00:00क्या आप मानेंगे कि अमेरिका अपने एबोला एक्सकोर सिटीजन्स को घर आने के वजाए कि एफिकिन देश भेजने की त्यारी
00:06कर रहा है और अब उस फैसले के खिलाफ केन्या की सडकों पर लोग उतर आए हैं
00:11सवाल ये है कि आखिर अमेरिका को केन्या ही क्यों चाहिए और केन्या के लोग इतने गुस्ते में क्यों हैं
00:17नवस्कार मैं हूँ जस्वी कौशिक और आप देख रहे हैं वन इंडिया हिंडी
00:20केन्या के सेंचल टाउन नान्यूकी में हंड्रेद्स ओफ यंग प्रोटेस्टर्स लेकी पियायर बेस के बहार जमा हुए
00:27उनका विरोज एक प्रपोस्ट एबोला कॉरंटाइन सेंटर को लेकर है
00:30अमेरिका की प्लानिंग थी के बोला के कॉंटाइक्ट में आये अपने सिटीजन्स को केन्या के स्वेसिलिटी में कॉरंटाइन किया जाए
00:37इंस्टेड ओफ लाइंग देम बाक टु यॉनाइट स्टेट्स लेकिन कहानी यहीं खतम नहीं होती
00:43केन्या हाई कोट ने दो दिन पहले ही स्वेसिलिटी और फॉरंट पेशिंस के अराइवल पर टेम्प्ररी स्टे लगा दिया है
00:49पोट अब इस मामले के सुनवाई करेगा
00:52प्रोटेस्ट का असली रीजन क्या था आईए जानते हैं
00:55केन्या की लॉ सुसाइटी और एक कॉंसिटूशनल वॉच्ट डॉक ने कोट में पिटीशन पाइल की थी
01:00उनका कहना था कि केन्या का हेल्प केर सिस्टम अल्रेडी प्रेशर में है
01:04उनका सवाल सीधा है जब देश अपने हेल्ट चैलेंजस से जूज रहा है
01:08तो फॉरन इबोला रिलेटेड केसिस का रिस्ट क्यों लिया जाए
01:11इसी कंसर्न के बाद कोट ने फैसलिटी को टेंपरी बेसिस पर सिस्पेंड कर दिया
01:16लेकिन मंडे को भी लोग सड़कों पर उतर आए
01:19प्रोटेस्टर्स एंटी बोला स्लोगन्स लगा रहे थे
01:22और डिमांड कर रहे थे कि गवर्मेंट इस प्लान को पूरी तरह रिजेक्ट करे
01:26लेकिन एक मिनिट क्या ये सिर्फ हेल कंसर्न है या फिर नाशनल सोवर्निटी का भी मुद्दा है
01:31एसोसियेटड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक यूएस ओफिशल्स ने बताया था कि अमेरिका एबोल एक्सपोजर वाले अपने सिटीजन्स के ले
01:38केन्या में एक डेडिकेटड कॉरंटाइन फैसिलिटी एस्टेबलिश करना चाहते हैं
01:43प्लान के हिसाब से लेक्पिया एयर बेस पर फिफ्टी बेट कॉरिंटाइन सेंटर ऑपरेशनल होना था
01:48इसके साथ ही अमेरिका ने केन्या की बोला प्रिपेर्टनेस एफर्ट्स के लिए 13.5 मिलियन डॉलर सपोर्ट देने का भी
01:56प्रॉमिस किया है
01:56यानि वाशिंग्टन का आर्गूमेंट है कि ये सिरफ अमेरिका के लिए नहीं बल्कि केन्या के हेल्थ इंफ्रस्ट्रक्चर को स्ट्रेंट्सन करने
02:03का भी एक मौका है
02:04जैसे ही ये कॉंट्रवर्सी बड़ी केन्या के हेल्थ मिनिस्टर एदिन ड्वाले ने क्लैरिफिकेशन दिया
02:09उन्होंने कहा कि ये कॉरिंटाइन सेंटर सिरफ अमेरिकन सिटीजन के लिए नहीं होंगे
02:14बलकि ये सब के लिए होंगे और इसको अब्जेक्टिव पब्लिक हेल्फ प्रिपेर्डनेस को इंप्रूफ करना है
02:19लेकिन प्रोटेस्टर्स और प्रेटीशनर्स इस एक्स्परनेशन से पूरी धरा सैटिस्फायर नहीं दिख रहे
02:25उनका मानना है कि एबोला जैसे डेट्वी डिसीज के मामले में एक्स्ट्रा कॉश्टिन जरूई है
02:31और इसी वज़ासे इशू अब फोर्ट, गवर्मेंट और पप्लिक ओपीनियन के बीच एक बड़ा डिबेट बन गया है
02:37तो बड़ा सवाल यह है कि अगर फैसिलिटी हेल्थ सेक्यॉरिटी के लिए है तो लोग अपोस क्यू कर रहे हैं
02:42और अगर लोगों की चिंता सही है तो अमेरिका को अल्टरनेटेव अरेंच्मेंट क्यू नहीं ढूणना चाहिए
02:48एक तरफ सपोर्टर्स कहते हैं कि कॉरिंटाइन फैसिलिटी से इबोला प्रिपेर्डनेस इंप्रूफ होगी और इंटरनाशनल कॉपरेशन मस्बूत होगी
02:56तो दूसरी तरफ फ्रिटेक्स का कहना है कि केन्या को दुनिया के हेल्टर्स का डंपिंग ग्राउंड नहीं बनना चाहिए
03:02पैशली जब लोकल हेल्ट केर सिस्टम्स पर अल्रेडी प्रेशर हो
03:06दोनों आर्ग्यूमेंट्स में लॉचिक है लेकिन फाइनल फैसला कोट और पॉलिसी मेकर्स को करना है
03:11आपका क्या मानना है क्या ग्लोबल हेल्ट एमरजेंसी में कंट्रीज को मिलकर काम करना चाहिए
03:17या देश को अपने सिटीजन की रिस्पोंसिबलिटी खुद उठानी चाहिए
03:21फिलाल के इन्या में इबोला कॉरंटाइन सेंजल को लेकर
03:25कॉंट्रोवर्सी और प्रोटेस्ट दोनों ही जारी है
03:27और सबकी नजरे कोट के अगले फैसले पर टिकी हुई है
03:30आप इस मुद्दे पर क्या सोचते हैं
03:31कमेंट सेक्शन में जरूर बताइए
03:33आप देख रहे हैं वन इंडिया हिंडि
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