00:03सनातन परंपरा में हर दिन और हर तिथी का अपना एक महत्व होता है पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष में
00:10जिस दिन चंद्रमा का दर्शन होता है वो तिथी अमवस्य कहलाती है
00:14हिंदु मानिता के अनुसार ये तिथी पित्रों की पूजा के साथ इसनान दानादी का बहुत जादा महत्व माना जाता है
00:22हिंदु मानिता के अनुसार इस अमवस्य का महत्व तब और भी जादा बढ़ जाता है जब ये सोमवार के दिन
00:28पढ़ती है और सोमवती अमवस्य कहला
00:42और क्या है पूजा का शुम्हुरत
00:45सुम्वतिय मवस्य की पूजा करने के लिए सुभा जल्दी उठकर पवित्र नदी या घर पर ही गंगा जल मिला कर
00:51स्टान करें
00:51इसके बाद उपवास और पूजा का संकल पले
00:54घर के मंदिर या किसी शिवाले में शिवलिंग का गंगा जल, दूद, दही और शहत्य अभिशेक करें
01:01बेल पत्र, धतूरा और सफेद फूल जट
01:0325 दिन पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है जिसमें पीपल के पेड़ की जड़ में जल, दूद और
01:10काले तिल अरपित की जाते हैं
01:11इसके बाद कच्चे सूत को पेड़ के चारो और लपेट कर 108 बर परिक्रमा की जाती है
01:17फिर पीपल के पेड के नीचे देशी गी का दीपक जलाते हैं ध्यान रखें कि इस दिन रूई की जगा
01:24कच्चे सूत या कलावा की बनी बत्ती को ही इस्तमाल करें
01:28हाथ में चावल और फूल लेकर सोमवतिय मवस्य की खथा सुने या पढ़े इसके बाद इसे पेड के पास अर्पित
01:34कर दें
01:35दोपहर में पित्रों की शान्ती के लिए काले दिल और जल से तरपन करें आप कौवे के लिए खीर पूरी
01:41भी बना सकते हैं
01:42पूजा संपन होने के बाद आपने श्रमता अनुसार भ्रामण या जरुतमंदों को दान कर सकते हैं
01:48वही सोमवतिय मवस्य पर पूजा का शुब मुहरत सुभा ग्यारा बचकर चोवालिस मिनट से लेकर दोपहर बारा बचकर पचास मिनट
01:55तक है
01:55ये अभी जीत मुहरत है इस समय पूजा करना काफी शुब होता है
01:59इस के लवा ब्रहम मुहरत में आप सुब़ चार बचकर चार मिनट से लेकर चार बचकर चवालिस मिनट तक भी
02:05पूजा कर सकते हैं
02:06फिलाल हमारे इस वीडियो में इतना है वीडियो को लाइक शेर एंड चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूले
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