाए।
01:14लड़ो कुपाल के पूरे शरीर, माथे, हाथ और चर्णों पर पीला या सफेज चंदन लगाए।
01:20ये आज के दिन सबसे महत्तपूर है।
01:22हलके मोतियों के आप भूशें पहनाएं, सिर पर हलकी पग या केवल मोरपंग से सजाए।
01:28लड़ो कुपाल को सजाने के बाद उनकी पूजा करें, उनको मखाना मिश्ट्री ये ठंडी, मीठी, शिकंजी ये ठंडाई का भोग
01:36लगाएं।
01:36जिसमें तुलसी का पत्ता यानि की तुलसी दल जरूर डालें।
01:40अब दूब दिप चला कर लड़ो कुपाल के प्यार से आरती उतारें और उनसे सुक सम्रिद्धी की प्रात्ना करें।
01:46आरती के बाद एक छोटा हाथ का पंखा और लड़ो कुपाल को धीरे-धीरे हवा करें।
01:52आर्थी के बाद लड़ू को पाल के पास जल का पात्र भरा रख दे ताकि उन्हें जब प्यास लगे वो
01:58पी सके
01:59तो इस तरीके से आप लड़ू को पाल की पूझा करे
02:01उमीद करते हूं आपको जानकारी पसंद आई होगी फिलाल हमारे इस वीडियो में नहीं
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