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  • 7 minutes ago
दिल्ली के अग्न‍िकांड में खत्म हुई गुरुग्राम की पूरी अग्रवाल फैम‍िली, देखें विशेष

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00:00नमस्कार विशेश में आपका स्वागत है मैं हूँ मारिया शकील
00:03विशेश में आज बात एक ऐसी खौफनाब कहानी की जो दर्थ की सारी सीमाओं से परे है
00:10दिल्ली के अगनी कांड ने एक पूरे परिवार को निगल लिया
00:14पिता अस्पताल में अपना इलाज करा रहे थे और बेटा बहु और नाती होटल में लगी आग में सिंदा जल
00:23गए
00:36एक खुशाल परिवार जिसे सिस्टम ने चला दिया
00:43हसते खेलते पती पत्मी, प्यारी सी बेटिया, मां और तो मासूम पच्चे सब कुछ एक रात पे खत्म हो गया
00:55दिल्ली के मैक्स अस्पताल में अड्मिटिक पिता ने कभी सोचा नहीं था कि जो परिवार उनके स्वास्त का हाल जानने
01:01के लिए पास के एक होटेल में रुखा हुआ है, वो परिवार उनसे कभी नहीं मिल सकेगा
01:07गुरुग्राम के चार्टर एकांटेंट विवेक अग्रवाल के पिता गंभीर फिपणों के संक्रमन से जूच रहे हैं और साकेट के मैक्स
01:14अस्पताल में भरती है, विवेक अग्रवाल अपनी पत्मी, दो बेटियों और बुजर्ग मा के साथ दिल्ली आये थे
01:22इसी दोरान विवेक अग्रवाल के मौसा मौसी और एक अन्य परिजन भी विमार पिता का हालचाल देने दिल्ली पहुचे, उन्होंने
01:29भी उसी होटेल में ठेहरने का फैसला किया
01:33किसी ने नहीं सोचा था कि ये फैसला उनकी जिन्दगी का आखरी पढ़ाव बन जाएगा
01:38रात सामान ने थी, परिवार अगले दिन अस्पताल जाने की तयारी में था
01:42लेकिन अचानक होटेल में आग भड़क उठी, कुछी मिन्टों में पूरा परिवार, धुएं और लप्तों से भर गया
01:49जो इमारत यात्रियों के लिए ठेहरने की जगत थी, वो देखते ही देखते चिता बन गई
01:5670 साल की प्रेमलता अकरवाल, 45 साल के विवेक अकरवाल, 42 साल की तारणी, 20 साल की जिविशा
02:0417 की वारिया, 68 साल के अशोक पंसारी, 70 साल के जावरिलाल और 68 साल की कमला, सब की मौत
02:11हो गए
02:28परिवार को मीत थी कि विमारी से लड़ रही पिता को अपनों का साथ मिलेगा
02:32उनका मनोबल बढ़ेगा और शायद स्वास्त में सुधार भी होगा
02:36लेकिन किस्मत ने कुछ और ही लिख रंखा था
02:40जिस परिवार ने अस्पताल के कमरे में अपने बुजर्ग पिता का हाथ थामने की यूजना बनाई थी
02:45वो कुछी घंटों बाद आग की लप्तों और धुएं के बीच जिन्दगी की सबसे भयावा लड़ाई हार गया
02:57परिवार में उनकी वाइफ है जो कि किसी एंजियो से जुड़ी है और जो बच्चे हैं
03:02क्योंकि वो पड़ रहे थे अब ऐसे में पहले वाइफ बिजनस करती थी और बच्चों की पढ़ाई में मदद कर
03:08रहे थी परिवार में मा भी है जो काफी बुजर्भ हैं और पिता हैं जो कि मैक्स हॉस्पिटल में एड्मिट
03:13है ये भी जानकारी सामने आ रही है कि विवेक
03:31साहे ख़ूर बच्च वात जानकारी सामने आ रही है कि विवेक अगरवाल की मौसी अगरवाल और वार्या अगरवाल ठहरे हो
03:57अशोक पंसारी, मौसा जावरिलाल और मौसी कमला भी विवेक के पिता को देखने के लिए आये थे
04:02ये सब होटल फ्लोरिश में ही ठहरे थे
04:29होटल में आग लगी तो इलक्ट्रोनिक गेट लॉक हो गया, परिवार का धुए से दम खुटने लगा
04:34विवेक ने आखरी कॉल अपने एक रिष्टेदार को किया और सिर्फ इतना कहा कि बेटियों को बचा लो
04:40ये पिता की बेवसी थी, जिसकी आखों के सामने सब कुछ चल रहा था
04:46पत्नी, मा, बेटिया, मौसा, मौसी, मामा, सब इस आख की चपेट में थे
04:54कमरे में धुआ भर गया था, सासे साथ छोड रही थी और विवेक की भी मौत इस अगनिकार्ण में हो
05:00गई
05:16अगरवाल परिवार गुरुग्राम की सेक्टर 46 में रहता था, अब ये घर सुनसान पड़ा है
05:20घर में रहने वाले सभी लोग इस हाथसे की वज़ा से दुनिया को अलविदा कह गए
05:27सिवाए उस पिता के, जिसका अस्पताल में लाज चल रहा है
05:40चांते थे आप तरजनी अगरवाल को तरजनी अगरवाल को इतना नहीं थी, क्या देख लेते हैं
05:47जैसे खड़िया गेट से नवस्तेंटी मुस्तुरा देख थे बाकी जो इवेक जी की मज़र थी वह हम पार्क में बैठते
05:56थे
05:57अच्छी थी तिरजाने के कुप्ते देख लिए दो भी लिए
06:01मिशब्द है कि ऐसा हुआ और इसको पूरा परिवार चला गया दोनों बेटी मा तरजनी उसकी वाइफ विएक खुद हम
06:15लोग साथ में साथ में साइकलिंग करते थे
06:21अच्छी वाइफ दोनों में बड़ा ही लगाव हमने देखते थे दोनों बच्चियां बड़ी प्यारी थी तो बहुत दुक्त
06:33आज जब विएक के परिवार का अन्तिम संसकार हुआ तो पूरे परिवार में मुखागनी देने के लिए कोई नहीं था
06:48किसी को समझ नहीं आ रहा आखिर हो क्या गया अचानक ए खस्ती खेलती दुनिया अपने पीछे आंसों का सेलाग
06:56छोड़ कर चली गई
06:58परिवार था आठ लोगों की मौत हुई जिनमें से पांच को अभी अभी यहां मुखागनी दी गई है
07:04यह मोक्ष्टाम है गुरुग्राम का जहां पर एक एक करके पार्थिव शरीर को लाया गया यहां आप पिंडरान के टूटे
07:10वे घड़े भी देख सकते हैं
07:11यहां एक एक करके सबकी जो आखरी क्रियाएं जो भी हो सकती थी वो की गई आप समझ सकते हैं
07:17परिवार की क्या सिती रही होगी जिसके आठ लोगों की मौत हो गई
07:22पाच यहां लाए गए हैं, क्योंकि बाकी जो परिवार के लोग है, वो राजिस्थान के रहने वाले थे, तो उनके
07:28परतिफ शरीर को राजिस्थान ही भेज दिया गया, लेकिन विवेक उनकी पत्नी, उनकी दो छोटी बेटिया, और उनकी माताजी, उनके
07:36शरीर को यहीं ला�
07:51किस की थी किस वज़े से हुआ क्योंकि इस कारण तीन परिवार पूरे पूरे उजड़ गए मेरा मुझा जी का
07:56पूरा परिवार लगबाग खतम हो चुका है हमें चाहते हैं इसकी पूरी जहाश होनी चीए और दोश्यों के खिलाब सकत
08:01कारवय होनी चीए और इस तरह के जो अ
08:21के आनी का इंतजार होगा लेकिन हकीकत ये है कि जिन कद्मों की आहट का इंतजार था वो हमेशा के
08:28लिए थंब चुके हैं
08:30गुरू ग्राम से अंजली स्थिवाल और निरज होशिष्ट के साथ आज तक पेरो
08:38सोचिए एक पूरा परिवार पूरी तरह से खतम हो गया जिस कार से विवेक अगरवाल का परिवार होटल गया था
08:46वो गाड़ी अभी भी वहीं खड़ी है जिसे ले जाने वाला अब कोई नहीं बचा
08:52वेक और तरचनी अगरवाल अपने दोनों बेटियों के साथ फ्लरिश स्टे होटेल में होजरानी में थे बाहर सड़क पर उनकी
09:02गाड़ी खरी थी
09:02संभवता इसी गाड़ी में बैटकर मस्डीज में बैटकर वो साकेत मैक्स जाते अपने पिता से मिलते तोनों पोतियां दादा से
09:12मिलती लेकिन अभी वो गाड़ी उसी होजरानी में बीचो बीच साड़क पे खड़ी
09:17यह वही मस्डीज कार है यूपी नंबर की कार जिसका इस्तमाल परिवार विवेक का परिवार करता था
09:26आज उनकी अंतिम ख्रिया को गुरुग्राम में पूरा किया गया परिवार द्वारा जो परिवार में लोग बचे हुए हैं
09:34और आपको दिखाई देगा सीसा तूटा हुआ है इस गाड़ी का कांच तूटा हुआ है क्यूंकि जब होटेल में आग
09:40लगी तो इस वक्त संभवता गाड़ी में आग ना लग जाए
09:44इसके लिए इसके कांच को तोड़ कर आगे ले जाए गया आगे एक हुग भी दिखाई देगा आपको जिस हुग
09:50कास्तमाल करके गाड़ी को संभवता आगे खीचा गया होगा
09:52बीच ओ बीच फ्लरिश इन से बमुश्किल सो देड़ सो मीटर दूर ये गाड़ी इस वक्त इंतजार में कि संभवता
10:01कोई परिवार से आए और यहां से ले जाए
10:04कितने सफर इस गाड़ी में विवेक और तरचनी ने साथ में पूरे किये होंगे उनकी बेटियों को लेकर कितने सपने
10:13उनोंने देखे होंगे लेकिन लापरवाही लालच एक व्यक्ति की 21 लोगों की जान ले लेती है और साथ इसाथ दिल्ली
10:23में अलग अलग एजंसियों की
10:54गलतियां
10:56मेहकमें भले सो रहे थे लेकिन मालविया नगर के लोग जाग रहे थे हमेशा की तरह इस अगनी कांड में
11:02भी सारे अफसर बाबू बीट ऑफिसर बच जाएंगे लेकिन सल्यूट है उन नागरिकों को जिन्होंने लोगों को बचाने में अपनी
11:11जान की बाजी लगा दी मिल
11:13मालविया नगर अगनी कांड के अगनी वीरों से
11:43कर दोर पड़ा कि कैसे भी जितने भी लोगों को बचा सकें बचा लो
12:26दिल्ली अगनी कांड के कई हीरो हैं जिन्होंने परवा किये बगैर मुश्किल में फसे लोगों की मदद की वसी राजा
12:32अर्मान संजय और भी बहुत लोग थे सब
12:35अपने अपने हिस्से का प्रयास किया तब जाकर 40 से स्यादा लोगों की जान बचाए जा सकी
12:58अज तक तेश का सरवश्रेश्ट न्यूज चनल
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