00:00ओम नमस्षिवाये इस समय हम लोग हैं ओम परवदपद बाबा के अपने स्थान जा बाबा ओम स्वरूप में बसते हैं
00:06अब ये ओम है क्या हम सब ने सुना है ओम की महिवा के बारे में
00:11ओम उन तीन अक्षरों से बना ये नाम जिसके नाद से ये स्रिष्टी पैदा हुए
00:16वेदों का साथ भगवान शिव का एक ओंकार स्वरूप अ उर और मा
00:24हमारे शरीर में अगर आप देखें तो साथ चक्र हैं और सातों चक्रों के अपने अपने मंत्र हैं
00:30लम वम रम यम हम और ओम आप अपने शरीर में नाडियां अगर देखें तो मूलाधार से स्टाट हो करके
00:39मूलाधार से शुरू हो करके इंगला पिंगला और सुशुमना जब चलती हैं तो यहां आग्या चक्र पे आकर के रुख
00:45जाती हैं
00:46इसके आगे सिर्फ एक औम का इसके आगे सिर्फ एक रह जाता है वो अद्वाइत की भावना अलग हो जाती
00:55है हम सिर्फ एक के विशह में सोचते हैं एक का चिंतन करते हैं मा और पिता को यानि के
01:02शिव और शक्तियों को अगर आप देखें तो ये दोनों X और Y क्रोमोजोम हैं
01:09एक्स और Y क्रोमोजोम जिससे मैंने पहले भी बताया हमारा DNA बना अर्धनारिश्वर इन दोनों से ही पूरी सृष्टी है
01:18इन दोनों से ही सबकुछ है ये दो ही हैं जो सृष्टी का सरूप है मा का हस से छोटा
01:25सा हसने का स्पंदन सृष्टी की रचना कर रहा है और पिता का
01:39प्लानेट से हैं बागे जितने ग्रहे हैं उन प्रकृती का सुरूप है कारे वही करते हैं क्योंकि प्रकृती ही कारे
01:45करते हैं मा का बहुत बड़ा योगदान रहता है मेरे पीछे ही यहां पर नाभी प्रदेश है मा का नाभी
01:52प्रदेश जहां मा की नाभी गृत यह ओम प्र�
02:09उससे आग रहे कि आप एक बार ओम परवत कैलाश आदी कैलाश इन सब स्थानों पर जाने का अपना कार्य
02:16करम यह प्रोग्राम जरूर बनाए ओम नमर्शिवाए
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