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Muharram 2026: मुहर्रम में ताज़िया बनाना, जुलूस निकालना और मातम करना इस्लाम में कैसा है? क्या यह जायज़ है या बिदअत? इस वीडियो में जानिए ताज़ियादारी का असली इतिहास (तैमूर लंग का दौर) और इस पर क़ुरआन, हदीस, देवबंद और बरेलवी (आला हज़रत) के उलेमा के प्रामाणिक फ़तवे। सच्चाई जानने और सुन्नत के रास्ते को समझने के लिए वीडियो पूरा देखें और शेयर करें।

Muharram 2026: Is making Taziya, mourning, and taking out processions in Muharram allowed in Islam? Watch this video to learn the real history of Taziya and what the Quran, Hadith, and prominent Islamic scholars (Deoband & Bareilly) say about it. Understand the authentic rulings to stay on the path of Sunnah. Watch till the end and share to spread the truth.


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Transcript
00:02मुहर्म का महीना आते ही हमारे देश के कई हिस्सों में ताजिया बनाने जलूस निकालने और मातम करने का सिलसला
00:07शुरू हो जाता है
00:08बहुत से लोग इसे इमाम हुसैन से महबत का जरीया मानते हैं तो वहीं समाच का एक बड़ा हिस्सा इसे
00:13गलत ठहराता है
00:14लेकिन एक मुसल्मान होने के नाते सबसे जरूरी ये जानना है कि इस बारे में अल्ला की खिताब कुरान, अल्ला
00:20के रसूल की हदीस और इसलाम के बड़े उल्यमा की क्या राय है
00:23क्या इसलाम में ताजिया बनाना जायज है या नहीं? आईए आज कि इस वीडियो में जानते हैं
00:27सबसे पहले ये जानना जरूरी है कि ताजिया बनाने की शुरुआत कब हुई?
00:31अल्ला के रसूल हजरत मुहमद अनके सहाबा या खुद इमाम हुसैन के दौर में ताजिया का कोई बजूद नहीं था
00:39इतिहास कारों के मुताबिक इसकी शुरुआत नभी सल्लावर सल्लम की वफात के लगभग 800 साल बाद
00:44सन 1399 में बादशा तैमूर लंग के दौर में भरत से हुई थी
00:48तैमूर लंग हर साल मुहरम में करबला इराक जाया करता था
00:52लेकिन एक साल बीमारी की बज़ा से वो नहीं जा सका
00:55उसके दिल बहलाने और दर्बारी कलाकारों को खुश करने के लिए
00:59इमाम हुसैन के रोजे यानि मजार का एक नकली धांचा या मॉडल बनाया गया
01:03जिसे ताजिया कहा गया
01:04यानि ये पूरी तरहां से एक सियासी और सांस्कृतिक शुरुवात थी ना कि कोई मजहभी हुक्म
01:10अब बात करते हैं शरियत की
01:11इसलाम का बुनियादी उसूल है कि इबादत या दीन का कोई भी तरीका सिर्फ अल्ला के हुक्म और नभी
01:17कि सुनत से तै होता है
01:32वहीं सही बुखारी की मशूर हदीस है कि नभी ने फरमाया
01:36जिसने हमारे इस दीन में कोई ऐसी नई चीज़ शुरू की जो इसमे से नहीं
01:40यानि जिसका सबूत सुनत से नहीं
01:42तो वो खारिज यानि रिजक्टिट है
01:44इसलाम में किसी भी तरहा के मातम, जख्म पहुचाने
01:47या किसी इनसान की वफात पर रोने पीटने की सخت मना ही है
01:50नभी ने फरमाया कि वो शक्स हम में से नहीं
01:54जो मसीबत के वक्त चहरे पीटे और कपड़े पाड़े
01:56यही वज़ा है कि भारत और दुनिया के तमाम बड़े उलिमा एकराम
02:00और उम्मत के चारों बड़े इमाम
02:01इमाम अबु हनीफा, इमाम शफी, इमाम मालिक
02:04और इमाम एहमद बिन हंबल का
02:07इस बात पर इत्वाक है कि ताजिया बना गेर इसलामी है
02:10फत्वादार अलूम देवबन के मताबक
02:12ताजिया बनाना जलूस में ढोल ताशे बजाना
02:14और मातम करना बड़त यानी दीन में
02:16नई बुराई और गुना है
02:17आला हज़रत इमाम एहमद रजा खान
02:20ने अपनी मशूर किताब
02:21फतावा रजविया जिल 21 में साफ लिखा की
02:24ताजिया बनाना नजायज और बिदत है
02:27ताजिया के सामने मननते मांगना
02:29या उसे अदब से चुमना सخت मना है
02:31एहले हदीस उलेमा भी इसे
02:33मुकमल तोर पर नजायज कहते हैं
02:35यहां तक कि खुद शिया समुदाय के कई बड़े
02:37मुच्तहिद और उलेमा भी ढोल ताशे
02:40बजाने और सडकों पर शोर शराबा करने को
02:42सही नहीं मानते
02:43तो फिर सवाल उटता है कि इमाम हुसेन
02:45से महबत का सही तरीका क्या है
02:47दोस्तो इमाम हुसेन ने कर्बला के मदान में
02:49अपनी जान इसनी कुर्बान की
02:51ताकि इसलाम का पर्चम बलंद रहे
02:53और नमास कायम रहे
02:54उन्होंने यजीद की बद अमलियों के खिलाफ आवाज उठाई थी
02:58अगर उन से सची महबत का इजहार करते हैं
03:00तो उनके नक्षक अदम पर चलना होगा
03:02पांच वक्त की नमास पाबंदी से पढ़ें
03:04महरम के महीने में अल्ला की अबादत करें
03:06और नौ और दस महरम के रोजे रखें
03:08गरीबों को खाना खिलाएं पानी की सबीर लगाएं
03:11और इमाम हुसेन के नाम पर
03:12इसाले सवाब यानि दूआ करें
03:14नकली ढाचे बना कर सड़कों पर
03:16वक्त और पैसा जाया करने से बहतर है कि
03:18उस पैसे को किसी गरीब की पड़ाई या
03:20इलाज में लगाएं
03:21फिलाल इस वीडियो में इतना ही उमेद है आपको ये जानकारी पसंद आई होगी
03:24वीडियो को लाइक करें शर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल न भूलें
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