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Transcript
00:00अइसा लगता है जैसे की
00:01जीवित परवत की खाल उतारी जा रही है
00:05जीवित प्राणी के साथ हिंसा होते देख रहे हो
00:13अबी तो आज तो शुक्रवार हैं
00:14अबी तो कल परसों धूख मचेगी
00:22वो भी एक बौक्स जो टिक करना है
00:24नहीं तो जो लोग वीकेंड पर आते हैं, यहां आया रिशिकेश या निताल मसूरी कहीं भी, उनको बुछ मिलता थोड़ी
00:30है, वो तो बस चेक इन चेक आउट करने आते हैं और ट्राफिक जैम जहलने आते हैं, चेक इन, और
00:37जितनी देर में वो पूरे सफर और ट्राफिक जै
00:44होगे, चेक आउट का समय आ जाएगा, फिर चेक आउट करके फिर उसी जैम में घुछ जाओ, लेकिन ऐसा लगता
00:49है कि हम भी इन हैं, हम पीछे नहीं रह गये, कुछ हूट नहीं गया, FOMO, we are also a
00:58part of the herd, the crowd, तो सब जा रहे हैं तो हम भी जाएंगे, फिर फोटो डाल देंगे
01:03just to display that we belong, हम भी हैं, मिल किसी और कुछ नहीं रहा है यह सब करने से,
01:10अगर हम यह भी कहें नहीं जा इन है, जो मनुषी नहीं पने स्वार्थ के लिए प्रक्रति तबह करी है,
01:13तो कॉन सा स्वार्थ है, उस स्वार्थ में तो कोई अर्थ नहीं है, उस स्वार्थ में तो कोई �
01:18नहीं है, तो दोनों और से मारे जा रहे हो, तुम्हारा कोई हितनी सदरहा और प्रकृति का विनाश भी करे
01:25दे रहे हो
01:29चोड़ो यह नहीं देखना है, मुझे, मैं बड़ी उकबीक लगती है, ऐसा लगता है जैसे कि जीवित परवत की खाल
01:40उतारी जा रही है, ऐसा लगता है जैसे किसी जीवित प्राणी के साथ हिंसा होते देख रहे हो, चोड़ो
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