00:02मुहर्म का महीना आते ही हमारे देश के कई हिस्सों में ताजिया बनाने जलूस निकालने और मातम करने का सिलसला
00:07शुरू हो जाता है
00:08बहुत से लोग इसे इमाम हुसैन से महबत का जरीया मानते हैं तो वहीं समाच का एक बड़ा हिस्सा इसे
00:13गलत ठहराता है
00:14लेकिन एक मुसल्मान होने के नाते सबसे जरूरी ये जानना है कि इस बारे में अल्ला की खिताब कुरान, अल्ला
00:20के रसूल की हदीस और इसलाम के बड़े उल्यमा की क्या राय है
00:23क्या इसलाम में ताजिया बनाना जायज है या नहीं? आईए आज कि इस वीडियो में जानते हैं
00:27सबसे पहले ये जानना जरूरी है कि ताजिया बनाने की शुरुआत कब हुई?
00:31अल्ला के रसूल हजरत मुहमद अनके सहाबा या खुद इमाम हुसैन के दौर में ताजिया का कोई बजूद नहीं था
00:39इतिहास कारों के मुताबिक इसकी शुरुआत नभी सल्लावर सल्लम की वफात के लगभग 800 साल बाद
00:44सन 1399 में बादशा तैमूर लंग के दौर में भरत से हुई थी
00:48तैमूर लंग हर साल मुहरम में करबला इराक जाया करता था
00:52लेकिन एक साल बीमारी की बज़ा से वो नहीं जा सका
00:55उसके दिल बहलाने और दर्बारी कलाकारों को खुश करने के लिए
00:59इमाम हुसैन के रोजे यानि मजार का एक नकली धांचा या मॉडल बनाया गया
01:03जिसे ताजिया कहा गया
01:04यानि ये पूरी तरहां से एक सियासी और सांस्कृतिक शुरुवात थी ना कि कोई मजहभी हुक्म
01:10अब बात करते हैं शरियत की
01:11इसलाम का बुनियादी उसूल है कि इबादत या दीन का कोई भी तरीका सिर्फ अल्ला के हुक्म और नभी
01:17कि सुनत से तै होता है
01:32वहीं सही बुखारी की मशूर हदीस है कि नभी ने फरमाया
01:36जिसने हमारे इस दीन में कोई ऐसी नई चीज़ शुरू की जो इसमे से नहीं
01:40यानि जिसका सबूत सुनत से नहीं
01:42तो वो खारिज यानि रिजक्टिट है
01:44इसलाम में किसी भी तरहा के मातम, जख्म पहुचाने
01:47या किसी इनसान की वफात पर रोने पीटने की सخت मना ही है
01:50नभी ने फरमाया कि वो शक्स हम में से नहीं
01:54जो मसीबत के वक्त चहरे पीटे और कपड़े पाड़े
01:56यही वज़ा है कि भारत और दुनिया के तमाम बड़े उलिमा एकराम
02:00और उम्मत के चारों बड़े इमाम
02:01इमाम अबु हनीफा, इमाम शफी, इमाम मालिक
02:04और इमाम एहमद बिन हंबल का
02:07इस बात पर इत्वाक है कि ताजिया बना गेर इसलामी है
02:10फत्वादार अलूम देवबन के मताबक
02:12ताजिया बनाना जलूस में ढोल ताशे बजाना
02:14और मातम करना बड़त यानी दीन में
02:16नई बुराई और गुना है
02:17आला हज़रत इमाम एहमद रजा खान
02:20ने अपनी मशूर किताब
02:21फतावा रजविया जिल 21 में साफ लिखा की
02:24ताजिया बनाना नजायज और बिदत है
02:27ताजिया के सामने मननते मांगना
02:29या उसे अदब से चुमना सخت मना है
02:31एहले हदीस उलेमा भी इसे
02:33मुकमल तोर पर नजायज कहते हैं
02:35यहां तक कि खुद शिया समुदाय के कई बड़े
02:37मुच्तहिद और उलेमा भी ढोल ताशे
02:40बजाने और सडकों पर शोर शराबा करने को
02:42सही नहीं मानते
02:43तो फिर सवाल उटता है कि इमाम हुसेन
02:45से महबत का सही तरीका क्या है
02:47दोस्तो इमाम हुसेन ने कर्बला के मदान में
02:49अपनी जान इसनी कुर्बान की
02:51ताकि इसलाम का पर्चम बलंद रहे
02:53और नमास कायम रहे
02:54उन्होंने यजीद की बद अमलियों के खिलाफ आवाज उठाई थी
02:58अगर उन से सची महबत का इजहार करते हैं
03:00तो उनके नक्षक अदम पर चलना होगा
03:02पांच वक्त की नमास पाबंदी से पढ़ें
03:04महरम के महीने में अल्ला की अबादत करें
03:06और नौ और दस महरम के रोजे रखें
03:08गरीबों को खाना खिलाएं पानी की सबीर लगाएं
03:11और इमाम हुसेन के नाम पर
03:12इसाले सवाब यानि दूआ करें
03:14नकली ढाचे बना कर सड़कों पर
03:16वक्त और पैसा जाया करने से बहतर है कि
03:18उस पैसे को किसी गरीब की पड़ाई या
03:20इलाज में लगाएं
03:21फिलाल इस वीडियो में इतना ही उमेद है आपको ये जानकारी पसंद आई होगी
03:24वीडियो को लाइक करें शर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल न भूलें
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