00:00आप मेरे कितने लोग किसी के हाथ का खाना बहुत पसंद करते हो
00:05सही सही बताओ ऐसे नहीं देखो अभी
00:06अभी अभी होली बीती है घर भी गए होगे
00:09हाथ की चारीशें भी होई होगी चाहे मा का हाथ हो किसी का हो
00:13जल्दी बताओ जल्दी बताओ
00:14अच्छा मैं नहीं देख रहा बता तो
00:22हम जूट कितना बोलते हैं खुद से
00:24कुछ भी
00:26खाना है तो बोल देंगे
00:27है है है तुम्हारे हाथ का इसलिए खा रहा हूं
00:30जहां सबसे आदा खाते हो
00:31सबसे गंदा खाते हो रेस्टराउ में
00:33वहां किसके हाथ का कभी पता होता है
00:37उसका हाथ देख लोगे तो खा नहीं पाओगे
00:39तो कि उसका हाथ दिखेगा ही नहीं
00:40बताओ क्यों नहीं दिखेगा
00:41योगी बाहर नहीं है अंदर है
00:47दिन रात उस गर्मी और उमस और पसीने
00:50बरी जगह पर क्याम करता है तो बस खुजलाता है तो मुझसे कहने जाओगे कि अपना हाथ दिखाईए
00:54तो उसको पहले खीद के बाहर निकाला पड़ेगा पर तुम्हारा कहना ये है कि हम तो खाने नहीं खाते
01:01खाने वाले का हाथ देखकर खाते हैं, तो जाओ हाथ देखो, देखो ना हाथ देखो, भैया थोड़ा सा और दे
01:09देना वो, जैल जीरा, भैया आपकी गलव्स थोड़े बाहर आ रहे हैं, अच्छे से पहन लो, दीदी चिंता मत कर,
01:19हाथ उसका 100% साफ है, जो कुछ भी हाथ में
01:22था उजलजीरे में जा चुका है, नहीं भैया, आप अपना गलव्स थोड़ा और चढ़ा लो, किसको बुद्धू बना रहे हो,
01:32तुम बस पिटू हो, किसी के हाथ की बात नहीं है, और ये मैं इसलिए दावे के साथ कह सकते
01:40हैं, मैं भी बिल्कुल तुमारे जैसा हूँ, ज
01:52खाने का एक ही कारण होता है, मानदारी, खुद को ना बोलना सीखो, चारों तरफ से लहरों की तरह दबाव
02:02आ रहा होगा, हमें बस इतना करना है कि बहना नहीं है, हम शान्त खड़ें, इतनी चाहिए
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