00:00जहां क्रोध देखना तुरंट समझ जाना कि मैंने कोई उमीदपाल रक्षी थी
00:04मैंने कोई उमीदपाल रक्षी थी और पूरी नहीं हुई इसलिए गुस्सा आ रहा है
00:07अगर उमीद नहीं है तो क्रोध नहीं हो सकता
00:09और उम्मीद तभी उठती है जब पहले तुमने मान रखा हो कि कुछ कमी है
00:16तो क्रोध भी तभी आता है जब कहीं पहले कमी का हैसास होता है
00:20जो पूरा है मौज में मस्त है उसे गुस्ता क्यों आएगा
00:23तो तुम में से जो लोग जितना ज्यादा उम्मीद में आशाओं में जीते हों, वो जान ले कि उन्हें क्रोध
00:29में उतना ही तडपना पड़ेगा, क्रोध दुख है, क्रोध को यही मत समझ लेना, क्रोध हिंसा है, क्रोध हिंसा बाद
00:38में है, दुख पहले है, दुख से ही उठ
00:41कुछता है क्रोधी आदमी बड़ा दुखी होता है वो तुम्हारी करुणा का पात्र होता है अगली बार जब गुस्सा उठे
00:48तो समझ जाना कि कुछ चाहा था कुछ मांगा था मांगने का काम भिखारी का मैं भिखारी नहीं हूं
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