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Bakra Eid से पहले आने वाला Yawm-e-Arafah यानी 9 ज़िलहिज्जा का रोज़ा इस्लाम में बेहद फज़ीलत वाला माना जाता है। इस वीडियो में जानिए अरफा का रोज़ा 2026 किस तारीख को रखा जाएगा, Bakra Eid से पहले कितने रोज़े रखने चाहिए, और Quran, Hadith व उलेमा-ए-कराम के अनुसार इसकी क्या अहमियत है। आसान हिंदी में पूरी जानकारी।

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00:02हर साल इदुलधा यानी बक्राइच से पहले सोशल मीडिया पर एक सवाल बहुत पुछा जाता है क्या जिलहिज्जा के दस
00:08दिनों में रोजा रखना जरूरी है? कितने रोजे रखने चाहिए? क्या सिर्फ नौवा रोजा यानी यौमे अरफा रखना काफी है
00:15और अगर कोई �
00:15पूरे नौ दिन ना रख पाए तो क्या होगा? आज की इस वीडियो में हम कुरान हदीस और उल्म एकराम
00:20की राए के हिसाब से
00:22बगराईस से पहले इसलामी कलेंडर का आखरी महीना आता है जिलहिज्जा इस महीने के पहले दस दिन इसलामे बहुत मुबारक
00:28माने गए हैं कुरान में भी इन दिनों की एहमियत की तरफ इशारा मिलता है कई मुफस्सिरीन के मताबिक सूरह
00:34अल-फजर में जिन दस रातों क
00:36जिक्र है वो जिलहिज्जा की पहली दस राते हैं अब सबसे जरूरी सवाल क्या पूरे दस रोजे रखना फर्ज है
00:43जवाब है नहीं उलिमा एकराम के मताबिक ये रोजे नफल यानि वॉलिंटरी रोजे होते हैं इनको रखना बहुत सवाब का
00:50काम माना गया है लेकिन ये �
00:51फर्ज या जरूरी नहीं यानि अगर कोई ना रख पाए तो उस पर गुना नहीं होगा बहुत से लोग समझते
00:57हैं कि पूरे दस दिन रोजे रखने होते हैं लेकिन असल में इदुलदा वाले दिन रोजा रखना हराम माना गया
01:02है इसलिए रोजे एक जिलहिज्जा से लेकर
01:04नौ जिलहिज्जा तक रखे जाते हैं यानि कुल नौ रोजे लेकिन अगर कोई पूरे ना रख पाए तो सिर्फ नौवा
01:09रोजा यानि यौम अरफा का रोजा रखना भी बहुत अफजल माना गया है
01:14हदीस में आता है कि यौम अरफा यानि नौ जिलहिज्जा का रोजा पिछले और आने वाले एक साल के गुनाहों
01:19का कफारा बन सकता है
01:20ये हदीस सही मुसलिम में मिलती है इसलिए दुनिया भर के मुसल्मान इस रोजे को बहुत एहम मानते हैं
01:25इंतिहान रहे जो लोग हज पर आरफा में मौजूद होते हैं उनके लिए रोजा ना रखना बहतर माना गया है
01:31ताकि वो इबादत में कमजोरी महसूस ना करें
01:34कुरान में सीधे तोर पर जिलहिज्जा के इन रोजों को फर्ज नहीं बताया गया लेकिन हदीस और उलिमा की टीचिंग्स
01:39में इन दिनों की अबादत को बहुत फजीलत वाला बताया गया है
01:42एक हदीस में आता है कि अल्ला को इन दस दिनों में की गई नेकियां बहुत पसंद है इसलिए रोजा
01:48तजबी तकदीर सदका नमाज इन सब की एहमियत बढ़ जाती है
01:52अगर आप इंडिया में हैं और बकराईद 28 माई को मनाई जा रही है तो यौम अरफा का रोजा 27
01:56माई को रखा जाए
01:57इसलाम में नौ जिलहिज्जा यानि यौम अरफा, दस जिलहिज्जा, एदुल, अधा, यानि एद से एक दिन पहले अरफा का रोजा
02:03रखा जाता है
02:04एक अधिस में आता है कि अल्ला को इन दस दिनों में की गई नेकें बहुत पसंदें इसलिए रोजा, तजबी,
02:10तकबीर, सद्का, नमाज इन सब की एहमियत बढ़ जाती है
02:13अगर किसी की तबियत खराब हो, काम बहुत मुश्किल हो या कोई और मजबूरी हो तो रोजा ना रखना भी
02:18कोई गुना नहीं है
02:19इसलाम असानी का दीन है लेकिन इन दिनों में जिक्र, दुआ, नमाज, सद्का इन चीज़ों पर ध्यान देना चाहिए
02:24कई बड़े उलेमा अकराम का कहना है कि जिलहज़ा के पहले नौ दिनों के रोजे रखना बहुत अच्छा आमल है
02:29लेकिन सबसे ज्यादा जोल नौ जिलहज़ा यानि यौम अरिफा के रोजे पर दिया जाता है
02:53झाल
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