00:05सियासत के रंग बदलते देर नहीं लगती पर जब वही सियासत कानून के दलदल में फ़स जाए तो तुफान आना
00:12लाजमी
00:13पूरवी भारत का वो शहर जिसे सिटी अफ जॉय कहा जाता है यानी हमारा कलकत्ता आज वहां से एक ऐसी
00:19खबर आई है जिसने पूरे देश के प्रिटिकल कॉरिडोर में एक भूचाल ला दिया है
00:24एक ऐसी नेता जिनोंने बरसों तक बंगाल की किस्मत की डोर अपने हाथ में रखी जो अपने बेबाग बोली और
00:30तीके तेवरों के लिए जाने जाती है
00:32आज भही ममता बैनर जी खुद कानून के घेरे में हैं एक ऐसी स्पीच एक ऐसी एफ आयार और एक
00:38ऐसी धारा जिसने पश्चम मंगाल की राशनीती को पूरी तरह से हिला कर रख गया है
00:43आज कानून की जो तलवार उन पर लटकी है वो कोई आम तलवार नहीं है
00:47क्या है पूरी कहानी कैसे एक चुनावी भाशन उनके लिए गले की फासी बन गया
00:52अगले पाच मिनिट में इस पूरे कहानी की एक एक परत खुलने वाली है
00:56बने रही है हमारे साथ
00:58कहानी शुरू होती है मार्श दोजाच चबीस के उस दोरे से
01:02जब पश्चिम मंगाल की एसेमली एलेक्शन के लिए पूरा स्टेट चुनावी रंग में रंगा हुआ था
01:07कलकत्ता में धर्णा मंच पर त्रिनमूल कॉंग्रेस की चेर परसन मम्ता बैनर जी बैटी थी
01:13चुनाव का महौल था, महौल गरम था और भाशन भाजी अपने चरम पर थी
01:18लेकिन उस दिन यानि 9 मार्श दोजाच चबीस को उस धर्ना मंच से मम्ता बैनर जी ने एक ऐसी बात
01:25कहे दी
01:25जो अब उन पर भारी पड़ रही है
01:27अलिगेशन यानि आरोप है कि उन्होंने उस स्पीच में एक ऐसी कम्यूनल रिमार्क यानि सामप्रदायक टिपनी की जिसने सोशल हामनी
01:35को खत्रे में डाल दिया
01:37उन्होंने रिपोर्टेडली एक पर्टिक्लर कम्यूनिटी का जिकर करते हुए बॉन किया
01:42कि अगर एक कम्यूनिटी एक साथ आ गई तो दूसरे के लिए इसके डायर कॉंसिक्वेंसिस यानि भायानक नतीजे हो सकते
01:49हैं
01:50आप सोचिए चुनाफ का दौर था ऐसी बाते महज एक भाशन लगती हैं लेकिन कानून की नजर में ये आग
01:57लगाने जैसा काम करती हैं
01:59चुनाफ बीद गया पर इस भाशन की गूंच थमी नहीं अब आते हैं इस कहानी के सबसे बड़े ट्विस्ट पर
02:04जब ये भाशन दिया गया तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि ये मामला थाने तक पहुँच जाएगा
02:10लेकिन एक बिजनसमैन तुशार कांति दास ने इस भाशन को सीरिस्ट लिया
02:14उन्हें लगा कि ये बयान देश और राज्य के डिमोक्रिटिक स्ट्रक्चर के खिलाफ है
02:19भाई चारे के खिलाफ है और उन्होंने ठान ली कि वो इस पर आक्शन लेंगे
02:23उन्होंने कलकत्ता के पुलीस स्टेशन में एक फॉर्मल कमप्लेंट दच करई
02:52हैं और ये धाराएं इतनी स्ट्रिक्ट है कि मम्तब आइनरजी की मुश्केले कई गुना बढ़ सकती हैं कानूनी बात को
02:59असान भार्षा में समझते हैं लीगल नोट पहले जो आई पी सी यानि इंडिन पीनल कोड हुआ करता था अब
03:06नए कानून के मताबिक वो बी एनेस और �
03:08पिनैस बन चुका है कलकता पुलीस नहीं एक उख्या नए कानून के भारतिया नहाज़ी सनहता और भारतिया नागेरिक सुरक्षा सनहता
03:16के तहई दर्ज की इसमें जो सबसे बड़ी धारा है वह है यह सेक्शन 193 एक सब्सेक्शन एक द्शोच्शन एक
03:24क्या है यह धारा त�
03:38और नॉन बेलिबल ओफेंस है इसका मतलब ये है कि एक ऐसा गंबीर मामला है जिसमें पुलीस के पास ये
03:45अधिकार होता है कि वो बिना किसी वारंट के भी अरेस्ट यानि गिरफतारी कर सकते हैं और कोट से असानी
03:52से बेल यानि जमानत नहीं मिलती है
03:55इसके साथ ही उन पर सेक्शन 351 सब सेक्शन 2 यानि क्रिमिनल इंटिमिडेशन और सेक्शन 352 यानि इंटेशनल इंसल्ट प्रवोक
04:04ब्रीच अफ पीस भी लगाया गया यानि कानूनी तोर पर घेराबंदी पूरी तरह से टाइट हो चुकी लेकिन रुकिये कहानी
04:11यहीं खतम न
04:25बांगलादेश रिलेशन्स यानि भारत और बांगलादेश के रिष्टों पर दिये गए उनके बयां को लेकर थी और वेके महीने में
04:31सिलीगोरी साइबर क्राइम पिलीस टेशन में भी उन पर रिलिजिस सेंट्रिमेंस को हर्ट करने की केस दरज हुए थे एक
04:37तरफ उनके प
04:55है कि ये उनकी नेता को टागेट करने की साजिश है वहीं ऑपेजिशन कह रही थे है कि कानून सब
05:00के लिए बराबर है लेकिन सच क्या है ये तो अब पुलीस इन्वेस्टिकेशन के बाद की साफ होगा तो कहानी
05:06अब उस मोर पर आखड़ी हुई है जहां से रस्ता बेहत मु
05:22क्या चुनावी दोर में दिये गए इस भाशन की कीमत ममता बैनर जी को कानूनी हिरासत में चौकानी पड़ेगी या
05:28फिर ये मामला भी सिरफ एक सियासी दलदल पन कर रह जाएगा सवाल कई है और इनके जवाब आने वाले
05:34दिनों में मिलेंगे इस इन्वेस्टिकेशन की हर
05:37एक अपडेट और हर एक टेक्निकल पॉइंट सबसे पहले आप तक पुछाए जाएगा आपको क्या लगता है क्या राजनेताओ को
05:43चुनाव में ऐसी भाशा का इस्तेमाल करना चाहिए हमें कॉमेंट करके सिरूल बताइए देखते रहें वन इंडिया मैं हूर इताना
05:50मित्�
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