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  • 2 days ago

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00:00कैसा लग रहा होगा सोचो कोई बाप हो जो सचमुच अपनी अउलाद का भला चाहता हो क्या गुजर रही होगी
00:07अब बाप पर चलिए ऐसे कान पकड़िए आख बाद में पूछिए गांसू पहले ऐसे कान पकड़िए यह अपने साथ यह
00:15कभी दुबारा नहीं होने दूंगी
00:19सारी गलतियां सारे अपराद अच्छे होते हैं उनसे सबक लेलो बस और यही आंसूओं का सबब होता है बाहर अपने
00:29आपको गिराने से पहले फुड़ा मेरा ख्याल कर लिया करो मैं तुम्हें कैसे देख रहा हूँ मैं तुम्हारे लिए क्या
00:35सोच रहा हूँ
00:47क्या बोल रही थी आप अट्रेक्टिव नहीं है और यह सारी बात है इसलिए मुझे रिजेक्ट कर गए देख रहे
00:52हो आप ही क्या कर रही आप अपने आपको मानसिक रोग की तरफ धकेल रहे हो
00:56मैं शिक्षक हूँ आपका यह बात बड़ी विचित रहे है कि आप अपने शिक्षक के सामने बैठ करके अपने शरीर
01:02का वर्णन कर रही है आप अपने ही विरुद्ध दोशी हो गई है आपको यह जो भी आँसू आ रहे
01:09है न यह बहुत पहले बैज आने चाहिए थे
01:12अपने आपको उजाईयों पर ले जाने की जगए 16, 18, 20, 22 के होते नहीं हो न तुमने जिंदगी देखी
01:18न अपने आपको ढ़ाला न सवारा न गढ़ा न सौंदर रे दिया और बस लग जाते होगी किसी कदर से
01:25जोड़ा बन जाए
01:25मैं साथी बनाने का विरोध नहीं कर रहा हूँ
01:30मैं किसी व्यक्त को
01:39सर मेरी आवाज आ रही है क्या आप नहीं आ रहे हैं लेकि आपने उनको माने भी बना दिया
01:58सर रब्दों में थोड़ा सा हेर फेर हो सकता है क्योंकि आपके सामने बोल रहा है तो थोड़ा सा अंदर
02:06से थोड़ी सी नर्वसने से
02:09सर मेरा नाम दीक्षा है और हम गीता सत्रों से करीब डेट साल से जुड़े हुए हैं
02:14और सर मेरा अभी हाल में ही मेरी फैमिली के थू करीब दो लड़कों से चार-पांच महिने के गप
02:25में शादे के परपस से मेरी मुलागात कराई गई
02:28तो सर वह लड़के railway के किसी post में थे
02:32railway विभाग में किसी पत्पे थे
02:34हाला कि मैं भी कारिय रहत हूँ
02:36प्राक में किस तर में मैं एक सरकारी सिक्षिका हूँ
02:40और सर मैं थोड़ी सी कम attracted हूँ
02:43तो शादे की तौर में चीज़े यही almost देखी राती है
02:46तो उनकी तरफ से करीब बेना किसी solid reason के या फिर वो rejection हो गया आप घरवालों का सर
02:54यह मानना है कि वो नहीं तो कोई और और हमें सर यह लगता है कि हम कोई object तो
03:00है नहीं कि बार बार हमारी दर्शनी लगाए जाए और सर जो बात मेरी बातचीत उन लड़कों से हुई थी
03:07तो उस
03:11किसी वह सर पर उन पर dependent या किसी भी तलपे चाहेए मान सबस्केया जाहें नहीं गय सकती है तो
03:18यह छीजें भी हिसायत कुछ रही होंगी तो यह चीजें हम घर में बताते हैं लेकिन वो नहीं वहाएं कि
03:26हमारे उपर समाजिक दबाव है जैसे कि समाज में चलता है सर की लड�
03:41उनको सर कैसे यह चीज़ बता पाएं और दूसरा सर ये भी हमें जानना है कि यह जो मेरे बिचार
03:47आ रहे हैं कहीं न कहीं कहीं हैं एहंक्दार के केंदर से तो नहीं कि हम जो अपना खुद का
03:53आदलन कर रहे हैं वो सकता है है हम खुद को एक्जगरेट कर रही हूं तो सर इसमे
03:58हमें थोड़ी clarity चाहिए, जो हम सोच रहे हैं, वो कहीं ego का center तो नहीं आ रहे हैं
04:11आपकी घलती ये नहीं है, कि आप आगे अपनी नुमाईश नहीं लगाना चाहती है
04:18आपको तो पहले कान पकड़के उठक बैठक करके खुद से माफी माँगनी चाहिए
04:24कि आपने दो बार भी अपनी प्रदर्शनी क्यों लगाई
04:32आप अपने ही विरुद्ध दोशी हो गई है
04:39समाज, परिवार, संसकार
04:43इनके सामने निर्दोश बने रहने के लिए व्यक्ति स्वयम के प्रतिही बड़े से बड़ा दोशी अपराधी हो जाता है
04:56अपनी गर्मा
05:00को बेच करके
05:02किसी की सुईक्रते मिल गई, हाँ बोल गई, एक
05:06एकसेप्टेंस मिल गई, अनुमोधन मिल गया
05:09तो यह तो बड़े घाटे का सौधा हो गया ना
05:13जो आके आपको पंदरा मिनट या दो चार देन या हफता पर देख लेगा
05:18उसने आपको क्या देख लिया, उसने शरीरी तो देख लिया आपका
05:24यह आपके दिल में जाक के क्या है
05:27उसने आपको क्या बना दिया
05:32मास बना दिया
05:34और उसने बनाया तो बनाया
05:36लानत की बात ही है कि आपने बनना मनजूर किया
05:40आपको यह जो भी आँसू आ रहे हैं यह बहुत पहले भैज आने चाहिए थे
05:47ठीक है जानता हूँ सामाजे के एक परिप्रेक्ष है
05:50संदर्भ है इतिहास है
05:55इस्तरी को कई तरीकों से कमजोर बनाया गया है पर
05:58इतनी भी वो नहीं कमजोर है
06:03कि मेले के और मंडी के जानवर की तरह
06:08उसे अपनी नुमाईश लगानी पड़े कि आओ मुझे देखो और कौन मुझे अपने अब घर बांदेगा बताओ
06:21चलिए ऐसे कान पकड़िये
06:26आँख बाद में पूछिए गाँसू पहले ऐसे कान पकड़िये
06:29कि अपने साथ ये कभी दुबारा नहीं होने दूँगी
06:34सारी गल्तियां सारे अपराद अच्छे होते हैं
06:37उनसे सबक ले लो बस
06:41और यही आँसूओं का सबब होता है
06:44कि बड़ी गलानी उनभव हो रही है
06:47अगलानी की सार्थकता इसी में है
06:50कि जो एक बार हो गया वो दुबारा नहीं होगा
06:54भीतर जो बैठा हुआ था जिसने ये गल्ति करी
06:58मैं उसको इंबदर डालूँगी
07:01वो गल्ति करने के लिए बचे गई नहीं
07:04तो दुबारा गल्ति करेगा कैसे
07:08यही सबक होता है और यही प्रैश्चित होता है
07:15क्या बोल रही थी आप आप अट्रेक्टिव नहीं है और यह सारी बत हैं इसलिए मुझे रिजेक्ट कर गए
07:20देख रहे हो आप यह आप अपने आपको मानसिक रोप की तरफ धकेल रहे हो
07:27दुनिया भर की महिलाएं नियूरोसिस की शिकार हैं मानसिक रोप से स्वस्थ इस्तरी खोजना मुश्किल है
07:40और यह सिर्फ मनुष्य प्रजाति में हुआ है
07:49उसको ऐसे देखते हो कि वो खुद को भी वैसे ही देखने लगती है
07:55नहीं तो कौन हूँ मैं मैं शिक्षक हूँ आपका
07:59यह बात बड़ी विचित रहे कि आप अपने शिक्षक के सामने बैट करके अपने शरीर का वर्णन कर रही है
08:07ऐसा कोई करता है
08:10आप मेरे सामने बैठ के बोल रहे हो कि आप attractive नही हो हो कि नहीं हो
08:15आप community में आये थे
08:17तो form में पूछा गया था कि कितने सुन्दर हो
08:21पूछा था
08:24और जो ज्यादा सुन्दर होते हैं
08:25उनसे donation कुछ कम लेते हैं क्या
08:36ये आकरशन
08:37ये साव ये वो
08:39शरीर को लेके मैं कुछ बोलता भी हूँ
08:42तो यही आगरा कि भाई
08:43मजबूत रखो दोड़ो भागो
08:48क्योंकि शरीर कमजोर कर लो
08:50तो और कही तरह की बहार की कमजोरियां
08:52सुईकार नहीं पड़ती है
08:55पिर देखो आप क्या कर रहे हो
08:57आप उस विवस्था में फस करके
08:59वही करने लग गए जो विवस्था आपसे कराना चाहती है
09:02वो चाहते हैं कि आप अपने आपको
09:04शरीर की तरह देखो आपने वो शरू कर दिया
09:11ये गुनाह है
09:15गीता मना करती है
09:16और श्री कृष्ण खुश नहीं होंगे इस बात से
09:24हिंदू कहती है न अपने आपको आप
09:30तो सनातन की धारा
09:36को शब्द जिन रिशियों ने दिये थे
09:42वेद जिनों ने देखे थे
09:45जहां से मुखरित हुए थे
09:47उन्हें बड़ा बुरा लग रहा होगा
09:54उन्होंने अपनी बेटियों को
09:56शरीर और जिस्म और मास की तरह नहीं देखा है
10:03वही सच्चे पिता हैं हमारे
10:12कैसा लग रहा होगा सोचो कोई बाप हो
10:16जो सच्च मुच अपनी अउलाद का भला चाहता हो
10:20सईयों की बात की वो अउलाद एक लड़की है
10:23और उसने जान लगा दी अपनी अउलाद की परवरिश करने में
10:27कि वो अपने आपको चेतना की तरह देखे
10:31ये वेदान्त दर्शन पूरा और क्या है
10:35सांख है और क्या है योग क्या है
10:38या है क्या है वैशेशिक क्या है
10:46बुद्ध और महावीर भी उस धारा से कोई अलग है
10:49क्या उनका आशेश क्या है उनकी नियत क्या है
10:54और उन्होंने अच्छी से अच्छी नियत रखते हुए
10:58अपनी अउलाद की परवरिश करी
11:00वो चाह रहे थे कि अउलाद पढ़े लिखे उची से उची बने
11:06उन्होंने खुद किताबे लिख करके दी अपनी अउलाद के लिए
11:10तुम उस बाप की सोचो
11:13जिसने अपनी अउलाद के लिए खुद किताबे लिखी ताकि वो कभी बहक न जाए
11:19वो अउलाद जब अब बड़ी हो गई है
11:23युवा हो गई है तो अपने आपको बोल रही है कि मैं तो शरीर हूँ और मैं कम अट्रेक्टिव हूँ
11:29क्या गुजर रही होगी अब बाप पर
11:41सत्य सनातन होता है ना शरीर तो नहीं
11:44अपने आपको सनातन ही बोलते हो
11:48और सत्य की जगह संसकारों का पालन कर रहे हो और वो भी कौन से संसकार
11:53जो हर दो पीडियों में बदल जाते हैं जो हर 200 किलोमीटर पर बदल जाते हैं
11:59संसकार थोड़ी सनातन हो गए
12:02ये प्रताएं, ये रीति रिवाज
12:04किस घर में क्या चलता है, किस महले में क्या चलता है
12:07किस कुल में क्या चलता है, किस गाओं में क्या चलता है
12:10ये थोड़ी सनातन हो गया
12:14क्यों डरते हो, क्यों दपते हो
12:19मनुष्य की पहचान दे नहीं चेतना होती है
12:21और हमारे रिश्व हैं हमारी चेतना के बाप
12:26हाँ सुनेंगे बाप की पर असली बाप की सुनेंगे ना
12:39सुचो ऐसे बाप के सामने बेटी आए
12:43और बता करके आए कि
12:48शरीर रह गई हूँ
12:50चेतना का सम्मान तो किया ही नहीं
12:54सुचो
13:00नजाने कौन सा आपने आकड़ा बोला था कि
13:02इतने महीनों से इतने सालों से आप
13:06गीता प्रतिभागी हो आप छात्रा हो मेरी
13:09मेरी छात्रा मेरे आके आके बोलेगी कि
13:12कोई इधर उधर का
13:16पंडू पंडू आ करके उसको शरीर की तरह देखकर चला गया
13:20मुझे कैसा लगेगा
13:27क्या उसकी पातरता कुल की उसके पास रेलवे की नौकरी है
13:32क्या एफे गई थी उसके पास
13:34चाय समुसा लेके गई थी
13:38क्या किया था
13:40गर अलों ने पोला था जाओ दोनों अब छट पे बात कर लो
13:44क्या हुआ था
13:48ये सब करके फिर आप
13:52गीता को क्या मूँ दिखाओगे
14:08पहले परंपरा ने उसको शरीर बनाया
14:12और अब वो परंपरा से विद्रोह करके खुदी शरीर बनी जा रही है
14:28ये है
14:31बड़ी से बड़ी हार
14:35बाप की
14:41कहीं ये चल रहा है कि
14:43कोई तुम्हें देखने आएगा चलो अपने आपको दिखाओ
14:49और कहीं ये चल रहा है कि वो खुदी अपने आपको दिखाते खुम रही है
14:55पर ले दे करके
14:56ये तो उसके भीतर घुसी गया है कि वो शरीर है
15:06गाओं की है कसबे की है
15:12तो कोई देखने आएगा
15:16और पढ़ी लिखी है मेट्रो की है
15:23तो फिर वो खुदी अपने आपको दिखाएगी
15:30आप यहां आते हो मेरे सामने बैठते हो
15:36पिरिशिकेश आया था आप सवाल पूछते हो
15:39मैं आपका एक चेहरा देखता हूँ
15:43चेतना से प्रदीप्त
15:47मैं आपका एक व्यक्तित्तो देखता हूँ
15:55जिसमें सच के लिए कुछ लगन है
16:00जिस पर ग्यान का कुछ प्रकाश है
16:03और फिर आप मेरे सामने से हटते हो
16:06अपने घरों में जाते हो
16:10और क्या बन जाते हो
16:14तु मेरे साथ भी धोखा ही कर रहे हो ना
16:18मुझे जो अपना आप शहरा दिखा रहे हो
16:20आप इस से बिलकुल कुछ नीचे गिर के
16:23कुछ और ही बन जाते हो दुनिया वालों के सामने
16:31क्या है ऐसी मजबूरी क्या स्वारत है
16:33कितनी आपको सुविधाई मिल रही है
16:37जिंदगी ऐसी आपको कौन सी बड़ी बड़ी चीजें दे रही है
16:40कि आप से छूड़ी नहीं जा रही हैं सुविधाई
16:44पढ़े लिखे हो, पढ़ाते हो, शिक्षिका हो, युवा हो
16:49बहुत कुछ आपके पक्षमें है
17:06जो यहां अभी चात्र चात्रा बनकर बैठे हुए है
17:11अभी सत्र समाप थो, और कोई बाहर जाके कसाई बन जाए
17:15और कोई कसाई के मासका खरीदार बन जाए
17:23इसलिए आते हो मेरे सामने
17:33तुम मालूम ही यह हुआ है
17:36अभी रिशिकेश में हुआ था
17:41मैं चल रहा होता था, इस बार खूब चला
17:47उधर दूर
17:50लक्षमन जूला के भी पीछे से
17:51वहाँ तो शुरू करता था जहां जिसको बोलते हैं न गोवा बीच
17:55वहाँ तो शुरू करता था और इधर जान की से तुझे आगे आके फिर पार करके और आस्था पत्पे पूरा
18:01दूर तक
18:04और बीच बीच में लोग मिलें
18:07और वो अनाप शनाप, अनरगल हरकतें कर रहे हैं
18:12और मुझे देखते ही मुः फेर लें आई दर अधर कर लें
18:15और मुझे लगे यह देखा देखा चेहरा है
18:18और मैं भी अपने चलने में मगन
18:20तुम्हें कुछ बोलू नहीं
18:25मुझे लगता उन में से बहुत सारे ऐसे थे जो हमारे गीता पतिभागी ही थे
18:43एक तो खासता और परयाद है उधर पुल के पास वो बैठा हुआ था वहां नीचे वो बैठा हुआ था
18:48अपना एक डबा लेकर के जाने वो
18:51संभावना यही है कि जोतिश जैसी वो कोई चीज थी तो वहाँ दो तीन बैठ गए थे
18:58एक पुरुष था दो इस्तरिया थी वो बैठ गए थे
19:01और मैं इधर से आ रहा हूँ तो मुझे देखते ही उन्होंने पहले तो मेरी और देखा
19:06और फिर तुरंद मुँ फेर लिया और सर नीचे जोगा लिया
19:13मैं भी क्यों वहाँ पर कुछ अशिश्टता करूँ क्यों कुछ कहूँ पूछूँ
19:19मैं भी तेजी से आगे बढ़ गया पर आप लोग यही करते हो ना
19:23सत्र में बैटते हो उसके बाद इदर इदर जा करके कहीं भी मुँ मारते हो ना
19:31अच्छा है कि मैं आपकी निची जिन्दगी में जाक्या नहीं देख पाता
19:35बहुत घाव लगेगा मुझको
19:47कैसे तयार हुए थे
19:49बहनों ने भावियों ने आंटीयों ने मौसीयों ने आके बोला ना अब
19:54इसमें ज्यादा तू चटक लगेगी चलिए पहन ले
20:00किसी दीदी ने आकर बोला होगा थोड़ा ज्यादा गहरे गले का पहन ले लड़का पट जाएगा
20:06हुआ होगा ना ये सब
20:09किया है न है
20:17किसी ने सिखाया होगा
20:18कि जब जाना तो थोड़ा शर्माना
20:22किसी ने स्कृप्ट रताई होगी
20:24तो तजूरलवे कारभावीयां होती है
20:30ऐसे बोलना वैसे बोलना
20:32इस बार वाला लड़का अच्छा है
20:34रिल्वे का अफसार है देख मत जाने देना
20:40और यहां मैं तुम्हारे लिए गीता परीक्षा बना रहा हूँ
20:45मैं तुम्हें कैसे देख रहा हूँ
20:47मैं तुम्हारे लिए क्या सोच रहा हूँ
20:50मैं तुम्हारे लिए निकल करके
20:53कहां जा करके लोट जाते हो
21:04और किसी का नहीं तो एक पल के लिए मेरा ही ध्यान कर लिया करो
21:09एक बार को यही विचार कर लिया करो कि मैं होता
21:15तो क्या सोचता, क्या बोलता, कैसा लगता मुझे
21:26जो नए आये हैं उनसे कुछ नहीं कह रहा है जिनके दो ही चार महिने हुए हैं पर जिनके सालों
21:32बीत रहे हैं
21:34उनसे कुछ तो मेरा भी रिष्टा है थोड़ा तो मेरा भी कुछ हक है
21:43तो उसी हक के नाते कह रहा हूँ
21:45बाहर अपने आप को गिराने से पहले
21:50थोड़ा मेरा ख्याल कर लिया करो
21:57कोई और
22:00नया नवेला होता तो मैं उसको समझाता
22:05कि देखो
22:07बेसिक्स से शुरू करते है
22:10मनुष्य क्या होता है
22:12जीव क्या होता है
22:15लिंग क्या होता है
22:17जेंडर क्या होता है
22:18ये सब पहचाने कहां से आती है
22:21अंकार क्या है
22:22चेतना क्या है
22:23कॉंशेसनेस क्या बात है
22:24ये सब बताता पर आपको क्या बता हूँ
22:26मैं यह सब आपको तो यह सब बता चुका हूँ
22:30आप यह सब जानते हो
22:32और जानते बूझते फिर आप जाकर के अपनी नुमाईश लगाते हो
22:44मुझे शरीर से कोई समस्या नहीं है
22:47आप किसी पुरुश के सामने अपना शरीर प्रदर्शित करें
22:51या कोई पुरुश हिस्त्री के सामने मुझे उसमें भी क्या समस्या यह सब तो कर्म है
22:57मुझे मनुश्य को मनुश्य की गरिमा से गिराने में समस्या है
23:04तुम प्रेम के नाते जाकर किसी से गले मिल जाओ
23:08वो भी बाहरी तोर पर शरीरों का यालिंगन है
23:12ठीक है
23:16वो नुमाईश नहीं कहलाएगी
23:25छोटे बच्चे को भी आप प्रेम में उठा लेते हो
23:29और युवा पुरुशिस्त्री भी प्रेम में शारिरिक तोर पर मिल सकते हैं
23:36पर ये सब जो आप अभी बता रहे हो इसमें तो प्रेम कहीं नहीं है
23:41जब प्रेम नहीं है तो शरीर कहां से आगया
23:46जब पूछ रहा हूँ
23:49प्रेम और शरीर का रिष्टा समझते हो क्या होता है
23:54समझो बात को
24:00अहंकार बहुत सारी चीजें अपने पास रखता है
24:04रखता है ना
24:06रखता है ना
24:08उन्हें हम क्या बोलते हैं वो अहंकार के क्या है
24:11विश है आउबजेक्ट
24:14और अहंकार के पास
24:15पहला आउबजेक्ट क्या होता है
24:18चरीर
24:25तो प्रेम और शरीर का रिष्टा ये होता है
24:28कि जैसे प्रेम में अहंकार अपने आपको ही छोड़ देता है
24:33यही परिभाशा है न, मुझे मेरी हस्ती प्यारी नहीं है
24:37अहंकार कह रहा है, मुझे मेरी हस्ती प्यारी नहीं है
24:40मैं खुद को ही छोड़ने को तयार हूँ
24:42तो वैसे ही वो अपने सब अब्जेक्ट्स को जाकर सही जगह पर समर्पित करने लगता है
24:50सही जगह कौन सी?
24:53जो उसको मदद देगी घटने में
24:59ये मेरे पास कलम है
25:03ये कलम मैं उसको दूँगा
25:05ये अब्जेक्ट है मेरा
25:08ये मेरा विशे है, मैं हंकार हूँ, ये मेरा विशे है
25:12ये कलम मैं उसको दूँगा
25:15जो सचमुच मेरा भला गरबाए
25:18और मेरी भलाई किसमे है?
25:20घटने में
25:21ये कलम मैं उसको दूँगा जो घटने में मेरी मदद करे
25:26ठीक इसी तरीके से
25:29मेरा पहला अबजेक्ट क्या है?
25:31ये शरीर भी उसको दूंगी जो घटने में मेरी मदद करे
25:38और अगर वो घटने में मेरी मदद नहीं कर रहा है तो ये शरीर का व्यापार है
25:43ये जिसम फरोशी है, ये लेंदेन है न फिर
25:49इप्रेम तो नहीं है
26:00सारी बात अध्यात में किसकी होती है?
26:02नियत की
26:04आप जा करके अपना शरीर किसी को दे रहे हो
26:07चाहे दे रहे हो, चाहे दिखा रहे हो, कुछ भी
26:12उसके पीछे नियत यही होनी चाहिए
26:20क्या इससे मैं और उठूंगा कि गिरूंगा?
26:28बस यही सवाल है
26:34बात आ रही है समझ में है
26:43ऐसे ही किसी रहा चलते को शरीर नहीं दिखा देते
26:48कि उससे मुझे थोड़ा अटेंशन मिल जाएगा
26:51थोड़ा वो मेरी और ऐसे मुड़के देख लेगा और
27:00भाव मिल जाएगा मुझे को
27:04किसी रहा चलते को ऐसे ही
27:07सो रुपए भी दे देते हो क्या?
27:09उस सो रुपए तो हाथ का अबजेक्ट है
27:12और शरीर क्या है?
27:15पहला अबजेक्ट है
27:16वो तो हंकार का घर ही है
27:19वो हंकार का पहला अबजेक्ट है
27:21जब किसी रहा चलते को सो रुपे भी नहीं दे देते
27:24तो उसको शरीर क्यों दिये दे रहे हो
27:28कैसे ही कोई आएगा तुम उसको शरीर दे दोगे
27:32बात यह नहीं है कि शरीर कीमती है
27:34बात यह है कि उसको शरीर देने से तुम्हें क्या मिला
27:40इतने ही मिला कि उसने तुम्हें अपनी हवस का इंधन बना लिया
27:47कितने ही तो हुआ
27:50उसको शरीर देने से तुम्हें सरलता आ गई, तुम्हें गहराई आ गई, तुम्हें उचाई आ गई
27:59तुम में बोध हा गया
28:00तुम्हारे भ्रम कटे
28:03तुम्हारा मोह मिटा
28:05तुम्हारी बेड़ियां टूटी
28:06कुछ भी हुआ
28:09तुमने शरीर भी दे दिया
28:10और शरीर तुम्हारा पहला अबजेक्ट था
28:12तुमने अपना पहला अबजेक्ट दे दिया
28:17और बदले में क्या मिला इंडिग्निटी
28:24ज्यादातर लोग और क्या करते हैं जैसे कोई तुम्हारे शरीर पे आके थूक गया हो
28:36और तुम उस थूकने को बरदाश्ट कर रहे हो एक के बाद एक इंडिग्निटी सहनते हुए भी बार बार जाकर
28:42बिच भी जाते हो
28:51एक जानवर है बिल्कुल
28:56हवसी जानवर वो तुम्हारे शरीर का उपयोग कुडेदान की तरह कर रहा है वो अपने शरीर का मल आगर तुम्हारे
29:04शरीर के उपर डाल जाता है
29:07वो वैसे ही अपने सामाने शर्णों में भले ही थोड़ा कम जानवर हो
29:14पर हवस के खषण में तो पूरा ही जानवर बन जाता है न और हवस के खषणों में वो जो
29:19पूरा जानवर बना हुआ है वो तुम्हें शरीर पे आगर के और कचड़ा डाल जाता है
29:26तो लो डलवा लिया कचड़ा शरीर को राखी हो जाना एक दिन डबा भी लिया कचड़ा तुम्हें क्या मिला
29:36तुम्हें क्या मिला
29:41तुम्हारे भ्रम नहीं खोए
29:47तुम्हारे बंधन भी नहीं खोए तुम्हारी गर्मा खोगई
29:53और अगली बार तुम और ज्यादा अपने आपको शरीर जैसा ही अनुभाव करोगे
30:00तो धीरे धीरे धीरे ये तुम्हारी पहचान बन जाएगी
30:04दुनिया भर के इस्तरियों की यही पहचान बन गई है
30:06मैं तो शरीर हूँ
30:12क्या है इतनी काम वासना होती है कि
30:14कि किसी जानवर को भी बुला करके शुरू हो जाओगे
30:20दिखराय की वेक्तियायोग यह है
30:23कोई उसमें गहराई हो चाही नहीं कुछ नहीं
30:26और तुम अपने आपको अर्पित कर देते हो बिचे जाते हो
30:38मीरा को नहीं मिलाओगा कोई तो बोली कि
30:44कृष्ण पर्याप्त है
30:46बले ही शरीर रूप में उपस्थित नहीं है तब भी पर्याप्त है
30:50कोई नहीं मिल रहा तो
30:52जाके सिर्मोर मुकुट मेरो पती सोई
31:02समाज का दबाव
31:04और अपने ही शरीर का प्रभाव
31:07हॉर्मोनल वासना इन दोनों में आ करके अपनी गर्मा का सौदा करना बंद करो
31:19ऐसे ही नहीं किसी को हक दे देते कि अंजू पंजू आके तुमारे शरीर पे हाथ लगा जाएगा
31:30ज्यानियों ने इसको मंदिर बोला है किसको शरीर कोई
31:37घट घट में राम अबसत है
31:44कोई भी आता है ऐसे ही जानवर थूक के चला जाता है
31:57और ये बात दोनों लिंगों से कह रहा हूँ
32:01क्योंकि सेक्शोली एग्रेसिव तो महिलाईं भी हो सकती है
32:08वो पुरुशों का शिकार वो भी करती है
32:16क्यों घुसना है तुम्हें इस खेल में
32:21अरे सब कुछ तो करा प्रक्रती नहीं है न उसी ने कराया न पैदा भी उसी ने कर दिया
32:33ये बाल तुम्हारे लंबे तुमने खुद करे खेंच खेंच के
32:40तुम्हारा जो भी कद है तुमने खुद अपने आपको ऐसे खींचा की इतनी लंबी हो जाओ
32:45तुम्हारा खाना तुम कुछ कर रही हो भीतर केमिकल अमिकल डाल के पचा रही हो
32:51सब कुछ जब मा कर ही रही है तो जीवन में अगर विपरीत लिंगा कोई आना होगा
32:58तो वो भी आई जाएगा पचास प्रतिशत आबादी तो दूसरे ही लिंग की है भाई
33:06काहे के लिए इतना अव्याकोल इतना डिस्परेट हो रहे हो
33:11आएगा तो आएगा नहीं आएगा तो नहीं आएगा आएगा इधर वे
33:17I am okay and complete
33:20पूर्णा मदह पूर्णा मिदम
33:22दिस और देट I am okay
33:31हम डिस्परेट नहीं है कि किसी रहा चलते को पकड़ के अपने घर में घुसेड़ लाएं
33:37और हमने दर्वासा बंद भी नहीं कर रखा है
33:41कोई होगा सुयोग्य तो आजाए स्वागत है
33:50जीवन जोड़ी बनाने के लिए नहीं मिला है भाई
33:56तुम पगलाएं रहते हो कि
33:58अरे जोड़ी नहीं बनी तो क्या होगा
34:00और अब तो छटी क्लास से तुम पागल हो जाते हो
34:06हाँ
34:07मिंटल हेल्थ केसे जा रहे हैं
34:11छटी का लड़का है वो उसका भी चाहा कि
34:14वो बोल रहा है सनी टुक अवे माई गर्ल
34:22वो बोल रहे है शी स्टोल माई बॉई
34:29तुम यह सब किसने सिखा दिया कि
34:31तुम्हारी जोड़ी नहीं बनेगी तो तुम अधूरे रह जाओगे
34:37एकदम ही पगला जाते हो
34:41और पचीस-तीस पार करने लगे और जोड़ा नहीं बनाए तो बिलकुल घोड़ा हो जाते हो
34:49तुम आए साथ मरेगा
34:52साथ पैदा हुआ था
34:57मैं साथी बनाने का विरोध नहीं कर रहा हूँ
35:03मैं किसी व्यक्त को जीवन के केंद्र पर रखने पर पुनरविचार करने को कह रहा हूँ
35:10कि मेरा एक जोड़ी दार होना चाहिए
35:13दूसरे सेक्स का और वो
35:17तू मेरी जिंदगी है
35:24ये कॉंसेप्ट कहां से आ गया तुम्हारे भीतर
35:32फिल्मे गंदी फिल्मे
35:39खूब देखा ना राजश्री वाई आर एफ
35:45मीठे मीठे काने
35:51हम एक बार प्यादा होते हैं और एक बार मरते हैं और एक बार प्यार करते हैं
35:56और उपर वाला हमें जोडों में भेचता है
36:01एक दम थू फिलोसिफी
36:10और उस फिलोसिफी
36:12कि तुम कदरदान हो गए, ग्राहक हो गए, बंधक हो गए
36:22लगे हुए हैं कि लड़की मिल जाए, लड़का मिल जाए
36:26अच्छे तुमने क्या क्या खेलना सीखा ये बताओ, दुनिया में इतने स्पोर्ट्स हैं और जो खेलते हैं
36:30उनसे पूछना, कि जब वो खेल रहें और मैच के बीचों बीच हों, उस वक्त कोई आ करके उनके सामने
36:38नगन खड़ा हो जाए
36:39और कहें आओ, मैं मौजूद हूँ, प्रस्तुत हूँ, अभी सेक्स करते हैं, वो अपना गेम नहीं छोड़ेंगे
36:46पर तुमने कभी कोई स्पोर्ट्स भी ठीक से नहीं खेला
36:57क्रिकेट के मैदान, क्रिकेट तो देखते हो न, वह गोसा आती है कई बार, इंग्लेंड या उस्ट्रेलिया वगरा में, साउथ
37:02अफरिका में
37:02वो स्ट्रीकर्स बोलते हैं, उनको नंगी लड़किया भी आ जाती है
37:06बैट्समेर उसको ऐसे बल्ला दिखा दिखा के भगाता है, भगे आसे, भगे आसे
37:10डिस्ट्राम मत कर, क्योंकि अभी तुमने कुछ खेलना भी नहीं सीखा
37:17इसी तरीके से जिन्होंने पढ़ने में कभी जी लगाया हो
37:23उनसे पूछो, कि वहाँ भी जो आनन्द होता है, वो कुछ कम होता है क्या
37:35पर जिन्दगी में आनन्द तो छोड़ दो किसी तरह का अब तुम्हें प्लेजर ही नहीं पता
37:40तो तुम्हें एक ही प्लेजर होता है, वही जो घटिया जो टीवी सॉप्स वगरा में आ जाता है
37:44कि देवरानी, जठानी, लोग-लोगाई, जो हाईयर प्लेजर्स होते हैं लाइफ के, वो तुम्हें पता ही नहीं है
37:56तो तुम इन लोवर प्लेजर्स में ही जानवरों की तरह लोटने को डेस्परेट रहते हो
38:10सीखो स्विमिंग, खेलो वॉलिबॉल
38:14और बुला रहा होगा उस वक्त की आजा, मना कर दोगे
38:24जिन्दगी को कोई उचा मकसद तो दो, मैंने तो अभी बस खेलने और पढ़ने की बात करी
38:30खेलने पढ़ने से उचे और बहुत ज़्यादा मकसद होते हैं, बहुत उचे
38:34और वो मकसद अपने आपको देखकर देखो, कि ये सेक्शूल डिस्परेशन बचता है कि नहीं
38:39सेक्शूल, सोशल, जो भी बोलो, देखकर देखो कि ये से बचता है कि नहीं बचता है, अच्छा मैं ये नहीं
38:45कह रहा है कि उससे तुमारी जो फिजिकल अर्जेज हैं, वो मिट जाएंगी, ना
38:50पर अब तुम किसी गटर के इनसान को सुईकार नहीं कर पाओगे, क्योंकि तुम खुद उचाई पर पहुँच गए हो
39:04अपने आपको उचा बनाओ, तो फिर जिन्दगी में कोई आएगा भी तो उसकी एक उचाई होगी, उचाईयों पर उचे ही
39:12लोग मिलेंगे
39:15अपने आपको उचाईयों पर ले जाने की जगए, 16, 18, 20, 22 के होते नहीं हो, न तुमने जिन्दगी देखी,
39:20न अपने आपको ढ़ाला, न सवारा
39:25न अपने आपको कुछ शिल्प दिया, न आकार दिया, न गढ़ा, न सौंदर रे दिया, और बस लग जाते होगी
39:32किसी कदर से जुड़ा बन जाए
39:44मैं बाहर निकलता हूँ, बहुत बाहर होता है, जोड़े आ रहे होते हैं, मुझे देखके घबरा सजाते हैं, मजाग की
39:57तरह नहीं बोल रहा हूँ,
39:59मैं खुद बचना चाहता हूँ कि बेचारों को असुइधा न हो, कहीं कैफे में जाओंगा तो सबसे कोने वाली हमेशा
40:06टेबल लेके बैठोंगा मूँ छुपा के,
40:10मैं किसी कैफे में या रस्टरों में अगर बीच में बैठ जाओं तो उसका धंदा बंद हो जाएगा,
40:28कि अब न मैं कुछ कर सकता न वो कुछ कर सकते, तुम अपने आपको न सुलजने वाली गाठों में
40:42बांध लेते हो,
40:47और मैं सांतों न दे नहीं सकता कि रुख जाओ, रुख जाओ, वह भी तुम्हारा उपचार हो जाएगा,
40:52तुम अपने आपको ऐसी जगों पर डाल लेते हो, जो पॉइंट ओफ नो रिटर्न है,
40:56विशेश कर महिलाएं,
40:59मैं क्या करूँ?
41:07अभी किसी महिला की मेल आई, जो हमारी प्राइमरी आईडी है, जो हमने वेबसाइट पर भी डिस्पले कर रखी है,
41:16उसमें उसने बताया कि उसके साथ क्या क्या हो रहा है,
41:20फिर उसने लिखा कि मुझे पता भी नहीं चला मेरे पती ने मुझे इंप्रेगनेट कब कर दिया
41:26और मैं जानती थी कि ये नाकाबल आदमी है और मैं कुछ खयाल कर रही थी
41:31और अब मैं देख रही हूँ कि मैं दो मंट्स प्रेगनेंट हूँ
41:34और अब मैं और बात कर रही हूँ इस से और इसके घरवालों से तो बहुत सारी बाते खुल रही
41:39हैं
41:39और मैंने लव मैरिज करी थी घर से भाग कर करी थी
41:43मेरे घरवाले
41:45अब मुझसे बात नहीं करते हैं
41:46और यहां मैं आ गई हूँ तो मुझे दिखाई दे रहा है
41:48कि मैं किस आदमी के साथ
41:50और किस घर में फस गई हूँ
41:53तो उसका
41:56मेल आया संस्था के पास
41:59संस्था न उसको reply दिया
42:03मालूम हमें क्या reply आता है
42:05इस मेल बॉक्स डज नोट एक्जिस्ट
42:11जानते हो इससे प्रॉबिलिटी क्या पता चलती है अब निश्चित रूप से हम नहीं जान सकते है पर संभावना जानते
42:18हो क्या है
42:19इस महिला का मेल आईडी भी उस पुरुष के पास था और वो रेगुलरली इसका मेल
42:27जब उसने देखा गिये मेल इधर आईए मेल आईडी उड़ा दिया
42:36और वो महिला यही सोचती रहेगी कि संसागी और से तो कभी जवाब ही नहीं आया
42:46अब उसका फोटो एल्बम देखना उसका लंबा उसने लिखा था लंबा प्रेम प्रसंग चला है पात साल में उसने
42:52क्या-क्या फोटो खिचाई होंगी क्या-क्या वीडियो बनाए होंगे क्या-क्या उसकी खुशी क्या जजबात चलके होंगे
42:58और फिर ब्याह किया होगा उसका भी अल्बम होगा
43:08क्या खुशिया है
43:15अच्छे बनो
43:18और अच्छा हाथ पकड़ो
43:20और तुम्हारी नियत
43:25अच्छे हाथ की नहीं अच्छा बनने की होनी चाहिए
43:31अच्छे बनो उच्छे बनो
43:34उसके बाद मालिक की मरजी होगी
43:36किसी का हाथ आ गया आ गया नहीं आया
43:38तो हम खुदी अब क्या हो गए
43:40हम खुदी अच्छे हो गए हम खुदी उच्छे हो गए
43:50खुश हैं अपने हमें खुश हैं भाई
43:52तड़प नहीं रहे
43:58अजब तक तुम्हें पता है कि तुम किसी लायक नहीं हो
44:01किसी काबिल नहीं हो
44:03तुम्हें सौत रहे कि दोश और कमजोरियां अपाले सब बैठे हो
44:06तब तक ये जोड़े भाजी में भूल कर भी मत पढ़ना
44:12पढ़ाई पर ध्यान दो, खुद को बनाओ, जिन्दगी को बनाओ
44:15ताकत बढ़ाओ, ग्यान बढ़ाओ, कौशल सीखो
44:21दुनिया देखो
44:24अंडे देने मत लग जाओ जल्दी से कि घोसला बना लिया
44:35आपको खुशी होगी इसनाते, जो हमारी अप है
44:39जिसमें हमारे गीता और बाकी सब कारिकरम चलते हैं
44:42यहाँ पर बुद्ध हैं, गीता हैं, उपनिशद हैं, अश्टावक्र हैं
44:46यह मुझे मिले मेरी जिंदगी बदली, यह तुम्हें मिलेंगे तुम्हारी जिंदगी भी बदलेगी
44:51सच पूछी हो तो मतलब लाखों नहीं, तो कम सकम हजारों जिंदगी हैं जो बिलकुल बदली हैं
44:56दो लाख से अधिक गीता प्रतिभागियों के साथ जुड़े
44:59आचार्य प्रशांत अप पर पहला महीना बिलकुल फ्री, गीता मिशन का पूरा एक्सिस
45:05अप पर आपको मिलेंगे नियमित लाइफ सत्र
45:08हर दिन आचार्य प्रशांत के विशेश समवाद, गीता कम्यूनिटी का एक्सिस, गीता परीक्षा, चैनित समाचार, ओडियो बुक्स, कोट्स और भी
45:19बहुत कुछ
45:20गूगल प्ले स्टोर या एपल एप स्टोर पर आचार्य प्रशांत सर्च करें और अभी दाउनलोड करें
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