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परिवार के 8 लोगों की कैसे आई एक साथ मौत? देखें वारदात
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00:00नमस्कार में हूं शम्स ताहर खान और आप देख रहे हैं वारदाद। डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था। कहा बस
00:07चन्द दिन है इनके पास। परिवार ने तै किया कि आखरी घड़ी में पूरा परिवार इनके करीब रहेगा। और करीब
00:15रहने के लिए ही इन्होंने क
00:17करीब के एक होटल में कमरे ले लिए बतकिस्मती से ये वही होटल था जिसमें आग लगी है। और एक
00:24ही परिवार के आठ के आठ लोग इस आग में अपनी जान गमा बैठे है। पर मौत का खेल देखिए
00:31पहले आग सिमारा फिर इनकी चिता को भी वही आग दी गई।
00:51मालविये नगर के इस होटल से महस एक किलोमीटर की दूरी पर इसी मैक्स अस्पताल में 75 साल की एक
00:59मौत दरवाजे पर खड़ी दस तक दे चुकी थी।
01:04इस दस तक की खबर डॉक्टर घरवालों को दे चुके थी। घरवाले आखरी घड़ी में साथ रहने की तमन्ना लिये।
01:13अपने घरों से इसी अस्पताल से मुश्किल से पांच मिनट की दूरी पर मौजूद इस होटल में आ ठहरे।
01:21पर मौट का खेल देखें जिस होने वाली मौट का गवाह बने पूरा परिवार यहां आकर इस होटल में ठहरा
01:30था वो अभी मैक्स अस्पताल के आईसियू में मौट की आखरी दस तक का इंतजार कर रहे हैं यानि जिन्दा
01:38हैं जबकि उन्हें देखने आए पूरे परिवार
01:41बिना दस्तक दिये मौट अपने साथ लेगे
02:00ये गुरुगराम में मौझूद 75 साल के राधेश्याम अगरवाल का घर है
02:05पांच साल पहले तक राधेश्याम परिवार के साथ कोलकता में रहते थे
02:10पांच साल पहले वो यहां आकर बसे थे
02:15राधेश्याम का एक लोता बेटा 47 साल का विवेग अगरवाल एक सिये था
02:21और मल्टी नेशनल कंपनी में सियेफो यानी चीफ फाइनेंस अफसर के तोर पर काम करते थे
02:2830 मई को विवेग अगरवाल अपने पिता राधेश्याम अगरवाल को साकेत के इसी मैक्स अस्पता लेकर आये थे
02:37उनके हालत खराब थी फेपड़े में इन्फेक्शन था राधेश्याम को आईसियू में एडमिट कर लिया गया
02:46दो जून को डॉक्टरों ने विवेग को बताया कि राधेश्याम के बचने की अब कोई उमीद नहीं है
02:52उनके पास अब बस गिंदी के दिन बचे है लेहाजा वो उने घर ले जा सकते हैं ताकि आखरी घड़ी
03:00में वो परिवार के साथ रहें
03:02लेकिन विवेक ने घर ले जाने की बजाए आखरी घड़ी तक बेहतर इलाज के लिए उन्हें अस्पताल में ही रखने
03:09का फैसला किया
03:10अब चूँकि ये पता नहीं था कि मौत कितने घंटे या कितने दिन बाद दस्तक देगी
03:16लेहाजा विवेक अपनी माह 70 साल की प्रेम लता पत्मी 42 साल की तरजनी और छोटी बेटी 16 साल की
03:26पड़ के साथ 2 जून को ही मालविय नगर के इस होटल में आकर ठहर गए
03:30ये होटल विवेक में इस लिए चुना था क्योंकि यहां से मैक्स का रास्ता पैदल भी सिर्फ पांच मिनट का
03:37था
03:39विवेक अगरवाले उनकी डहती हैं कि फादर एडमीड आई सी होंगे तो गुलगाओं रहते हैं वो तो उन्होंने सामने ले
03:45लिया कि आना याना पढ़ता है तो से बहता है कि यहां रहे लेंगे
03:48पर कली वो आप कुछ लोग बाहर से आए थे और आपको बोले चलो यहां रुप जाते हैं शुवे दे
03:54मिल के कि अपने चले जाएंगे
04:09तोड़ी बताते हैं कि रात में आपर यह सब कांड़ा हो या आगा शुवे दे हो जाए आपके
04:16उसे भी उसके दादा की हालत के बारे में बताया अब धीरे धीरे रिष्टेदार दिल्ली पहुचना शुरू हो चुके थे
04:23दो जून की रात तक प्रेमलता की बावन साल की बहन कमला चपन साल का भाई अशोक और कमला के
04:30पती जावेरी भी अजमेर के करीब किशनगर से दिल
04:46सुबह सुबह साथ बजे के खरीब विवेक की बड़ी बेटी एंजल फ्लाइट से बैंगलूरू से दिल्ली आ चुकी थी वो
04:54भी सीधे इसी होटल में आकर अपनी मम्मी पापा के साथ रुख जाती है अब अगरवाल परिवार के कुल आठ
05:01लोग इस होटल में थे
05:03फिर तीन जून की सुबह साड़े आठ से पौने नौ का वो मनहूस वक्त आता है जब इस होटल में
05:09अचानक आग लग जाती है
05:13जब पहली बार आक का धुआ शायद कमरे में पहुँचा था तब विवेक को पता चल चुगा था
05:19विवेक ने फौरण दिल्ली में रहने वाले अपने कजन को फोन किया उसने पताया कि जिस होटल में वो रुखा
05:25है वहां हाग लग गई है
05:27उसकजन ने फौरण उसी होटल के करीब कोटला मुबारकपूर में रहने वाले अपने दूसरे कजन को फोन किया
05:34फोन पर खबर सुनते हैं कजन अपनी पत्मी के साथ फौरण होटल की तरब भागा
05:39विवेक ने जब फोन किया था तब सुभा के ठीक पौने नौ बजे थे
05:44विवेक के रिष्टेदारों के मताबिक उन्हें होटल तक पहुँचने में करीब 45 मिनट लगे
05:49उनका कहना था कि किसी तरह जब वो होटल के खरीग पहुचे तब ठीक उसी वक्त फाइर ब्रिकट की गारियां
05:56वहां पहुची थी
05:58चुकि होटल जिस जगह पर है वो रास्ता चारों तरफ से संक्रा है
06:02फायर ब्रिगेट की गाड़िया महां आसानी से पहुँची नहीं सकती थी
06:09तब तक आस पडोस के लोगों की मदद से होटल के बाहर गद्धा डाल कर कुछ लोगों को ऊपर से
06:15कूदने को कहा गया
06:16कई लोगों ने कूद कर अपनी जान बचाई
06:19लेकिन अफसोस उन में से एक भी चेहरा अगरवाल परिवार के किसी सदस्य का नहीं था
06:25जब होटल की आग बुचा ली गई तब बधावास रिष्टेदार अपनों को ढूंडने होटल के अंदर पहुचे
06:32अंदर कई लाशें तो ऐसी थी जिसकी पहचान भी मुम्किन नहीं थी
06:37एक रिष्टेदार के मताबिक विवेक की पत्नी तरजनी की लाश
06:41वो सरिफ इसलिए पहचान पाए क्योंकि उसने जो सेवर पहन रखे थे
06:46वो उन सब का चाना पहचाना था
06:48बाद में सभी घायलों और लाशों को पास के तीन अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचाया गया
06:54कुछ मैक्स में, कुछ एम्स रॉमा सेंटर में और कुछ सब्दर जंग अस्पताल में
06:59रात तक रादेश याम अगरवाल के जो रिष्टेदार मैक्स में उन्हें देखने आ रहे थे
07:05अब सुभा वही रिष्टेदार मैक्स एम्स और सब्दर जंग में खायलों और मुर्दों के बीच उनाठ अपनों को ढूंड रहे
07:14थे
07:15हमारे वहां आठ छे नाइट में रुके हैं दो मौर्टनिंग में वोल्वो से आया दोड़ा को अजबर से वहां से
07:21जैपुर से अजबर से वही तोनों गुजर गए
07:25दो हमारे रिकॉर्ड नहीं होड़े कहा है उनका पता नहीं है एक वेटी और एक कोती देवती मेरी दो हैं
07:31तो बता दिया और कपचा से बताएं गया
07:48उदर मैक्स के आईसियू में और भी अजीब हाल था सुभा से राधे श्याम को देखने ना उनकी पत्नी ना
07:55बेटा ना बहु ना पोतिया कोई नहीं आया
07:58आसू छुपाते कुछ रिष्टेदार जरूर राधे श्याम के तरीब पहुँचे शाम होते होते डॉक्टर पुलिस और सरकार खायलों और लाशों
08:07की गिंती पूरी कर चुके थे
08:10अफसोस एक किस लाशों में अकेले आठ लाशे इसे एक अगरवाल परिवार की थी
08:19राधे श्याम की पत्नी प्रेम लता बेटा विवेक अगरवाल विवेक की पत्नी तरजनी बड़ी बेटी एंजल छोटी बेटी पर विवेक
08:29के मामा कमल गोईल मामी जावेरी और बुआ कमला
08:32जब ये खबर गुरुगराम पहुची तो कोई यकीन करने को तैयार ही नहीं था
08:38हम पिछले जो है पांट साल से पड़ोसी हैं और यह बहुत ही सज्जन परिवार था और है बहुत हांसता
08:50खेलता इसकी बीवी और दो बच्चे यहां पे रह रहे थे बड़े लिमेट आयंसे और बहुत हमारा जो ना सबका
08:57स्वहर्द पुर्ण यहां पे परते का थी सबी प
09:08वाइफ अब बच्चों की पढ़ाई की वज़े से घर पी बच्चों को समाल रही थी और यह तो बहुत ही
09:14दुखत सवाचार मतला हमें तो है की नहीं हो रहा कि इस तरह की अच्छे वक्तित दंधन नहीं थे और
09:21सबसे मिलंसार और कोई ऐसा भगवान ने ऐसा कैसे उनके मैं
09:26क्या कहना चाहूँगा हमें खुद बरतासन ही हुरहा अभी तक यह नहीं है को इस तरह की उनके साथ आफसा
09:31हुआ आ और कोई डख वहार में और कोई नहीं है सब मनें
09:57तो न समय कोई बच्छा है क्या है?
10:01मैं कुछ जिती बड़ा हाथसा मेरे परोज में परोश में पहली तफ़ा हुआ है।
10:09मैं बड़ा लग रहा है कि इन उसका बड़ा लग रहा है, कैसे जिस कोई है?
10:12एक आप विमार है पिताजी है तो बहुत अलग थी तो मैं चाहूंगा कि भगवान अभी भी कहीं अगर कुछ
10:19है तो उसमें उनकी जान बच जाए किस तरहें से
10:23विवेक अगरवाल की पत्नी तरजनी दोहजार तेईस में मिस्स इंडिया का खिताब जीत चुकी थी
10:28तरजनी मॉडलिंग भी क्या करती थी फिलाल वो एक इवेंड मैलेजमेंट कमपनी में काम कर रही थी
10:34वो सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव थी विवेक और तरजनी की छोटी बेटी पढ़ने अभी कुछ वक्त पहले ही
10:42दस्वी में 97 फीसदी नमबर लाए थे
10:44बड़ी बेटी एंजल बैंगलूरू से इंगीनियरिंग की पढ़ाई कर रही थी
10:48चुकि विवेक परिवार का एक लौता बेटा था इसलिए अब इस घर में कोई बचा ही नहीं
10:55उधर मैक्स के आईसियू में 75 साल के राधेशयाम अगरवाल अभी मौत के दर्वाजे पर खड़े
11:02उन्हें ये पता ही नहीं कि उनके आखरी घड़ी में साथ रहने के लिए उनका जो परिवार गुरुगराम से दिल्ली
11:09आया था
11:10वो सब अब इस दुनिया से ही जा चुके हैं
11:13शायर जीते जी राधेशयाम अगरवाल को ये सच कोई बताएगा भी नहीं
11:21गुरुवार को गुरुगराम के शम्शान में अजीब मन्जर था
11:25कतार में अर्थियां थी लाइन से चिताएं
11:31एक भरे पूरे परिवार को जिस आग में मा डाला
11:34अब दोबारा उनकी चिता को आग दी जा रही थी
11:54आग बेशक इस होटल में लगी हो
11:56लेकिन इसके आज से न दिल्ली सरकार खुद को बचा सकती है
11:59ना एम से दी और ना ही फायर ब्रेक लिए
12:03असल में इन सब की कुमकर्णी नीद
12:05और टीमक की तरह चाट चुकी इनकी लालची आदतों नहीं
12:09उन्हें किस लोगों की जान ले रही जो बस सुबह सुबह नीद से जागे थी
12:14आग कैसे लगी क्यों लगी यह होटल कब बना कैसे बना
12:19होटल बनाते वक्त किनकी नियमों का पालन हुआ नहीं हुआ
12:23होटल का मालिक कौन इन सारे सवालों पर सब चीखेंगे
12:28गुनाइगार पकड़ भी लिये जाएंगे भोटल सील भी कर दिया जाएगा
12:32बहुत हुआ तो बुल्डोजर से गिरा भी दिया जाएगे
12:35पर क्या इससे सब कुछ ठीक हो जाएगी
12:38फिर कोई आग नहीं लगेगी फिर कोई जान नहीं जाएगी
12:45अगर सच में ऐसा होता तो संतानवे के उफार में जो आग लगी थी
12:49और उस आग की तपिश में दिल्ली समेट पूरा देश जब तब गया था
12:54उसके बाद तो दिल्ली में फिर ऐसा हाथसा हो नहीं नहीं चाहिए था
12:58पर जब तक लालच का दीमत लालची अफसरों और करमचारियों को चाटता रहेगा
13:04या पुझने वाली ने
13:08चार मंजिला ये बिल्डिंग तो इस वक्त इसलिए सब की नजरों में खटक रहे
13:12जोके इसने एक साथ एक्किस लोगों को माड़ा
13:17पस इसलिए अब इस बिल्डिंग के कुण्डिली निकाली जा रही है
13:21सरकारी दस्तावेज निकाल कर बताया जा रहा है
13:24कि हमने तो इसे सिर्फ छे कमरे बनाने की इजासत दी थी
13:28पर इसने तो पच्चिस कमरे बना ले
13:31हमने तो दो मंजिल बनाने के लिए कहा था
13:33इसने तो चार मंजिल बना डा ले
13:37उदर फायर ब्रेगट कह रही है
13:38कि इन्होंने तो हमसे एनोसी ही नहीं लिया
13:41यानि सारी गल्पी बसी से एक बिल्डिंग और बिल्डिंग के मालिक की है
13:46सरकारी डिबार्टमिंट और उनके अफसर सब मासुम भी
13:50ऐसा लगता है जैसी ये बिल्डिंग ये होटल चंबल के बीहड में बनी जहाँ कभी किसी सरकारी बावू ने जाकर
13:57इसे देखा ही हूँ
14:00इसलिए पता ही नहीं चला कि कब छे कमरा 25 कमरे में बदले हैं
14:05दो मन्जिल जादू से चार मन्जिल होगे हैं
14:07सारी घल्प सब इसी बिल्डिंग वाले की हैं पर असल सच कुछ हो रहे हैं
14:16दिल्ली में बिल्डिंग बनाने के कुछ नियम कायदे हैं जिने अलग-अलग एजेंसियां देखती हैं
14:22मसलब MCD, NDMS, FireBringand और दिल्ली सरकार
14:26अब जरा इन तवान एजेंसियों के कारणा में देखें
14:29दिल्ली में लगबग 3800 से 4000 छोटे वड़े होटेल, लॉज, कलब और नाइट कलब हैं
14:35पर आप जानकर हैरान रह जाएगे
14:38के इन में से सिर्फ 52 होटेल और 38 कलब या नाइट कलब के पास है
14:42फायर डिपार्टमेंट का नोसी है
14:45यानि कल दो से तीन तीसदी होटेल या लॉज, फायर सेफटी का सर्टेफिकेट पिला होगा है
14:51बाकी के 97 और 98 तीसदी होटेल या लॉज, लालत और रिश्वत के सर्टेफिकेट पर चल रहे है
14:57इमारतों में लालत का दीमक कैसे खुसता है, चलिए इसका पूरा खेल भी आपको समझाता है
15:03नियम कहता है कि दिल्ली की हर वो इमारत जिसकी उचाई 12 मीटर से ज्यादा हो, उसे फायर डिपार्टमेंट से
15:11एनोसी लेनी पड़ेगा
15:12यानि अगर उस इमारत की उचाई 12 मीटर से कम है, तो एनोसी की जरूरत नहीं है, और बस इसी
15:18उचाई और नीचाई से खेल शुरू होता है
15:24दिल्ली में जितने भी होटेल या गेस्ट हाउस या लॉज है, उन्हें पता है कि फायर सेप्टी नॉम को पूरा
15:29नहीं कर सकते
15:42वो एमसेडी और बाकी एजनसियों के सामने रखते हैं, उस नक्षे में बाकाईदा एंट्री, एक्जिट, सेडिया, तरवाजे, खड़की, सभी अच्छे
15:51अच्छे दिखाय जाते हैं, पर सिर्क कागजों में, क्योंकि बाकी का काम नोटों वाले कागज से पूरा हो जाता
15:57हैं, एक बार नक्षा पास हुआ, फिर क्या, वही दसी ग्यारा मीटर वाली बिल्डिंग, बारा मीटर कब पार कर जाती
16:05है, कोई देखने ही नहीं आता, सबूत आपके सामने है, आग और धुआओ गल्प, ये बिल्डिंग, छे कमरे बनने थे,
16:13पक्चिस कमरे बनने, चार मं
16:26दोजह के साथ हिमान शुमिश्रा तिल आज तर, एक माँ अपने पांस साल के बच्चे को पीट पर बांद कर,
16:38सौ फीट उचे एक टावर पर चड़ जाती है, उसका इरादा शायद कूदने का था, मगर कूदने से पहले, शायद
16:45वो अपनी बात, पुलिस और सरकार तक पह�
16:47चाना चाहती थी, महिला और बच्चे को टावर पर देख, नीचे भीड जमा हो जाती है, फिर पुलिस मौके पर
16:54पहुचती है, और काफी मशक्कत के बाद, आखिरकार फोन पर महिला से पुलिस बात करती है, सिर्फ एक पतली सी
17:10सेफटी बिल्ट के सहारे, सैक्णों फीट की
17:13उँचाई पर लटकते लोगों को आपने कई बार देखा होगा, लेकिन एक सामान्य सी घरेलू महिला को ऐसे ही किसी
17:20टावर की उँचाई पर वो भी बगएर किसी सेफटी बिल्ट के, अपने पांच साल के छोटे से बच्चे के साथ,
17:26यकिनन आपने इस से पहले नहीं केखा
17:31अकसार उँचाई पर ऐसे खतरनाक काम करने वाले शक्स के पीछे मजबूरी की कोई ना कोई कहानी होती है, बस
17:38ये मजबूरी कहीं रोजी रोटी के नाम से ढखी होती है, तो कहीं मुफलिसी और जिम्मेदारियों के मुलम्मे से छुपी,
17:44लेकिन दो-दो जिन्देगियों क
17:46कि परवा किये बगैर कोई मा अपने छोटे से बच्चे के साथ किसी टावर की उँचाई पर आखिर क्यों चड़
17:52गई? इस महिला के साथ आखिर वो कौन सी मजबूरी है, जिसके चलते उसने अपने साथ-साथ खुद अपने छोटे
17:59से बच्चे की जिन्दगी भी ताउं प
18:14मुहाफिजों तक अपनी आवाज पहुचाने के लिए कुछ ऐसा करती है कि उसे देखने वालों का कलेजा ही मू को
18:21आ जाता है। हर फल डराने वाली इन तस्वीरों में दिखती इस महिला का दर आखिर क्या है? और उसके
18:27इस खतरनाक कदम का आखिरी अंजाम क्या होता है? य
18:43जब पहली बार लोगों की नजर पड़ी तो हर कोई बेचायन हो गया। वजह ये थी कि तकरीबन सौव फीट
18:49की उचाई पर साड़ी पहने मौजूद इस महिला की महज एक गलती उसे सीधे मौत के मुह में पहुचा सकती
18:55थी। लेकिन ये तो इस कहानी का सिर्ख एक पहलू
19:11और अगले ही पल पुलिस से लेकर जिला प्रशासन और यहां तक की SDRF के लोग भी मौके पर पहुच
19:18चुके थी। मगर सबसे बड़ी चुनोती थी महिला तक अपनी बात पहुचाने की और उसे शांत्चित तरीके से टावर की
19:25उचाईयों से नीचे उतारने की। क्यूंकि
19:28पुलिस मिशन में हुई एक मामूली सी चूक भी महिला के साथ साथ उसके छोटे बच्चे की जिनदेगी चीन सकती
19:34थी। अब पुलिस वालों ने महिला को नीचे उतारने की कोशिश शुरू की।
19:39अरे बहन जी नीचे आईए।
19:52बहन जी आपको जो भी दिक्कत हैं सभी लोग आपकी परिषानी सुनने के लिए आये हुए हैं। आपकी शुरुक्षा बहुत
19:59जरूरी है।
20:00किरिपए आप नीचे आए अगर आप तक हमारी बात पहुंच रही हैं तो हमतिला के अंको बता हैं कि आप
20:04तक हमारी आवाज पहुंच रही है।
20:27लेकिन पुलिस की शुरुवाती कोशिश का कोई फाइदा नहीं हुआ
20:30और महिला अपनी जगह से टस से मस नहीं
20:33ऐसे में कुछ देर के इंतजार के बाद पुलिस वालों ने फिर से कोशिश की
20:38अब गुंडा के सियो सिटी आनंद राय हाथ में माइक लेकर मोर्चा संभालते हैं
20:43और सबसे पहले महिला से यही पूछते हैं कि क्या वो नीचे आकर पुलिस को अपनी बात बताना चाहती है
20:48या फिर वो चाहती है कि पुलिस वाले उसकी बात सुनने के लिए खुद ही उपर चले आए
20:55आप मताईए कहिए तो हम आए आप तक आपकी बात सुनने के लिए बताईए हम आए
21:03अगर आप कहेंगी तो हमारे में से कोई आएगा वहाँ पर आपकी बात सुनने के लिए
21:20लेकिन जमीन से कम से कम सौव फीट की उचाई पर मौझूद इस महिला का कोई भी जवाब नीचे नहीं
21:26पहुंचता है
21:26और तब सियो सिटी महिला से अपनी बात रखने का दूसरा सुझाओ देती
21:32सुझाओ ये कि वो इशारे से अपना फोन नंबर पुलिस को बताए ताकि फोन पर पुलिस उससे बात कर सके
21:38और अगर वो चाहे तो सीधे पुलिस कंट्रोल रूम में फोन कर उनसे बात कर दे
21:44यानि 112 नंबर पर कॉल करे
21:46कुल है तो एक बार आप नंबर बताने कोसिस करिये उगली से अब लोग आपकी बात सुनेंगे फिर आपको फोन
21:52करते हैं उसी पर आपकी सारी समस्या सुनी जाएगी और आपकी पूरी मदब की जाएगी
21:58कोई अप्लिकेशन ये कागज ये कोई किसी चीश में अगर आपका नमबर हो तो आप नीचे उसको गिरा दे हम
22:03उसके बात करेंगे आपसे
22:10पुलिस वालों का कोई नमबर आपको पता है अगर आपको नहीं पता तो 112 पे फोन करिये
22:15112 112
22:19अगर आपके पास फोन है तो 112 पे फोन करिये हम आपसे बात करेंगे
22:25आखिरकार लंबी मशक्कत के बाद महिला की पुलिस से बात होती है और तब सामने आती है एक ऐसी कहानी
22:31जो शासन प्रशासन की समवेदन हींता की पोल खोलती है
22:35थाना तरबगंज के तिवारी पुर्वा की रहने वाली इस महिला का अपना अलग ही दर्ध है
22:40महिला चार बच्चों की माह है लेकिन पती से अनबन के चलते वो अलग रहती है
22:45लेकिन इससे भी आगे की कहानी ये है कि इस महिला को जहांसे में लेकर उसी के गाउं का एक
22:50शादी शुदा शक्स पहले उसका लंबे समय तक शोशन करता है और फिर उसे धोखा देकर भाग निकलता है
22:57हद तो ये है कि महिला अपने इस दगाबाज आशिक के खिलाफ थाने में रिपोर्ट लिखवाने के साथ साथ तमाम
23:04बड़े अफसरों के चक्कर लगाती है
23:05मगर आशिक गिरफतार नहीं होता है और तब हालात से हार कर वो कुछ ऐसा करती है जो उसे कतई
23:12नहीं करना चाहिए
23:13वो अपने पांच साल के छोटे से बेटे को साड़ी के साहरे अपनी पीट से बांध कर सीधे टावर की
23:19उचाई पर चड़ जाती है ताकि वो पुलिस का घ्यान अपनी और खीच सकी
23:43हम लोगों ने महिला से संपर्ख सादने की कोशिज की लाउड हेलर के माधियम से हमने अपना मोबाइल नंबर महिला
23:48तब पहुचाया उसके थू हमारी महिला से बात हुई महिला से वारता के करम में उसने जो भी अपनी बाते
23:54रखी उस करम में हमने उसकी जो दिमांड सी उस
24:28महिला कहती है कि या तो उसके आशिक को गिरफतार कर पुलिस उसे जेल की सलाखों के पीछे पहुचा दे
24:33या फिर उसे अपने साथ रखने के लिए आशिक को राजी करा
24:37फोन पर सी-ओ उसे इंसाफ दिलाने का भरोसा देते हैं और तब महिला नीचे आने की हामी भरती है
24:43इस बीच पुलिस दिल्ली में मौजूद महिला के प्रेमी से संपर्क साथने में भी कामयाब हो जाती है
24:49और प्रेमी फोन पर ही महीला को अपने साथ रखने पर राजी हो जाता है
24:53जिसके बाद मसला हल होने की उम्मीद बंद जाती है
24:56लेकिन महीला का अकेले नीचे उतरनाख खतरनाख है
25:00लहाजा पुलिस के बड़े अफसर नीचे से दो पुलिस कर्मियों
25:03और SDRF के कुछ लोगों को पानी की बोतल और बिस्किट के साथ महीला के पास उपर भेजते हैं
25:10पुलिस कर्मी सादे लिबास में है
25:12इस चिलचिलाती गर्मी में लगभग 5 घंटे से भी ज्यादा समय से टावर पर डटी महीला और उसके बच्चे को
25:19अब पानी पिला जाता है
25:20उपर भी उसे समझाने बुजाने का सिलसिलाद चलता रहता है
25:24और तब महीला धीरे धीरे बचाव कर्मियों के साथ नीचे उतराती है
25:29चुकि जो राम अकबाल है यहां मोके पे नहीं है वो दिल्ली में किसी फैक्टरी में मजदूरी करता था
25:34इस वज़े सभी उससे बाच्चित नहीं हो पा रही थी
25:37जैसे ही राम इकबाल से बात हुई है महीला से हमने उसकी बात कराई है
25:41दोनों आपस में उन्होंने वारता करी है उस वारता के करम में दोनों एक दूसरे से संतूष्ट हुए है
25:46उसी के करम में SDRF की मौजूदगी में हमने अयुद्या से SDRF फोर्स बला ली थी
25:51तमाम फोर्स और सबके सवयोग से महिला और बचे को सकुसल उतार लिया गया है
25:55और इस प्रकरण में अगरिम विधिक कारवाई जाच के उपरां की जाए
25:59अब सवाल यह है कि क्या इस वाके को टाला जा सकता था
26:03और क्या इसके पीछे पुलिस की लापरवाही एक बड़ी वज़ा रही
26:06तो हमने पुलिस से ये सवाल भी पूछा
26:09सुनिए जवाब क्या मिला
26:21बहर हाद पुलिस वालों की सूजबूज से इस मामले की हैपी एंडिंग तो हो गए
26:26लेकिन सच्चाई यही है कि जब तक महीला के कदम धर्थी पर नहीं पड़े थे
26:30मौके पर मौझूद तमाम लोगों की सांसे अटकी हुई थी
26:34अंचल शिवास्तो गुंडा आज तक
26:40तो वारदात में फिला लित रहीं मगर देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए आप देखते रही आज तक
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