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00:00कृष्ण अर्जुन को नाचने के लिए नहीं बोल रहा है कुरुक्षेत्रे मैं कह रहा हूँ युद्यसो बात हारी है समझ
00:08में
00:10वहां नाचोगे नहीं सामने ये कौरोपक्ष खड़ा है और तब तो दाओं पर सर्फ भारत लगा था आज पूरी धरा
00:16लगी है क्या बोलू नाचो या बोलूगी लड़ो हमारी सारी माननेताएं हमारी सारी धारणाएं हमारे सारे विश्वास बतादो कुछ भी
00:26होता क्या अ�
00:31पारा नहीं है वो भी समाज ने दिया है अब दुर्योधन से नहीं लड़ पाते हैं अर्जुन अगर गीता ने
00:39पहले अर्जुन को खुद से न लड़वा दिया होगा तो पहले खुद से लड़ो और खुद से लड़ पायो इसका
00:45प्रमाण ये होगा कि
00:49जिसके जीवन में गीता उतरती है वो कोने में मैट और माला लेकर नहीं जपने लग जाता है वो युद्ध
00:54में उतरता है ज्यादा संभावना यही है कि हार होगे पर हार जीत की फिक्र करे बिना लड़ो और अंजाम
01:01की परवाह करे बिना लड़ो अपने घाओ गिने बिना �
01:15अगा सब्सक्राइब करते हैं और अध्यात्मिक बाते करते हैं और ऐसी बहुत घातक होती है क्योंकि वह आधार हीन होती
01:27है जाद अतर और चुकि मैं आपको काफी समय से सुन रहा हूँ तो इनका प्रभाव मुझ पर बहुत कम
01:32पढ़ता है पर फिर भी कुछ
01:34विच्छ ऐसी चीज़े रहती हैं जो घर कर जाती हैं मनमें रह जाती है
01:38कभी में है कि आप सच लग जाती है जैसे इक दीदी को बोलते पर सुना था मैंने कि
01:44समाज को तभी चिंद्क कर भी महत्त देना जाएं जब तक समाज से हमारा weekend
01:49भर रही है या वो बिल्स भर रहे हैं अच्छा घर के बिल्स जी जी तो मतलब हम कैसे समझें
01:56या क्या तरीका है ऐसा कि यह यह बहुत अच्छा उदारण है खोखले विद्रोह का
02:04ये बहुत बहुत अच्छा उधारण है खोखले विद्रो का
02:08कोई आ करके ग्यान दे रहा है कि हम समाज की क्यों सुने
02:15क्या समाज मुझे पैसा दे रहा है क्या समाज मेरा घर चला रहा है क्या समाज मेरे घर के खर्चे
02:22उठा रहा है
02:24हम समाज की क्यों सुने और यी बात सुनने में कैसी लग रही है
02:27कि बात तो सही है समाज में इतने लोग हैं कुछ भी बोलते रहते हैं
02:30पर अपने घर के खर्चे तो मैं ही उठाता हूँ
02:33अपनी जितनी समस्याएं हैं जब्मेदारियां हैं वो तो सब मैं ही देखता हूँ है न तो हम समाजी क्यों सुनें
02:41ये बहुत अच्छा उदारण है उस प्रकार के दर्शन का जो आपको बड़ी आसानी से
02:54मौका दे देता है खुद को विद्रोही कहने का सस्ता विद्रोह और हंकार चाहता है कि विद्रोही कहलाएं क्योंकि वो
03:03भी उसके लिए एक पदक जैसा होता है
03:05मैं क्या था मैं अमीर था मैं ग्यानी था मैं सुन्दर था मैं मजबूत था और अब मैं क्या हूं
03:13मैं विद्रोही भी हूं देखो एक चीज़ और जोड़ गई मेरे तमगों में मैं विद्रोही भी हूं I am the
03:19rebel I am the rebel
03:22ये ये सस्ता विद्रो है बताओ क्यों ये कह रहे हैं कि मैं उनलों की क्यों सुनूंगा कोई मेरे घर
03:28के घर चे वो चला रहे हैं मेरे घर की जिम्मेदारियां क्या वो उठा रहे हैं मैं इनलों की नहीं
03:31सुनूंगा पर तू ये बता तुझे ये किसने बताया कि घर की जिम्मे
03:50पैदा हुआ था तो क्या तू ये घ्यान लेकर पैदा हुआ था कि एक घर होता है
03:56और घर का मतलब ही होता है कि हाँ इस तरी पुरुश और दो बच्चे रहेंगे
04:00और यही इकाई है और इसी का सबसे पहले सरुप्रथम ख्याल रखना है
04:04और यही तुम्हारा सर्वोच कर्तव है ये सब तुझे किसने बताया
04:09ये तुझे समाज नहीं बताया अब तू कह रहा है मैं समाज के खिलाब विद्रो करके
04:14अपने घर की जिम्मेदारियों का पालन करूँगा तो तू किसका पालन कर रहा है
04:21तू चल समाज की ही सीख पर रहा है
04:25तू पालन अभी भी समाज के आदेशों का कर रहा है
04:28तू अभी भी उतनी बड़ा गुलाम है
04:30लेकिन अब तूने बैमानी करके
04:32अपने आपको
04:35रिबल विद्रोही होने का
04:38तमगावी पहना दिया
04:43साब मैं किसी के नहीं सुनता
04:45मैं तो अपनी सुनता हूँ
04:47और यह जब तू अपनी सुनता है
04:49जिसको तू अपनी अंतरात्मा और बोलता है
04:51यह सब कुछ भी कहां से आ रहा है
04:54समाज से ही आ रहा है
04:56तो है तू अभी भी उतना ही बड़ा टट्टू
05:00है तू अभी भी उतना ही बड़ा आज्या पालक
05:07बिल्कुल
05:10आज्याकारी का दहवा है
05:12लेकिन अब तूने अपने आपको ये जता लिया है
05:15कि मैं तो विद्रोही हूँ और स्वाधीन हूँ
05:21आप अपनी निजी जिन्दगी में
05:24जिसे अपनी स्वेच्छा बोलते हैं
05:27वो क्या आपकी इच्छा है
05:29स्वेच्छा माने सामाजिक इच्छा
05:32स्वेच्छा माने स्वा की इच्छा नहीं होता
05:36आपकी सारी स्वेच्छाएं सामाजिक हैं
05:38बस आपको भर्म हो जाता है कि वो आपकी इच्छा है
05:43आपकी सारी इच्छाएं सामाजिक हैं आपकी कोई इच्छा आपकी नहीं है
05:47बिरला होता है वो आदमी जिसकी इच्छा मुक्त होती है उसे बोलते हैं मुक्त इच्छा
05:55मुक्तेच्छा तो उसको ही होगी जिसका हंकार घट करके ना बराबर हो गया है
06:02हमारी स्वेच्छाएं सब नकली होती है
06:06हमारी सारी इच्छाएं समाज से ही आ रही है
06:08और फिर हम कहते हैं मैं समाज की नहीं सुनूँगा अपनी इच्छाओं की सुनूँगा
06:12पर तुम्हारी इच्छाएं तो समाज से ही आई ये क्या हो गया ये क्या हो गया अपनी कोई इच्छा बता
06:21दीजिए जो रहती अगर आपका जीवन वैसे नहीं बीता होता जैसे बीता है अगर आपका परिवार वैसा नहीं होता जैसा
06:30है अगर स्कूल कॉलेज में आपको वो म
06:33और वो पढ़ाई न मिली होती जो मिली कोई इच्छा बता दीजे जो बची रहती अपने जीवन का कोई निरणे
06:39बता दीजिए जो वैसा ही रहता जैसा है अगर आपके ऊपर समाज के प्रभावना पड़े होते कुछ भी है ऐसा
06:47जो सचमुच मुक्त रहा है आपके जीवन में
06:50सब कुछ तो समाजी करा है कपड़े कैसे पहनते हो ये आपने खुद अपने लिए डिजाइन बनाया है क्या जो
06:58समाज में चल रहा है वही पहन लिया क्या बोलते हो क्या पसंद है क्या पसंद है क्या खाने में
07:04क्या पसंद है इंदौरी सेव गुजिया और नमकीन क्यों क्य
07:11तोगी इंदौरी हैं, इंदौरी ना होते, हैदराबादी होते, तो बिर्यानी पसंद होती, इटेलियन होते, तो पास्ता पसंद होता, जापानी होते,
07:24तो सूशी पसंद होती, तुम्हारी पसंद में तुम्हारा क्या है, तो गलत हो गया, डेन्मार्क में पैदा हुए होते,
07:37तो थोड़ी बोलते सिक सर सिक सर सिक सर वहां कौन क्रिकेट देख रहा है वहां कोई नहीं देख रहा
07:44हो तो तुम भी नहीं देखते तुम क्याते हो क्रिकेट मुझे बहुत पसंद है तुम्हारा अपना तो कुछ भी नहीं
07:49है
07:52तुम्हारा दिल भी तुम्हारा नहीं है, वो भी समाज ने दिया है, अब, ओ, फेक रिबेलियन, फेक रिबेलियन, पकड़ा गया,
08:04पकड़ा गया, जूठा, जूठा,
08:12जो तुम्हें बताए, कि समाज का पालन करो, वो तो तुम्हारा दोशी है, लेकिन ये सब जो सेल्फ एल्प और,
08:20ये जो मौडरन गुरूस चल रहे हैं, जो तुमको रिबेलियस बनाते हैं, ये ज्यादा बड़े दोशी हैं, क्योंकि ये तुम्हारा
08:28अहंकार कायम रखते हु
08:30वे तुम्हें विद्रोही हो जाने की, कहला जाने की सहूलियत दे देते हैं, हो तुम वही जो तुम हो, बस
08:38अब एक सुईधा मिल गई है, कि मैं अपने आपको क्या बोलूँगा, मैं रिबेल हूँ, मुझे भाव दो, मुझे दब
08:47के चलो,
08:54हमारी सारी मानने ताएं, हमारी सारी धारणाएं, हमारे सारे विश्वास, बता दो कुछ भी होता क्या अगर तुम्हें समाजने न
09:02दिया होता, जल्दी बोलो,
09:14आप पैदा हुए होते हैं, और जैसा कि होता था, शायद अभी भी होता होगा, बच्चा बदल जाता,
09:21वहाँ मेटरिनिटी वार्ड में, आप कहीं और चले गए, और जिन दिदी के बास चले गए, वो आपको ले करके,
09:30गोवा निकल गई,
09:40तो अब नमकीन और फाफड़े का क्या होता, अभी भी कहते हैं, जान दे दूँगा फाफड़े के लिए, अभी भी
09:49बोलते हैं क्या, बोलते हैं, और जो बाते हैं आप कहते हैं, चीचीची ऐसा तो मैं करी नहीं सकता, ऐसा
09:55तो मैं सोची नहीं सकता, नौर्थीस में होते है
09:58सोच भी रहे होते, कर भी रहे होते
10:03तो आप हो गया
10:07और कईयों को बहुत रहता है
10:09मैं नारी शक्ति हूँ
10:11कईयों को रहता है
10:12मैं जबरदस्त मर्द हूँ, पुरुश हूँ
10:15एक क्रोमोसोम थोड़ा इदर से उधर हो गया होता
10:18उसका मूड बदल जाता
10:28तो नारी शक्ति फॉलादी हो जाती
10:35और मर्द कोमलागे नहीं बन जाता
10:39और आज तो वही आइडेंटिटी है आपकी
10:43राव मैस्कुलिनिटी आपकी
10:46टेस्टोस्टेरोन और बॉयल
10:51यो देखो
10:57चोटा मोटा नहीं हो अलफा हो
11:02और करना कुछ नहीं था वो जो एक्स था उसको अपनी टांग एक बस ऐसे मोड लेनी थी
11:10सारा जेंडर प्राइड गाया बोजाता
11:14दोनों तरफ का
11:23आपका अपना क्या है
11:27आओ
11:31आओ
11:33अब क्या करें
11:39साथ के दशक में भारत ने सैनने कारवाई करके पुर्तगालियों से गोवा को छुड़ा लिया
11:44तो हम गोवा को सुदेश बोलने लगे
11:48उससे पहले हम गोवा को विदेश बोलते थे
11:53आजादी के
11:5410-12 साल भीज जाने के बाद भी
11:57गोवा पुर्तगाल का हिस्सा था
11:59तो हम गोवा को क्या बोलते थे
12:0147 के
12:0312-14 साल बाद तक भी
12:05गोवा विदेश था
12:06और 47 के कुछ साल पहले तक
12:09कराची सुदेश था
12:16और सिक्किम बिचारे का तो
12:17और और बाद में लगा है
12:26कि आप 35 में पैदा हुए होते तो
12:30बड़ी समस्या हो जाती
12:32कि स्वदेश बोले
12:35कि विदेश बोले सब आती जाती हवाओं पर निर्भर है हमारा
12:40हमारा प्यार भी
12:48कुछ आ रही है बात समझ में
12:53इतना अडमत जाया करो
12:57कि ये सब बाहरी है और ये सब भीतरी है
13:01बाहरी तो बाहरी है जिसको तुम भीतरी बोलते हो
13:04वो भी बाहरी है
13:15अध्यात्म का अर्थी है
13:17जिसको तुम भीतरी माने बैठे हो
13:20उसको बाहरी जान लेना
13:24यही मुक्ति है
13:29बात आ अधर है इसमझ में
13:32दुनिया में बाहरी आज़ादी
13:34आज जितनी है इनसान को उतनी कभी नहीं थी
13:38हम गणराज है हम लोकतंत्र है
13:42कितने तरीके की आज़ादियां फ्रीडम समय मिली हुई है
13:46और दुनिया में ज़्यादातर देशों में
13:50किसी न किसी हद तक डिमोक्रिसी और फ्रीडम मौजूद है
13:55तो बाहरी आजादी के लिए आप क्या संगर्ष करोगे बाहरी आजादी तो मिल गई
14:01आज के इनसान की समस्या बाहर की गुलामी नहीं है बाहरी आजादी मिल गई
14:08आज के इंसान की समस्या भीतरी गुलामी है
14:12तुम अपने गुलाम हो
14:14तुम हंकार के गुलाम हो
14:16हंकार सुएम अपने गुलाम है
14:19तो आज बाहर करांती करने से कुछ नहीं मिलेगा
14:22कि जा करके नारे लगा रहे हैं
14:24कर रहें और वो कर रहें तुम्हारा दुश्मन आज बाहर नहीं है भीतर बैठा है बाहर भी है पर पहले
14:33बाहर ही था पहले बाहर ज्यादा बड़ा था दुश्मन आज बाहर वाला जो दुश्मन है उसने अपना आकार बाहर घटा
14:44लिया है और भीतर बढ़ा लिया है क्योंकि
14:47कि वो भी जानता है कि अगर बाहर से किसी को काबू में करोगे तो वो विरोध करेगा इससे अच्छा
14:54यह कि उसके भीतर ही घुश जाओ और उसको भीतर से नियंतरित करो आपका दुश्मन आज आपके भीतर बैठा है
15:00आपकी मान्यताएं बनकर आपके विश्वास बनकर आपक
15:14बीतर बैठा हुआ है और मज़ेदार बात यह कि उस दुश्मन को आप खुदी सुरक्षा दे रहे हो यह बोलकर
15:22कि वो तो मैं हूँ वो मेरा दुश्मन नहीं है वो तो मैं हूँ ऐसा दुश्मन कभी हारेगा क्या जिसे
15:30खुद आपने सुरक्षा दे रखी हो
15:33कुछ आ रही है बात समझ में हूँ कहिए
16:01करेंगे और सामाजिक मुद्दो की भी रील शेयर करेंगे बट उनके जीवन से कुछ ऐसा दिखता नहीं कि ऑन ग्राउंड
16:08उनकी लाइफ वही है जो बाकी सबकी लाइफ है वो वही डर्रा फॉलो कर रहे है जो सभी कर रहे
16:13हैं बट अपने आपको बस एक ऑनलाइन प्रेज
16:31इसी भी तरह का सुख नहीं लेने देता आप बाकी गुरुओं के साथ रोगे वो आपको यह सुख तो बिलकुल
16:41दे ही देंगे यू आर दा रोमांटिसाइज्ड रिबेल यू कैन लीड अलाइफ फ्री ओफ कंडिशनिंग मैं हंकार से बोलता हूं
16:53कि तू गंदा है तू ब�
17:03तो मेरी तस्वीर दिखागर के कोई कहे कि यह देखो मैं नारे लगाऊंगा बढ़िया चीज मिल गई या मुझे किनी
17:09और लोगों की तस्वीरों के साथ आप बैठा रहे हो तो आप भूल कर रहे हो मैं वो बात बिलकुल
17:13नहीं कह रहा हूं जो औरोंने कही है जो औरोंने ब
17:31अगेरा की बात कर रहा हूं जो कुछ भी हंकार को अच्छा लग सकता है वो मुझसे कभी मिला क्या
17:37मुझे तो ताज्यों में आप इतने लोग आ क्यों गए
17:44मैंने आज तक किसी को कुछ ऐसा नहीं दिया जो उसे अच्छा लगता हो
17:51ज्यादा संभावना यही है कि आप मेरी बात को कुछ उल्टा उल्टा समझ के आ गए हो जो मेरी बात
17:57समझने लग जाते हूं बहुत जोर से दूर भागते हैं जैसे मौत से भागा जाता है
18:06तो मैं कोई ऐसी बात नहीं बोल रहा हूं जिसको आप रील्स में डालकर उसके पीछे
18:10बीट्स डालकर और दिखा दोगे कि
18:12धिन्चक धिन्चक धिन्चक धिन्चक
18:14देखो अब हम रिवेलियन कर रहे हैं
18:16यह कर रहे हैं वो कर रहे हैं
18:17उन सब में तो हंकार को बला सुख मिलता है ना
18:20I am the street fighter
18:22I am the iconoclast
18:27I am anti-ritual, anti-tradition
18:31मेरे पास anti-ritual वाले आते हैं
18:33कि कहता हूं कि ritual तौह का एक anti-ritual भगो यहां से
18:40Secular लोग आते हैं तो बोलता हूं तुम cambiना pacism ही तुम्हारा dogma है
18:44religious लोग ऐते मैं कहता हूं तुम्हें religion का मतलब यह नहीं पता भगो यहां से
18:52।으 Left वाले आते हैं बोलता हूं
18:53तुम किसी की नहीं सुनते बस अपने हंकार को पूछते हो भगो यहां से
18:58राइट वाले आते हैं मैं कहता हूँ कि जो गरंथ हंकार को तोड़ सकते हैं तुमने उन गरंथों को ही
19:02तोड़ दिया
19:03भगो यहां से मैं तो किसी को भी सुख नहीं देता
19:09ट्रेडिशनल पेट्रियार्की वाले आते हैं मैं कहता हूं तुमने अपने हंकार को पोशन देने के लिए महिलाओं की दुरगति कर
19:16रखी भगो यहां से
19:18मौडरन फेमिनिस्ट सा जाती हैं मैं कहता हूं तुम्हें तुम्हारी दुरगति कराने के लिए पुर्शों की जरूरत यह नहीं तुम
19:23खुद अपनी दुरगति करती हो भगो यहां से
19:26कि मैं किसको सुख दे रहा हूं कि तुम मेरी तसवीर किसके साथ लगा रहे ओ उन विचारों कोई पुरा
19:32लगेगा मैं उनकी श्रीनी का हुई नहीं
19:38कौन से गुरु ने तुम से साफ साफ कहा कि दूद का रंग लाल है तुम जिनके साथ मेरी तस्वीरे
19:46लगा रहे हो वो तो अंडे मास की बुराई तक न कर पाएं
19:52बलकि अनुमत ही दे रखी थी हाँ जो हमारे आश्र में भी अंड़ा उंड़ा चल रहा है तुम कहा मेरी
19:56तस्वीर लगा रहे हो वो उचे लोग हैं उनके साथ मुझे लगा करके तुम उनको असुधा दे रहे हो
20:06मैं बहुत नालायक हूँ और बत्तमीज भी
20:11शालीहिन भद्र लोगों की संगति मुझे मत बठा दिया कर उनके साथ बुरा हो जाता है
20:19मैं किसी का अच्छा कर सकता हूँ कभी
20:22कोई खुशी-खुशी आए मेरे पास
20:24वो बिचारा मुँ उतार के आपस जाएगा
20:29ऐसे ही तो है
20:41आनंद आता है कि नहीं आता है गुरुओं की वारणी सुन करके
20:47जैसे बिस की लहरे हैं उससे बहे जा रहे हैं
20:50आता है कि नहीं
20:51ऐसा लगता है दो है कि ने कोई टाहीस सुना दी और भेनी होता है और फिर कभlamation है
20:55और चुटकुले भी चल रहे हैं, मैं कहां किसी को आनन्द दे रहा हूं, यहां तो कोई बिचारा मासूम शांती
21:03से सो रहा हो, मेरी आवास सुनके बिस्तर से गिर पड़े,
21:13सब की जिन्दगी खराब करना ही मेरा मकसद है,
21:18तुम कहां मुझे सोच रहे हो कि और जितने परंपरागत गुरु हुए हैं, आधुनिक गुरु हुए हैं, उनके साथ मेरी
21:26तस्वीर लगा दोगे, और उन्हीं की कोटी में मुझको रख दोगे,
21:31मैं उन्हीं की तो भुगत रहा हूँ, उन्होंने कोई धंका काम करा होता तो आज दुनिया ऐसी होती,
21:37यह जो मुझे कचरा साफ करना पढ़ रहा है, यह तुम्हारे पुराने गुरुओं का ही फैलाया हुआ हुआ है,
21:46और अहंकार और ज्यादा गठीला और प्रबल हो जाता है, जब उसे अध्यात्म का आश्रे मिल जाता है,
22:01साधारण व्यक्ति को गीता समझाना आसान है फिर भी,
22:09लेकिन जिसने कहीं और जाकर किसी गुरुदेयों की गीता पढ़ लिए है, उसको समझाना बड़ा मुश्किल हो जाता है,
22:19जिसके दिमाग में वो ब्लिस और पीस और लव वाली बात आ गई,
22:23कि जो अध्यात्मिक गुरु होता है, वो तो ऐसा होता है,
22:46चौपट, सब चौपट, आप कुछ नहीं हो सकता,
22:49कि अध्यात्म माने तो ब्लिस, लव और पीस,
23:02लेट्स लव इच अधर अनकंडिशनली,
23:12और दुखी मत रहो बेटा, तुम तो नाचो,
23:16बड़ी समस्या होई, शुरू-शुरू में लोग आते थे,
23:18जब उन्हें पता ही नहीं था कि, मैं कितनी घटिया चीज हूँ,
23:23आ जाएं, बैट जाएं,
23:26और पंदरा, बीस, नट आदे घंटे के बाद,
23:28ऐसे खुजाना शुरू कर दें, धरदर देखना शुरू कर दें,
23:31बेचैनी में, और फिर कोई वॉलन्टियर उसको बलागे पूछें,
23:35पर नाच कब शुरू होगा,
23:39बोलें, ये बोलते ही रहेंगे, क्या,
23:41अध्यात माने तो नाचना होता है न,
23:44वो कब शुरू होगा,
23:49और सुनने कि उनकी,
23:52कोई तबीय थी नहीं,
23:54उठें तो कहें, हमें चेहर सोर्स पड़ गए है,
23:57जैसे बीमारों को बेट सोर पड़ जाते हैं न,
23:59बैठने करण,
24:02छाले, फफोले,
24:04बोले, तीन-तीन, चार-चार घंटा बेठा के बात करा,
24:07यह देखो, खोल के दिखा रहें, इतना बड़ा पफोला निकला है,
24:13तो हम कहें, के फफोला बैठने से नहीं निकला है,
24:15घिसने से निकला है,
24:17घिस कहे को रहे थे,
24:21इतने ही पुरा लग रहा था उटके भग जाते वा कुरसी घिस दी तुमने हमारी कुरसी फाड़ दी
24:25गरीब मेरी संस्था
24:33ना तो मैं तुम्हें नाचने का सुख दूँगा
24:35ना लव, पीस और ब्लिस का दूँगा
24:38तुम कहां मुझे औरों की श्रेणी में ला कर के कह रहे हो कि आचारे जी भी वही बात कहते
24:43हैं जो औरों ने कही है
24:47मेरे साथ होना तो बड़े खतरे की बात है
24:51बहुत खतरे की बात है
24:54किसी दिन ऐसा होगा कि
24:58मैं आऊंगा बोलने के लिए और एक-एक कुर्सी खाली पड़ी होगी
25:01और सच बोल रहा हूं मुझे कोई ताज्यूब नहीं होगा
25:05उसका मतलब यह होगा कि मेरी बात लोगों ने समझ ली
25:08सब समझ गए क्या बोल रहा हूं इसलिए भग गए
25:12अभी तो आप ना समझी में आ गए हो आप कुछ का कुछ समझ रहे हो
25:22इतनी हिम्मत आप में नहीं और इतनी अच्छी दुनिया नहीं
25:25कि आप जो मैं कह रहा हूं उसके साथ चल सको
25:30नाचने गाने वाली धार्मिक्ता बढ़ियां है
25:37उसके साथ आप चल लोगे
25:40या ऐसी वाली जो आपको रिवेल बना दे
25:43कि सुनो और बोलो हाँ हाँ हाँ किसी के नहीं सुननी अपनी करनी है बस
25:46वो भी बढ़ियां है आप उसके साथ भी चल लोगे
25:50जहां बाद सीधे सीधे यहां चोट खाने वाली हो ना
25:57उसके लिए प्यार चाहिए
26:00इतना प्यार हमारी प्रत्वी पर है नहीं
26:09आपने सवाल पूछा गया रहे अचारे जी हम कुछ करना चाहते हैं
26:13पर कोई साथ नहीं देता
26:15मुझे देख लो ना मुझे तो यह भी पता है कि zaaस्थ दे रहे हैं वो भी नहीं दे सकते
26:23आपको किसीका साथ मिल गया तो आप शायद खुश हो जाएं
26:26मुझे तो जिनका मिला भी हुआ बहुतों का मिला हुआ है कहने को आखड़े तो बहुत बड़े-बड़े
26:31मुझे तो ये भी पता है कि जिनका मिला हुआ है उनका भी नहीं मिला हुआ
26:34मैं तब भी अपना काम करे जा रहा हूँ
26:36ऐसे आप भी अपना काम करे जो
26:44आपसे जो बात मैं कह रहा हूँ किसी की कोटिकी नहीं है
26:49इस मुर्खता से बाहर आ जाईए कि हाँ हाँ सबने एक ही बात तो कही है
26:53नहीं सबने एक ही बात नहीं है बात और बात में अंतर होता है
26:55एक बात होती है
26:59जो अहंकार पचा जाता है
27:01क्योंकि वो बात
27:02अहंकार के अलावा किसी विशे की होती है
27:06अहंकार के अलावा
27:07जिस भी विशे की बात होगी
27:08समाज, इतिहास,
27:10consciousness, awareness, this, that
27:12अहंकार खा जाएगा
27:14मैं और कोई बात करते ही नहीं
27:16आपने देखा है
27:17कोई भी बात हो, सीधे कहां ले जाता हूँ
27:20सीधे उसी के उपर
27:21मैं वही बात नहीं कह रहा जो समने कही है
27:24मेरी बात हंकार के पचाए पचेगी नहीं
27:26हाँ, इतना है
27:27कि उसने समझी ही नहीं
27:30तो थोड़ा खुछ रह लेगा
27:31कि चलो चलो सुरक्षित बात है
27:33लेकिन जिस दिन हंकार साफ साफ जानने लग गया
27:35कि मैं क्या गह रहा हूँ
27:38या तो मिटेगा या फिर भगेगा
27:42या तो मिटेगा या फिर भागेगा
27:56कृष्ण अर्जुन को नाचने के लिए
27:58नहीं बोल रहा है कुरक्षेत्र में
28:00मैं कह रहा हूं युद्ध्यस्व बात हारी है समझ में वहां नाचोगे नहीं सामने ये कौरोपक्ष खड़ा है और तब
28:10तो दाओं पर सर्फ भारत लगा था आज पूरी धरा लगी है क्या बोलू नाचो या बोलूगी लड़ो
28:17लड़ो और अन्जाम की परवाह करें बिना लड़ो अपने घाओ इने बिन लड़ो जादा संभावना यहीये कि हार होगे पर
28:28हार जीत की फिकर करें बिना लड़ो क्योंकि लड़ना इधर्म है उसी में प्रेम है उसी में जीवन है
28:43और उन से लड़ सको इसलिए सबसे पहले खुद से लड़ो
28:50दुरियोधन से नहीं लड़ पाते अर्जुन
28:53अगर गीता ने पहले अर्जुन को खुद से न लड़वा दिया होता
28:59दुरियोधन से बाद में लड़े पहले खुद से लड़े
29:02तो पहले खुद से लड़ो और खुद से लड़ पायो इसका प्रमाण ये होगा कि अब समाज में दहाड़ोगे
29:11चुप नहीं बैठोगे काईरों की तरह
29:15जैसे अरजुन के तीर बरसे थे चारों तरफ
29:19तुम्हारे वचन बरसेंगे
29:25आ रहे ये बात समझ में
29:26कि गीता सुनके अरजुन नहीं ये कर रहा था कि कोने में कहीं ध्यान लगा कर बैठिया
29:33अतिवत्तम
29:36मधुसूदन क्या अपने बात बताईए
29:38अब मैं एक कोने में जा रहा हूँ
29:41जरा मुझे को मैट और माला दे दीजिए
29:47मैं माला फेरूँगा मैं जपूँगा
29:52जिसके जीवन में गीता उतरती है
29:54वो कोने में मैट और माला लेकर नहीं जपने लग जाता
29:58वो युद्ध में उतरता है
30:02उसके घाव फिर उसकी सच्चाई का सुबूत होते है
30:14अब बताओ मुझे किसके साथ रखोगे
30:21ना ब्लिस पाने वाले हो ना पीस पाने वाले हो
30:23ना प्योर कॉंशिसनस पाने वाले हो
30:27ना टूटल फ्रीडम फ्रॉम कंडीशनिंग पाने वाले हो
30:30मेरे साथ तो घाव पाने वाले हो
30:32मंजूर है
30:34कुछ मद बोलो छोड़ो
30:37काय को तुमसे जूट बलूआँ
30:46कर दो
31:08कर दो
31:44आपको खुशी होगी इसनाते
31:46जो हमारी अपनी एप है
31:48जिसमें हमारी गीता और बाकी सब कारिकरम चलते हैं
31:51यहाँ पर बुद्ध हैं, गीता हैं, उपनिशद हैं, अश्टावक्र हैं
31:55यह मुझे मिले मेरी जिन्दगी बदली
31:57यह तुम्हें मिलेंगे तुम्हारी जिन्दगी भी बदलेगी
31:59सच पूछी हो तो मतलब लाखों नहीं तो कम सकम हजारों जिन्दगी हैं तो हैं जो बिलकुल बदली हैं
32:04दो लाग से अधिक गीता प्रतिभागियों के साथ जुड़े आचार्य प्रशान्त एप पर
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32:27बहुत कुछ
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