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The Madhya Pradesh Rajya Sabha election has turned into a major political and legal controversy. Congress candidate Meenakshi Natarajan suffered a significant setback after the Supreme Court dismissed her petition and declined to intervene in the ongoing election process. The dispute began when the BJP objected to her nomination, alleging that she had failed to disclose a pending private complaint in Hyderabad in her election affidavit. Acting on the objection, the Returning Officer rejected her nomination.

The Congress challenged the decision in the Supreme Court, arguing that the rejection was unjustified. However, the Court cited Article 329 of the Constitution and ruled that judicial intervention during an active election process is not permissible. Following the verdict, all three BJP candidates were elected unopposed to the Rajya Sabha from Madhya Pradesh.


यह मामला मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव को लेकर बड़ा राजनीतिक और कानूनी विवाद बन गया है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा, जब अदालत ने उनकी याचिका खारिज करते हुए चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। दरअसल, भाजपा की आपत्ति के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने उनके नामांकन को इस आधार पर रद्द कर दिया कि उन्होंने अपने हलफनामे में हैदराबाद की एक लंबित निजी शिकायत का उल्लेख नहीं किया था। कांग्रेस ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 329 का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान न्यायिक दखल उचित नहीं है। इस फैसले के बाद भाजपा के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुने गए। कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है, जबकि भाजपा इसे नियमों के अनुरूप कार्रवाई बता रही है। इस फैसले ने चुनावी प्रक्रिया, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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00:00जबकि स्टेट आफ मध्य प्रदेश का वकील वहाँ पे खड़े होते हैं ते तो स्टेट आफ मध्य प्रदेश का मामला
00:05ही नहीं है ना
00:13मैं सिर्फ इतना कहूंगी कि हमका आजें भी लड़ाई लड़ते रहें
00:23राश्पत्री मोहदया देश की राश्पत्री है ना कि किसी पार्टी की है इस प्रकार से उन्होंने मेल भिजवाया नहीं मिल
00:32लेगा इससे इस पास थे क्यों प्रदेश का माम कर रही है
00:36मध्य प्रदेश के राश्पत्री सभा चुनाव को लेकर दिल्ली से आ रही इस वक्की सबसे बड़ी खबर
00:41कॉंग्रेस उमीद्वार मिनाक्षी निटराजन को देश की सबसे बड़ी अदालत यानकी सुप्रीम कोट से लगा है बहुत बड़ा जटका
00:47जी हाँ सुप्रीम कोटने मिनाक्षी निटराजन की याचिका को पूरी तरह से खारिच कर दिया है
00:52बड़ी खबर यह है कि सुप्रीम कोटने चुनाव प्रक्रिया के बीच में दखल देने से साफ इंकार कर दिया है
00:58कोटने कहा है कि अगर इस स्टेज पर याचिका को सुना गया तो यह संविधान के अनुचेद 339 का उलंगन
01:05होगा और देश में एक गलत परंपरा शुरू हो जाएगी
01:08इस फैसले का सीधा और सबसे बड़ा सर यह हुआ है कि मध्य प्रदेश की तीनों राज्य सभा सीटों पर
01:13भारतिय जन्ता पार्टी के तीनों मीदवार आनपोस चुनाव जीत गए
01:18कॉंग्रेस मैदान से पूरी तरह बाहर हो चुकी है अब समझे कि आखिर कुछ ही घंटों के भीतर दिल्ली से
01:25लेकर भोपाल तक ही सियासी बूचाल आया कैसे
01:288 जून को कॉंग्रेस की तरफ से मिनाक्षी नित राजन ने राज्य सभा के लिए परचाब है
01:33कॉंग्रेस के पास 61 विधायकों का संख्याबल था यानि उनकी जीत पक्की थी
01:38नौजून को स्क्रूटनी के दौरान भाजपा ने एक बड़ा दाब खेला
01:41भाजपा ने आरूप लगाया कि मिनाक्षी नित राजन ने अपने हलफ नामी यनिकी फॉर्म नूबर 26 में हैधराबाद के एक
01:47अदालत में लंबित प्राइविट कंप्रेंट की जानकारी छुपाई
01:51नतीजा चुनावी अधिकारी ने भाजपा की अपत्ती को सही माना और विनाक्षी का नामंकन रध कर दिया थी
01:58नामंकन रध होते ही कॉंग्रेस देश की सबसे बड़ी अदालत पहुंची आज पोट में कॉंग्रेस के दिगज वकील अभिशेक मनू
02:05सिंग्वी और भाजपा के वकील मुखूल रोहतिगी के बीच जोरदार कानूनी दंगल देखने को मिला
02:10अभिशेक मनू सिंग्वी का तर्प था कि सिंग्वी ने पोट में दलील दी कि जन प्रतिनित्व अधिनियम की धारा थड़ीफी
02:17एके तहत के वल उन्हीं मामलों को बताना ज़रूरी है जिनमें कोट द्वारा आरोप तै हो चुके
02:23मिनाक्षिनेट राजन के मामले में सिर्फ एक नोटेस आया था कोई आरोप तै नहीं हुआ था
02:27सिंग्वी ने पूछा जब आरोप ही तै नहीं हुए तो नामंकन कैसे रग हुआ
02:32जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा का तीखा सवाल था कि हमें सुप्रीम कोट का कोई ऐसा पुराना फैसला या मिसाल दिखाईए
02:38जहां चुनाव के बीच में रिटर्निंग आफिसर के आदेश को पलट कर कोट ने नामंकन स्विकार किया
02:44सिंग्वी के पास इसका कोई सीधा जवाब नहीं था वाजपा के वकील ने सम्विधान के अनुछे 329 का बरह मास्तर
02:50निकाला
02:51उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद कोट रिट छेतर दिकार के तहत दखल नहीं दे सकता
02:57नियम के मताबिक चुनाव खत्म होने के बाद के वल हाई कोट में ही इलेक्शन पेटेशन के जरिये चुनवती दी
03:03जा सकती है
03:05सुप्रेम कोट के इस फैसले के बाद मिद्य प्रुदेश कॉंग्रिस में भारी आक्रोश है
03:09प्रदेश अध्यक्ष जीतु पटबारी और उमंग सिंगहार का कहना है कि ये लोग टंतर की हत्या है
03:14और भाजपान ने डरकर सीट की चोरी की
03:16कॉंग्रिस की बिधायक राश्रपती से मिलने दिल्ली भी पहुँच चुके है
03:20वही खुद मिनाक्षिन इटराजन का कहना है कि जो सहिदराबाद मामले को लेकर उनका परचा खारिस किया गया
03:25वो 2022 का एक आंतरिक पार्टी विवाद है जबकि वो खुद 2025 में वहां की प्रभारी बनी है
03:31उनका इस केस से कोई सीधा लेना देना नहीं था और उन्होंने कुछ भी नहीं चुपाया है
03:35सुप्रीम कोर्ट ने डिस्मिस किया है मैम आपका पेटिशन क्या कहिएगा
03:40मैं सिर्फ इतना कहूंगी कि आप आगे भी लड़ाई लड़ते रहें
04:06मैं तो यह मैं तो पहले दिन से कह रही हूं कि चुनाव आयोग कि साटगाट है
04:13और आज यह एक तरह से और भी प्रूव हुआ जबकि स्टेट आउफ मध्यप्रदेश का वकील वहाँ पे खड़े होते
04:19हैं
04:19तो स्टेट आउफ मध्यप्रदेश का मामला ही नहीं है ना
04:22राज्यों के खिलाफ हम लड़ाई नहीं लड़ रहे थे हम तो चुनाव आयोग की बात कर रहे थे
04:29हम अपने रिटर्मिंग आफिसर्स के कॉम्प्रमाइज होने की बात कर रहे थे और वो जन्ता के सामने एक्स्पोज हुए है
04:35लेकिन अब तीर कमान से छूट चुका है सुप्रीम कोर्ट के इंकार के बाद भाजपा के तीनों उमीदबार अधिकारिक गूप
04:41से निर्विरोध राजसभासांसत चुन लिए गए है
04:44इस खबर ने पूरे देश की सियासत को गर्मा दिया है
04:47कानून सुप्रीम कोर्ट का फैसला आचुका है लेकिन राजुनीतिक और लोक्तांत्रिक सवाल अभी भी खड़े है
04:53क्या मेहज एक अदालती नोटिस या किसी की मिज़ी शिकायत के अधार पर किसी उमीदबार का पर चक हादिस कर
04:59देना सही है
04:59अगर ये परंफरा बन गई तो क्या आने वाले समय में चुनावों के फैसले जुनता के वोटों से नहीं बकि
05:04ऐसे ही तकनीकी दाव पेचों से तैह होंगे
05:07इस पूरे घटना क्रमपर आपकी क्या रहा है क्या कॉंग्रिस वाकर एक बड़ी राजनूतिक शाज़श के अधार शिकार हुई है
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