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पूरा वीडियो यूट्यूब पर : युवा अब साहित्य को किताबों से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया से जोड़ते हैं – आचार्य प्रशांत

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Transcript
00:00जाद है तर जो अभी साहिते रचा जा रहा है वो बिना किसी गुणवत्ता का है जो एल्गॉरिदम्स हैं वो
00:08आपके आपके अहंकार का जो सबसे निचला तल होता है ना उसकी पसंद को एंप्लिफाई करते हैं ऐसा नहीं है
00:16कि आपको उची चीजें भी पसंद नहीं है लेकि
00:19नेक इंसान के लिए फिसलना हमेशा जादा आसान होता है तो इसी लिए हमारे भी इनर मास का जो कॉंसेंट्रेशन
00:27है वो हमारे निचले तलों की और जादा होता है और अल्गॉरिदम इस तरह लिखा गया है कि जो चीज
00:33आपकी हस्ती में सबसे गिरी हुई होती है वो उसी क
00:37आपके सामने बार-बार लेकर आता है आप खुद भी उसको देखना चाहते थे और अल्गॉरिदम इस तरह रचा गया
00:42है कि वह आपको उसकी लगवा देता है एक तो करेला दूजे नीम चड़ा एक तो आप खुद ही फिसलने
00:51के मरीज थे बार-बार फिसल जाते थे और अल
01:05अल्ग।
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