00:00आपने कहानी सुनी होगी न उस मेढक की
00:02एक था जिसको सीधे ही उबलते वे पानी में डाल दिया
00:05वो जैसे उबलते पानी उडाला तो उड़के बाहर आ गया
00:07बोला पागलो कहा मार दो गया
00:08वो जल और गया जना क्या कर दिया काहे को डाल दिया
00:11एक दूसरा मेढ़क था, उसको पानी में डाला, जरा सा तापमान बढ़ाया, वो जहिल गया
00:15जरा सा और बढ़ाया, उसने का हाँ यार गर्मी बढ़ तो रही है, ःथूडीसी ही तो बढ़ी है, वो दिशना
00:20दिया
00:20तापमान लगभग वही पहुचा दिया जिस तापमान पर पिछला मेढ़क चुपचाप जल्दी से कूद के भग गया था
00:26ये मेढ़क उबलकर मर गया
00:28हमारे साथ उस दूसरे मेढ़क वाली घटना घट रही है
00:30क्लाइमिट चेंज को लेकर के आपने जिस कोराम की बात करी
00:34अगर वो सब कुछ एक तिन या एक हफ्ते या एक महीने में घटेत हो जाए
00:37और एक ही जगह पर हो जाए घटेत
00:49तो हमें मजबूर हो करके इसका संग्यान लेना पड़ेगा
00:53दिक्त ये है कि कारवंड और आउकसाइड का जो ताई बड़ चुका है
01:05तो हमें नहीं पता चलता कि ये कितनी बड़ी बात है
01:07बात समझने हैं
01:13जो खेतों की उपादकता हैं
01:16जो क्रॉप इल्ड है वो 30 प्रतिशत नीचे जाने वाली है
01:20और हमारी आबादी लगभग 15-20 प्रतेशत तक तक बढ़ चुकी होगी
01:24हम बात करते हैं में इतने ट्रिलियन की एकनॉमी बनना है
01:27हमें कितने बिलियन एकनॉमी का प्रतिवर्ष नुकसान होना शुरू हो चुका है
01:32अभी ही अल्रेडी हम उसकी बात नहीं करते हैं
01:36क्यों क्योंकि वो सबकुछ क्रमशह हो रहा है मेधक धीरे धीरे उबल रहा है
01:41तापनान धीरे दीरे अभढ़ रहा है तो मेधक को लगीए नहीं रहा कि कोई अन्होनी घट रही है
01:46वह कूद के बाहर ही नहीं आ रहा है
01:50और वो इमर्जन्सी पे जा कई बटन दवेगा नहीं, ये दुनिया मेढक की तरह ही उबलकर मरने वाली है.
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