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मुंबई के बांद्रा ईस्ट स्थित गरीब नगर में रेलवे की ज़मीन पर बने सैकड़ों घरों पर बुलडोजर चला दिया गया। कोर्ट की अनुमति और रेलवे के आदेश के बाद शुरू हुई इस कार्रवाई में 500 में से 300 से ज्यादा ढांचे तोड़ दिए गए। लेकिन सवाल सिर्फ अवैध कब्ज़े का नहीं है — सवाल उन हजारों लोगों का है जो दशकों से यहाँ रह रहे थे, जिनके पास वोटर ID, राशन कार्ड और बिजली कनेक्शन तक थे।

कार्रवाई के दौरान मस्जिद का हिस्सा गिरने के बाद तनाव बढ़ गया, पत्थरबाज़ी हुई, पुलिसकर्मी घायल हुए और कई गिरफ्तारियाँ हुईं। विपक्ष ने इसे गरीबों पर ज़ुल्म बताया, जबकि रेलवे का कहना है कि यह कोर्ट के आदेश और मुंबई की रेलवे परियोजनाओं के लिए ज़रूरी था।

क्या कानून और इंसानियत साथ-साथ चल सकते थे?
क्या गरीब नगर के लोगों के लिए पहले rehabilitation plan बनना चाहिए था?
और धारावी redevelopment जैसा मॉडल यहाँ क्यों नहीं अपनाया गया?

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~HT.318~ED.104~GR.510~VG.HM~

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Transcript
00:11आज हम बात करेंगे उस बुल्डोजर की जो कानूनी था, जो कोट अपरूट था, जो ज़रूरी भी था
00:17लेकिन जिसने सेकडो घर जमीन पर बिचा दिये
00:19हम बात कर रहे हैं मुंबई में हुई बड़ी अतिकरमन कारवाई की
00:23मुंबई में बांदरा के पास गरीब नगर है, सपनों के शहर को चलाने वाले पई है, मतलब मुंबई का वर्किंग
00:30क्लास यह दशकों से रह रहा है
00:31इस गरीब नगर का कुछ हिस्सा रेलवे की जमी पर अवैद रूप से बसाया गया था और इसी को पिछले
00:37कुछ दिनों में जमी दोस किया गया
00:38नमस्कार में अवै और आप देख रहे है वन इंडिया निउस हिंदी
00:44पशिम रेलवे ने बांदरा इस्ट के गरीब नगर में अतिकरमन हटाओ अवियान शुग किया
00:49400 से 500 अवैद निर्मान करीब 5200 वर्ग मीटर रेलवे की जमी जिसकी कीमत है लगबग 600 करोड
00:57यहाँ कोई नहीं कहरा कि यह बुल्डोजर अवैद है लेकिन असरी सवाल यह है जो लोग यहाँ दशको से रह
01:04रहे थे
01:05दशको साल से यहाँ पर उन्होंने अपना मकान बनाया उनके पास वोटर आईडी थी राशनकार था बिजली का कनेक्शन भी
01:12था
01:12तो उन्हें इतने साल नागरी की तरह ट्रीट क्यों किया गया और एक दिन अचानक अतिक्रमन कारी कैसे कह दिया
01:19गया
01:19यह सिस्टम की सबसे बड़ी बैइमानी है जब वोट चाहिए था तब ये लोग असली मुंबई करतें जब जमीन चाहिए
01:26तब ये अवेत कवजेदार हो गए
01:28यह जमीन BKC के पास है बांदरा टर्मिनस के करीब है
01:32माना जाता है कि मुंबई की सबसे महेंगी जमीनों में से एक ये जमी का टुकड़ा है
01:37ये मुहीम पाच दिन चली और 23-24 मई तक 500 में से करीब 300 से जादा धाचे जमी दोस
01:43कर दिये गए थे
01:44बीच में कुछ ऐसा हुआ जिसके बाद यहां का माहौल गरमाया
01:4820 मई को एक मजजित का हिस्सा गिरा
01:51लोग भड़क उटे पत्थर चले लाठिया चली
01:54इसमें तीन पुलिस कर्मी घायल हुए और 19 गिरफतारिया भी हुई
01:57अब समझते है कि सरकार और रेलवे क्या कह रहा है
02:00रेलवे का कहना है ये कोट का आदेश है
02:032017 से कारवाई चल रही थी
02:05बॉंबी हाई कोट ने 29 अप्रेल 2026 को अनुमती दी
02:09और सुप्रीम कोट तक ये मसला गया
02:11लेकिन वहाँ पर भी सुप्रीम कोट ने स्टे देने से मना कि
02:15और आखिरकार फैसला आया
02:17रेलवे की जमीन है रेलवे के लिए होगी
02:20यहाँ पर छटी लाइन बननी है
02:22बांदरा टर्मिनस को एकस्पांड करना है
02:24मुंबई में दिन बदिन पॉफलिशन बढ़ती जा रही है
02:26और यहाँ की लोकल लाइन्स यहाँ की ट्रेन सर्विसिस
02:29इसके उपर भी इसका लोड भढ़ता जा रहा है
02:32मुंबई की लाइफलाइन को और बजबूत करने के लिए
02:34ये कदम ज़रूरी है
02:36इस तरीके के बाते रेलवे और सरकार की तरफ से कही जा रही है
02:39और ये भी कहा कि जिनके घर eligible है
02:42ये रेलवे ने कहा था कि जिनके घर eligible थे
02:44जो एक सर्वे किया गया था
02:45उसमें उन्हें बचाया गया
02:48हालाकि यही पर सबसे बड़ा ट्विस्ट
02:50हिंदुस्तान टाइम्स की इस रिपोर्ट के अनुसार
02:52रेल्वे ने वादा किया था कि उपर की मंजिल हाथ से तोड़ेंगे
02:56नीचे का पका घर सुरक्षित रहेगा
02:58लेकिन चौते दिन दो बुल्डोजर आए और उन्हीं 100 प्रोटेक्टेड घरों की
03:04जिनको सुप्रीम कोट ने या फिर कहे तो सुप कोट ने यह गैरंटीर किया था कि
03:09यह लीगल होम्स है यह लीगल घर है तो इनके उपर बुल्डोजर नहीं चलाए
03:13लेकिन उपरी मंजल तोडने लगे वो बुल्डोजर और धीरे धीरे वो मलवा गिरा
03:18नीचे के घरों पर भी उन घरों पर जिने कोट ने बचाया था देखते देखते
03:24उन में से पाच घर रहने लायक भी नहीं बचे एक माली की चीक सुनकर पास खड़े पुलिस वाले दोड़े
03:30रेलवे ओफिशल्स को बुलाया ओर्डर आया रोको लेकिन तब तक देर हो चुकी थी
03:36अब समझते है कि विपक्ष इस पूरे मसले में क्या कह रहा है
03:39कॉंग्रेस चिवसेना यूबीटे ने कहा कि ये गरीबों पर जुल्म है
03:42इत को बस कुछ दिन बाकी है और यही वक्त कैसे चुना गया इतनी बड़ी कारवाई के लिए
03:46मुंबई में मई की भेंकिर गर्मी के बीच धूप में बच्चे बुज़ुर्ग छट के बिना घूम रहे
03:53कानून अपनी जगह सही है भी या फिर हो भी सकता है
03:56लेकिन रेलवे की जमीन रेलवी की है ही इसके बारे में किसी कोई भी दोर है बिल्कुल नहीं है
04:02लेकिन कोट ने सालों से सोच समझ करिये फैसला भी दिया
04:07लेकिन कानून और इंसानियत दोनों एक साथ चल सकते हैं
04:10अगर 2017 में नोटिस दिया था तो 2026 तक रिहाबिल्टेशन क्यों नहीं हुआ
04:169 साल में आखिरकार क्या हुआ लोगों के लिए क्या किया गया
04:21बस एक केस चलता रहा और जब एक्शन का वक्त आया तो सिर्फ बुल्डोजर आया
04:25अब एक कंपैरेजन देखिये कि मुंबई में ही एक और बड़ा काम चल रहा है
04:29धारा भी रिडेवलोप्मेंट प्रोजेक्ट
04:31600 एकेड की जमीन है करीब 10 लाख लोगों को ट्रेट इमपैट करेगा
04:3595,000 करोड से भी बड़ी ये योजना है
04:39वहाँ पर क्या हो रहा है वहाँ पर सर्वेज हो रहे है
04:42डिजिटल मैपिंग हो रही है
04:43एलिजिबल लोगों को 500 से लगबग 800 स्क्वेर फिट के मकान भी मिलेंगे
04:48और की टू की रिहाब का वहाँ पर वादा किया गया है
04:52अब कंपेर करिए कि गरीब नगर में जो 500 घर थे
04:55वो बस 5 दिन में तोड़े गए और दूसरी तरफ इतना बड़ा प्रोजेक्ट
05:00जो महराष्ट सरकार जो महराष्ट की पुलिस और वहाँ के सारे लोग कर सकते है
05:04तो गरीब नगर के लिए कोई और जरिया या फिर कोई और मसला एक तरीके से देखते हुए
05:10एक वे क्यों ही निकाला गया
05:12तो आखिरकार सवाल यही है
05:14जब धारावी जैसी बड़ी जगए के लिए प्लान बन सकता है
05:17तो गरीब नगर जैसी छोटी जगए के लिए पहले से क्यों नहीं बन पाया
05:21लोकल पॉलिटिशन तन्वीर शेक का कहना है कि बेगर हुए कई लोगों के पास
05:262000 साल से पहले के भी डॉक्यमेंट्स है
05:29जिसकी वज़र से वो महराश्य सरकार की ऐसारे और कुछ लोग पियम आवास योजना के लिए भी एलिजिबल हो सकते
05:35है
05:35लिगालिटी और हुमानिटी के पेच में फसा ये पूरा मसला क्या बहतर तरीके से हैंडल क्या जा सकता था
05:41यही सवाल बेगर हुए गरीब नगर के लोग और वो लाखों लोग सोच रहे होंगे जो देश की कई सारी
05:48जुग्यों और कच्छे तूटे मकानों को अपना घर मानते हैं
05:52देखते रहे ये One India News Hindi और कई रिपोर्ट्स के लिए
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