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00:00हम सभी लोग अपनी जीवन में बहुत बार यह लाइन सुनें
00:02follow your passion
00:03किसी भी middle class family का पहला aim यही होता है
00:06कि हमारी financial needs meet हो
00:08कोई भूखा पेट के आप passion follow करें
00:10यह जो line है क्या यह सिर्फ
00:11society के कुछ privilege sections में लागू होता है
00:14middle class
00:16nightmare है बस एक
00:18जिन लोगों को आप बोलते हो
00:20कि they are living a life
00:22of individual passion
00:23वो और ज्यादा conditioned जिन्दगी जी रहे है
00:26बताओ क्यों
00:27वो आंतरिक जूट यह है कि सहाब मैं तो जिन्दगी
00:30अपने passion अपनी पसंद पर जीता हूँ
00:32मैं तो आजाद पंची हूँ
00:33दिल करेगा तो उधर जाएंगे
00:35दिल करेगा तो उधर जाएंगे
00:36जिसको तुम अपना दिल बोल रहे हूँ
00:45जुक जाना, गिर जाना, लेट जाना, भिक जाना
00:48बिलकुल जरूरी नहीं है
00:50उसके बिना भी
00:52एक करिमा पूर्ण जीवन जिया जा सकता है
00:56और हाँ, भूखे नहीं मरोगे
00:59आप मेंसे जिन लोगों का भी दिल सचमुच धड़कता है
01:03जो गंदा जीवन नहीं जीना चाहते है
01:06आम आत्मी की तरह है
01:08जो सचमुच जवान है, मैं उनसे कह रहा हूँ
01:10इन दो के अलावा कि जीने का कोई तरीका नहीं हो सकता
01:13बिलकुल हो सकता है
01:16उसी को जीवन कहते हैं, उसी को आजादी कहते हैं, उसी को जवानी कहते हैं
01:21बाकी सब तो गर्ब से ही बुढ़े पैदा होते हैं
01:44नहीं है उससी को बाकी को पैदा ही है, उसमें आप ही जानता है कि अधिकतर अधिकतर अधिल इतिल्च लास
01:48फैमिल्य है?
01:49या लोप एक तर अधिल्च फैमिल्य से हूँ
01:52इसलिए है मैं काफी रिलेट करपा रही हूँ
01:53तो, sir, यह जो किसी भी middle class family का पहला aim यही होता है, कि हमारी financial needs meet
01:59हो.
02:00Sir, वही बात है कि कोई भूखा पेट क्या passion follow करें.
02:03तो, sir, मुझे यह लगता है, यह मेरा opinion है कि यह जो line है, क्या यह सिफ society के
02:09कुछ privilege sections में लग होता है,
02:11जो financially अच्छे हैं, कि अगर वो कुछ काम किये, क्योंकि, sir, इतना competition है, कोई भी काम करें, बहुत
02:17जादा चांस है कि हम fail हो सकते हैं.
02:19तो, अगर वो काम किया और नहीं चला, तो उनके पास तो financial backup है,
02:22जो हम जैसे लो, मैं तो middle class families है, उनका तो, sir, फिर अगर वो ऐसा नहीं अच्छा work
02:28हिया,
02:29तो, sir, उनका तो काफे नुकसान है, तो, sir, मेरा सवाल यह है क्या यह लाइन सब पे लागू नहीं
02:34होता है, कि follow your passion.
02:38इसमें दो-तीन जुड़े हुए मुद्दे हैं, आवाज आ रही है, साफ?
02:44इसमें दो-तीन जुड़े हुए मुद्दे हैं, कि passion चीज क्या है, और दूसरी बात कि अगर हम passion को
02:53follow करेंगे,
02:55तो फिर livelihood का, और sustainability का, जो madhyam वरगी aspirations होती है, उनका क्या होगा?
03:05और जो में security चाहिए होती है, माबाप का, जो समाज का, जो दबाव होता है, उसका क्या होगा?
03:13देखिए, आम तौर पर हम दो हिस्से करना चाहते हैं, एक वो जो अपना passion follow नहीं करते, और एक
03:25वो जो अपना passion follow करते हैं, ठीक है न?
03:33और ऐसे जब हम दो खाचे बना देते हैं, तो हमें सुविधासी लगती है, और हमें लगता है कि हमने
03:40बात को समझ लिया, निप्टा दिया, कि दो तरह के लोग हैं, इधर जितने ये बाएवाले हैं, ये लोग अपना
03:47passion follow नहीं करते, ये समाज के दबाव में चलते हैं, और �
03:51इधर वाले हैं, दाएवाले, ये संखिया में थोड़े कम हैं, ये लोग अपना passion हो गया रहां, फॉलो करते हैं,
03:57ऐसा है नहीं, passion माने क्या, ज्यादा तर आप जिसको कहते हो समाज के दबाव में चलना, वो इतना हैं
04:12कि समाज आपके बाहर खड़ा था, बिलकुल स्पष्�
04:17प्रत्यक्ष था, दिखाई दे रहा था कि दबाव बाहर से आ रहा है, तो आपको सुईकार ना पड़ा कि हां
04:27मैं किसी के दबाव के आगे जूग गई, क्योंकि जो आपके उपर pressure या दबाव बनारा हे, आपको धुक्का दे
04:36रहा है, आपसे कह जह रहाँ हैं, नहीं इसी द
04:47जो की दिखाई दे रहा है कि वो रहा वो इंसान.
04:50आपको उसकी शकल देख रही है, आपको उसका नाम देख रहा है.
04:53या वो रहा �Лड़र मेंद भर कर देपाटमेंट या वो रहा है 1600ुट ज़हां से मेरे उपर दबाव आ रहा
05:00है.
05:01जब बात इतनी visible होती है, प्रत्यक्ष होती है
05:05तब तो आप कह देते हो कि मैं दबाव में आ गई
05:08मैंने दूसरों के दबाव में आ करके अपने जीवन के निड़े ले लिए
05:12क्योंकि तब वहां बात undeniable हो जाती है
05:17undeniable माने कि अब उसको न ठुकरा सकते
05:21ना उससे बहस कर सकते ना कोई प्रतिवाद कर सकते
05:25अंडेनायबल हो गई बात
05:27ये दोनों थे ये दोनों मुझे दबाव बना रहे थे
05:29ये दोनों मुझे दबाव बना रहे थे
05:31और मुझे दिख रहा था ये दोनों है ये दो बाहरी जीव है
05:33ये दोनों चड़ बैठे मेरे उपर, ठीक है, मान लो कि इनकी उम्र जादा है, ठीक है, मान लो कि
05:39अभी मैं आप हूँ, मेरी उम्र है 20s में और इन दोनों की उम्र है 50s में, या 40s में,
05:45तो इन दोनों ने दबाव बना दिया, तो अब तो मैं कैसे कहूंगा कि मैं अपने passion पर �
05:50चल रहा हूँ, अब तो मुझे मानना पड़ेगा ना कि कोई और आ गया और मेरी जिन्दगी पर छा गया,
05:54और उसके दबाव में मैं अपने अप सारे फैसले ले रही हूं, पढ़ाई के, केरियर के, जिन्दगी के, जो भी
06:00फैसले, तो इनको तो हम कह देते हैं, कि जो इस त
06:17पर चल रहा है, यह प्रेशर पर चलते हैं, तो यह तो हम को देप्रेशर वादी हैं, कुछ इन से
06:22छिटक करके हमने कहा हैं, यह दाएं और खड़ें, उनको हम कहते हैं, यह अपने पैशन पर चल रहा है,
06:27यह पैशन, शब्द थोड़ा सा असपष्ट है, इसलिए गड़ब�
06:37बनाओ बनाएं तो दिख जाता है बात विजिबिलिटी की है अब यही दोनों अगर किसी तरीके से एक सुक्ष्म रूप
06:48धरके शब्द रूप ले करके माननेता का रूप ले करके धारण का रूप ले करके एक सटल फॉर्म ले करके
06:56मेरे खोपड़े के अंदर बैठ जाएं औ
07:00और वहां से मुझे यह संचालित करने लगें, कॉंट्रोल करने लगें तो अब मुझे यह कहने का एक नकली अधिकार
07:11मिल गया है कि मैं बाहर के किसी प्रेशर को सुईकार नहीं करता क्योंकि बाहर कोई नहीं है जो मेरे
07:18उपर दबाव बना रहा है बाहर से कोई नहीं मेरे �
07:24अब बाहर से अपनी जगे चोड़के कहां बैठ गया है यहां बैठ गया है जैसे आपके ब्रेन में एक चिप
07:32इंप्लांट कर दी गई हो बहुत छोटी सी चिप है और आपको एनस्थाइस करके किया गया यह सब आपको पता
07:40भी नहीं चला कि आपके दिमाग में कब एक चि�
07:54चलती हूं साब मैं अपने पैशन पर चलती हूं यह जो बाएवाले थे यह बिकार लोग थे यह दबाव में
08:01आ जाते थे यह कायर थे और कमजोर थे यह तो प्रिशर में आ गए मैं किसी के प्रिशर में
08:06नहीं आती मैं तो अपने पैशन पर चलती हूं पर तुम्हारा यह प
08:12पैशन कुछ नहीं है जो बाहरी तमाम तरीके के दबाव हैं, बाहरी संस्कार है, बाहरी चालचलन है, वही तुम्हारे भीतर
08:28बनकर बैठ गया है और उसको तुम अपना पैशन बोल रहे हो, जबकि उसमें तुम्हारा अपना कुछ नहीं है, बड़ा
08:36एक सिधा उधारण है, �
08:38बहुत बाहर लेता हूँ, और अलग अलग तरीकों से वह उपियोगी हो जाता है, भी ले लो, पता नहीं कितने
08:44लोगों का हिंदुस्तान में पैशन होगा क्रिकेट, पता नहीं कितने लोगों का पैशन होगा क्रिकेट, तुम्हारा यही पैशन होता क्या,
08:55अगर तुम अर�
09:06है या कर अब मेरे कि पैदा हुए है कि यार्जेंटीश में पैदा हुए है कि क्रिकेट आपका पैशन होता
09:14क्या okay
09:15कि पर फिर उतना ही जांसेज जितना ये चांसेई आप शट्रीय गड़ में और ऐस आपका पैशन है
09:26तो ये भी मत भोलो कि कम chances हैं, कम chances नहीं है, chance tending to zero
09:34लेकिन आज आप जान देने को तयार हो जाते हो, मेरा passion है cricket, मेरा passion है cricket
09:39मैं कहीं पढ़ रहा था कि भारत में हर साल कुछ न कुछ मौतें होती हैं cricket से जुड़े मुद्दों
09:50को लेकर
09:50कुछ इस बात पर होती हैं कि कहीं महला स्तर पर कुछ लड़के खेल रहे थे और उनमें रड़ाई हो
09:56गई
09:56तो एक दूसरे हो किसी ने विकेट मार दिया, बला मार दिया, उमर गया
09:59और कुछ मौतें ऐसी होती हैं कि साब मैच देख रहे थे, आपकी टीम हार गई तो बुजर्ग थे, उनको
10:05हार अट अटाइक आ गया
10:07और कुछ ऐसे होती हैं कि मैच था, मैच में आपकी टीम हार गई तो आपने जा करके महले में
10:14दंगे कर दिये
10:15तो उसमें किसी की मौत हो गई, हमारा इतना भारी पैशन है कि हम उसके लिए मरने मारने को तयार
10:23हैं
10:23हर साल हिंदोस्तान में एक finite number of deaths होती हैं क्रिकेट को ले करके क्योंकि वो हमारा passion है
10:31वो आ कहां से गया तुम में, तुम्हारा है क्या सच मुछ
10:34हम उनकी तो बात ही नहीं कर रहे हैं जो pressure पर चले जिन्दगी में
10:38हम उनकी तो बात ही नहीं कर रहे हैं जिन्होंने बाहरी दबाव के आगे घुटने टेक दिये
10:42हम उनकी बात कर रहे हैं जो अपने आपको आजाद और स्वाधीन बोलते हैं
10:47और बोलते हैं मैं तो जिंदगी अपने हिसाब से चलाऊंगा
10:49मुझे तो अपने passion को साकार करना है तुम्हारा passion तुम्हारा है क्या तुम्हारा passion के
10:56सचमुष है या वो भी एक बाहरी हवा है जो तुम्हारे भीतर प्रवेश कर गई
11:04बस बाहरी प्रभाव हैं, ट्रेंड हैं, संसकार हैं, जो तुमने सोख लिये हैं और तुम बेहोश थे, तुम्हें पता भी
11:12नहीं चला, कि तुमने कब उन बाहरी प्रभावों को ही मेरी पसंद का नाम दे दिया,
11:21तुमने कह दिया, यह तो मेरी पसंद है, मेरा पैशन है, मेरा मत है, मेरा ओपीनियन है, मेरी बात है,
11:30साब मेरा ऐसा मानना है, तुम्हारा ऐसा मानना नहीं है, तुम्हारे चारों और लोग उसी तरह मान रहे थे, वही
11:36बात तुम्हारे अंदर भी घुज गई, तुम्हारा अ
11:49में बीती ही बीती है उसके ऊपर तो प्रभावों का ठपा पड़ा ही पड़ा हुआ है लेकिन जिन लोगों को
11:58आप बोलते हो कि
11:59दे आर लिविंग अलाइफ ऑफ इंडिविजुवल पैशन वो शायद और ज्यादा प्रभावेत और संस्कारित है वो और ज्यादा
12:09कंडिशन जिंदगी जी रहे हैं बताओ क्यों क्यों कि यह जो बाएवाले हैं इनको कम से कम दिखतो रहा है
12:17कि इनके बाहर खड़े होकर दो लोग इन पर दबाव बना रहे हैं अच्छा रहे हैं तो भी जूट नहीं
12:23बोल सकते यह दो जने हैं यह चड़े हुए मेरे उपर मैं
12:27जूट नहीं बोल सकता कि मैं आजाद हूँ मुझे दिख रहा है कि यह दो मूर्तियां यह दो जीव यह
12:33प्राणी यह चड़े आ रहे हैं मेरे उपर अब मैं जूट कैसे बोल दूँ मैं किसको बेवकूफ बनाऊं कि मैं
12:39आजाद हूँ यह तो लेकिन यह जो पैशन वादी ह
12:44होते हैं अब इनके उपर कोई बहास या तो आनी रहा चड़ने तो इनको एक आंतरिक जूट बोलने का लाइसेंस
12:52मिल जाता है वो आंतरिक जूट यह है कि सहाब मैं तो जिन्दगी अपने पैशन अपनी पसंद पर जीता हूँ
12:59मैं तो आजाद पंची हूँ दिल करेगा तो
13:03उधर जाएंगे दिल करेगा तो उधर जाएंगे जिसको तुम अपना दिल बोल रहे है वो एक चिप है जिसको तुम
13:10अपना दिल बोल रहे है वो एक चिप है जो समाज समय संयोग संसकार ने तुम्हारे भीतर स्थापित कर दिया
13:17इंप्लांट कर दिया तुम्हारा दिल त�
13:32मेरी पसंद, मेरा मानना, मेरी धारणा,
13:35मेरा विश्वास, मेरी आस्था,
13:36मेरा प्यार, इसमें से कुछ भी तुम्हारा नहीं है.
13:40तो वो तो जो बात थी ना,
13:42कि अपना पैशन कैसे फॉलो करें,
13:44वो बात तो यहीं खत्म हो जाती है.
13:47लेकिन अब बात
13:48खत्म हो करके,
13:50एक अगले चरण में प्रवेश कर जाती है.
13:54बात एक तल पर खत्म होई है,
13:56और वो एक दूसरे तल पर जन्म ले लेती है.
13:59अब वो दूसरा तल क्या है?
14:01तो क्या इनके अलावा और इनके अलावा
14:04जीने का और कोई तरीका नहीं है?
14:08यह है प्रकट प्रेशर की लाइफ
14:13जहां आपके उपर जो दबाव है और जो बंधन है,
14:16वो प्रकट है, प्रत्यक्ष है.
14:19और यह है अप्रकट, परोक्ष, इनडाइरेक्ट,
14:25प्रच्छन प्रेशर की लाइफ,
14:27जिसको आप बोलते हो पैशन की लाइफ,
14:29यहां में क्या हूँ, यहां में एक डाइरेक्ट प्रिजनर हूँ, और यहां में क्या हूँ, प्रिजनर यहां भी उपर इंडाइरेक्ट
14:38ली हूँ, यहां मेरे उपर डाइरेक्ट प्रिशर है, यहां मेरे उपर इंडाइरेक्ट प्रिशर है, गुलामी इधर भी है, बस इतना
14:50है कि यहां की गुलामी स्पष्ट है और अंडेनाइबल है नकारी नहीं जा सकते और यहां की
14:58गुलामी आजादी का रूप रखकर सामने आ जाती है मैं जवान हूं मैं आजाद हूं मैं किसी की नहीं
15:03सुनती कोई मेरे उपर आये नहीं कोई मुझे रोके नहीं कोई मुझे टोके नहीं मैं चाहे जो करूं मेरी मर्जी
15:10तुम्हारी अपनी कोई मर्जी है ही नहीं तुम्हारी सारी मर्जियां सामाजिक और सायोगिक है बात आ रही है तो बात
15:20खत्म हो गई इस तल पर तो क्या जी�
15:33छुप छुप कर गुलामी करो, इन दो के अलावा कि जीने का कोई तरीका नहीं हो सकता, बिलकुल हो सकता
15:38है, और वही जीने का तरीका है, उसी को जीवन कहते हैं, उसी को आजादी कहते हैं, उसी को जवानी
15:46कहते हैं, बाकी सब तो गर्ब से ही बुढ़े पैदा होते हैं, बात
16:03पहले जैसा ही है बस यहां डाइरेक्ट है यहां इंडाइरेक्ट है तो दूसरे से आगे बढ़कर अब हम तीसरे पर
16:10जाते हैं तीसरे तरह का क्या कोई जीवन हो सकता है हां हो सकता है वो तीसरा जीवन वो है
16:16जिसमें ना आप बाहर से गुलाम है ना आप खुद के गुलाम है
16:21जिसमें न तो आप संसार के गुलाम है न अहंकार के गुलाम है
16:28जिसमें न तो आपके उपर समाज बाहर से चड़ा हुआ है
16:32और न वो संसकार बनकर आपके उपर बीतर से चड़ा हुआ है
16:40देखो बाहर वाले आपके उपर दो तरह से शासन करते हैं
16:45एक तो यह कि बाहर से शासन कर लें आपकी कनपटी पर रख दी बंदूक जो तुमसे कहा जा रहा
16:53है वो करो इसे कहते हैं बाहर से शासन करना कनपटी पर बंदूक रख दी या कि आपको लालश दिखा
16:59दिया बाहर से यह होता है आप पर बाहर से शासन करना और दूसरा होता है
17:03कि बाहर से तो आपको आजाज छोड़ दिया
17:05पर आपके भीतर घुस करके आप पर भीतर से शासन कर रहे हैं
17:10हमें ये दोनों ही संभावनाई नहीं चाहिए हम इने खारिज करते हैं
17:17हम एक तीसरी संभावना से प्यार करते हैं
17:21और तीसरी संभावना है न मैं बाहर से गुलाम रहूंगा न भीतर से और इन दोनों में ज्यादा खतरनाक गुलामी
17:30कौन सी है बाहर वाली या भीतर वाली बोलो बाहर वाली या भीतर वाली
17:38बाहर से तो गुलाम नहीं ही रहूंगा भी आजाद देश है और बड़ा खुबसूरत सम्विधान है और तमाम तरह के
17:47हमको अधिकार मिले हुए है तो बाहर से तो वैसे भी कोई हम पर राज करी नहीं सकता आप एडल्ड्स
17:52हैं कानूरन किसी को हक नहीं कि वो आप पर बाहर से
17:57शासन करें लेकिन सम्विधान आपको नहीं रोक सकता आपका अपना ही गुलाम बन जाने से
18:10सम्विधान इतना तो कर सकता है कि दूसरे आपका शोषण ना करें
18:16यह सम्विधान तै कर देता है कि दूसरा आपका शोषण नहीं कर सकता
18:21पर आप खुद ही अपना शोषण ना करें सम्विधान यह नहीं तै कर सकता
18:25आप खुद ही अपना शोषण करने को उतारू हो तो समविधान बिचारा क्या करेगा।
18:30हम इन दोनों ही बातों खारिज करते हैं, हम वो व्यक्ति बनना चाहते हैं,
18:35जो खुद को इतना जानता है कि अगर अपने भीतर किसी अपरिचित को शोषण को बैठे देखता है तो पकड़
18:46लेता है, कहता है ये मैं नहीं हूँ।
18:51अगर मेरा शोषण मुझसे बाहर बैठा है तब तो मैं उसे पहचान ही लूँगा।
18:56पर मैं अपने आपको इतने ध्यान से देखा करता हूँ कि अगर मेरा शोषण मेरे भीतर भी आकर बैठ गया
19:04है तो मैं उसको भीतर भी पहचान लूँगा।
19:07मेरी आखें सिर्फ दुनिया कोई नहीं देखती हैं कि कौन मेरा दुश्मन, कौन मेरा दोस्त, कौन आ रहा है मुझ
19:13पर कबजा करने के लिए
19:15मेरी आखें सिर्फ दुनिया कोई नहीं देख रही है, मेरी आखें दरपन भी देख रही है
19:21और जब मेरी आँखें दर्पण को देखती हैं तो उसमें वो यह देख लेती हैं कि कहीं मेरा शोशक मेरा
19:26दुश्मन मेरे भीतर ही तो नहीं बैठा हुआ है
19:30और जब आप बाहर और भीतर दोनों तरफ से आजाद हो जाते हो तब आप से स्वतर सही कर्म उठता
19:43है फूटता है अब उसको नियंत्रित नहीं करा जा सकता रोका नहीं जा सकता
19:50और तब आप यह सवाल पूछना भूल जाते हो कि अब मेरी रोजी रोटी कैसे चलेगी लाइवली हुट का क्या
19:56होगा फिर यह सवाल गायब हो जाता है
20:00क्योंकि अब आप वही कर रहे हो जो आपको करना है कोई विकल्प है ही नहीं अब ऐसा नहीं है
20:06कि मेरे पास चार जॉब ओफर्स हैं मैं इसमें से किसको एक्सेप्ट करूँ
20:12अब सौफ्ट्वर में चली जाओं कि MBA करने चली जाओं कि पापा की बिजनेस में चली जाओं अब यह सब
20:18कुछ नहीं है
20:22अब भीतर स्पष्टता इतनी है आईने को हमने इतने अनुशासन के साथ देखा है और इतनी इमानदारी के साथ
20:31कि पाँच-दस तरह के विकल्प हमें उठते ही नहीं अब क्लारिटी है निर्विकल्पता है चॉइसलिसनेस है
20:40एक काम है और वो होकर रहेगा क्या वो काम करते समय हमने ये पहले से तै करा था गणना
20:50करी थी कैल्कुलेट करा था
20:52कि इसमें पैसे कितने मिलेंगे केरियर सक्सेस कितनी मिलेगी नहीं करा था
20:57तो इसका क्या मतलब है कि सही काम करने में कैदियर खराब हो जाएगा, भूखे मरोगे, गरीब जीओगे, नहीं बिलकुल
21:06भी नहीं, क्योंकि जो सही काम होता है उसके साथ दो चीज़ें जुड़ जाती है, पहला उसमें आप प्रण प्रान
21:18से उतरते हो तो एक्सिलेंस उसमे
21:20आती ही आती है, क्योंकि अब वो काम आत्मिक है, वास्ताव में आपका अपना है, और दूसरी बात, चुकि वो
21:30काम अब स्वार्थ के इंदरित नहीं है, आत्मिक तो है, आत्मिक तो है, पर स्वार्थ से नहीं आ रहा है,
21:40तो इसलिए उसकी एक जेनरल वैल्यू भी होती है,
21:46उसकी एक social value भी होती है
21:50कोई काम आप सिर्फ अपने लिए करो
21:53तो उसके लिए कोई आपको पैसे क्यों देगा
21:55मैं ये पानी पी रहा हूँ
21:58ये कर्म था
21:59इस कर्म के आप मुझे पैसे नहीं देंगे
22:02क्योंकि ये काम मैंने सिर्फ अपने लिए करा है
22:05पर जो काम
22:07पूरे तरीके से अंतरिक आजादी के साथ करा जाता है
22:12वो दूसरों के भी काम आता है
22:15और दूसरों को आजादी का संदेश दे जाता है
22:19तो उसके लिए दूसरे आपको
22:23इतना पैसा सहर्श दे देंगे
22:26कि आपकी जिन्दगी मजे में चलती रहे
22:30आपको पैसों की कमी नहीं पड़ेगी और मैं आपको ये आश्वासन नहीं दे रहा हूंगे आप करोड़पती हो जाएंगे पर
22:36फिर जो आत्मिक जीवन जीता है करोड़पती होना उसका मनसूबा होता भी नहीं है ऐसा नहीं कि करोड़पती हो नहीं
22:44सकता पर लक्षे बनाकर
22:46करोलपती नहीं होता वो हो गया तो हो गया नहीं हुआ तो नहीं हुआ हाँ एक चीज पक्की है भूखे
22:51नहीं मरोगे जो सही जिंदगी जी रहा है तुरुथ फुल लाइफ दॉथेंटिक लाइफ वो इस डर के पार निकल जाता
23:01है कि उसको रोटी के लाले पड़ जाएंगे �
23:05और रोटी के लाले उसको कभी पड़ते भी नहीं है तो यह जो मिडल क्लास स्फियर आपके भीतर बैठाया जाता
23:12है न कि अरे तु क्या करेगी वेरोजगार रह जाएगी दुनिया में सबसे पीछे रह जाएगी खाने पहनने को भी
23:21नहीं होगा तेरे पास यह जूठी बात
23:23है और इसी जूठी बात को न मानने को श्रद्धा कहते हैं श्रद्धा का मतलब यहीं होता है कि अगर
23:32सही और सच्चा जीवन जी रही हूं तो भूखी नहीं मरने वाली
23:38क्या होगा कैसे होगा हमें पता नहीं पर कुछ हो जाएगा पैदा हुए हैं तो प्रकृति ने ये शर्द थोड़ी
23:47रखी थी कि पैदा हुए हो तो नकली जिन्दगी जीओगे तब ही जी पाओगे पैदा हुए हैं सच्ची जिन्दगी जीएंगे
23:53कुछ न कुछ इंतजाम
23:55हो जाएगा जैसे पैदा हुए थे वैसे ही जी भी लेंगे और अगर नकली जिन्दगी जी कर ही जीवन काटा
24:03जा सकता है तो इसका मतलब यह है कि जन्म लेने की शर्त ही यह है कि गुलामी में जीओ
24:09और नकली हो करके जीओ नहीं तो जीओ ही मत ऐसी कोई शर्त हो नहीं सकती है
24:22आप में से जिन लोगों का भी दिल सचमुछ धड़कता है, जो गंडा जीवन नहीं जीना चाहते हैं, आम आदमी
24:31की तरह,
24:33जो बस पेट और परिवार पालने के लिए अपने आपको बेश नहीं देना चाहते, जो सचमुछ जवान हैं मैं उनसे
24:43कह रहा हूँ, जुक जाना, गिर जाना, लेट जाना, बिक जाना बिलकुल जरूरी नहीं है, उसके बिना भी एक कर्मा
24:54पूर्ण जीवन जिया जा सकता है,
24:56और हाँ, भूखे नहीं मरोगे, यकीन करो, भूखे नहीं मरोगे, हाँ, तुम्हारे विदेशों में बसने के सपने हो, और प्राइवेट
25:10जेट उडाने के सपने हो, तो उनकी कोई गारंटी नहीं, पर एक अच्छा, शान्त, सुन्दर, और गर्मा पूर्ण जीवन, डिग
25:25बिमानी करें, बिल्कुल जी सकते हो, बिना जुके, बिना घुटनों पर आए, बिना अपनी बोली लगवाए, यह डर भीतर से
25:38एकदम निकाल दो, कि जीने के लिए बिकना ज़रूरी है, बिल्कुल भी नहीं है, बिल्कुल भी नहीं, बड़े-बडे खरीदार
25:46खड़े हो,
25:46तो भी मत बिकना और बड़े बड़े बाहु बली खड़े ओ तो भी मत जुकना एकदम जरूरी नहीं है कुछ
25:53नहीं बिगड़ेगा तुम्हारा बलकि शान से जीओगे मौज में जीओगे और ये भी हो सकता है कि ये जो बिके
26:00हुए लोग है जो पैसे के लिए और सुरक्षा क
26:02के लिए बिके है पता चले कि किसी बिंदू पर तुम्हारे पास पैसे भी इन से जाधा ही निकले ये
26:08भी हो सकता है
26:14बात आ रहे है समझ में मिडल क्लास नाइट मेर है बस एक
26:24एक मिडल क्लास वहम है कि जो बंधे बंधाय सुरक्षित रास्ते उसी पर चलो खासकर अगर लड़की हो तब तो
26:34हाइवे को बिलकुल मत छोड़ना किनी पक डेंडियों पर मत उतरना लड़की उड़की कुछ नहीं हो इंसानों पहले अपनी जिंदगी
26:42देखो
26:45बात आ रही है समझ में मस्त जीओगे खुलकर जीओगे और जितनी जरूरतें हैं वाजिब जरूरतें सही जरूरतें उन सही
26:58जरूरतों के लिए परियाप्त पैसा भी रहेगा बिकना मत डरना मत ठीक है
27:13आपको खुशी होगी इसनाते जो हमारी अपनी एप है जिसमें हमारे गीता और बाकी सब कारिकरम चलते हैं
27:20यहाँ पर बुद्ध हैं गीता हैं उपनिशद हैं अश्टावक्र हैं यह मुझे मिले मेरी जिंदगी बदली यह तुम्हें मिलेंगे तुम्हारी
27:27जिंदगी भी बदलेगी
27:28सच पूछी हो तो मतलब लाखों नहीं तो कम सकम हजारों जिंदगी आतो हैं जो बिलकुल बदली हैं
27:58के स्टोर या एपल एप स्टोर पर आचारिय प्रशान सर्च करें और अभी दाउनलोड करें
28:07नमश्कार आचारे जी की सुथ्रों को सुनने के बाद दुम से जुणने के बाद
28:10मैंने अपनी जिवन की बहुत � Вас अच्छी और बड़िया बाते सिखी
28:14मैंने जिंदगी को उड़ान देना सिखा
28:16जब मैं अकेले ट्रवल करने से डरती थी
28:19आचारे जी के सत्रों को सुनने के बाद मैं पूरी इंडिया में जहां मुझे जाने का मन करता है
28:24मैं अकेले ट्रवल करती हूँ दिन हो या रात मैं डरती नहीं
28:28ये हिम्मत मेरे अंदर सिर्फ आचारे जी की वज़े से आई है
28:31और मैं चाहती हूँ कि मैं मेरे जीवन के जितने भी सपने है वो बहुत जल्दी पूरी कर लो
28:36क्यांकि जिन्दगी बहुत चोटी सी है इसको जी के और हसके निकालना चाहती है
28:40गीता सुत्र को जब मैंने यूट्यूब पे सुना, अचारी जी को जब मैंने यूट्यूब पे सुना, उसमें और जो उनका
28:47लाइफ सेशन मैंने देखा, उसमें बहुत अंतर है, उससे हम लोग को ये सिक्षा मिली कि हमें ये सुनना चाहिए,
28:53ये हमारे लिए बहुत सही है औ
29:08आप सब भी वीता शत्र से जुड़ें और अचारे जी को अपने साथ जोड़ के रखें, थैंक यू
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