00:02हर साल इदुलधा यानी बक्राइच से पहले सोशल मीडिया पर एक सवाल बहुत पुछा जाता है क्या जिलहिज्जा के दस
00:08दिनों में रोजा रखना जरूरी है? कितने रोजे रखने चाहिए? क्या सिर्फ नौवा रोजा यानी यौमे अरफा रखना काफी है
00:15और अगर कोई �
00:15पूरे नौ दिन ना रख पाए तो क्या होगा? आज की इस वीडियो में हम कुरान हदीस और उल्म एकराम
00:20की राए के हिसाब से
00:22बगराईस से पहले इसलामी कलेंडर का आखरी महीना आता है जिलहिज्जा इस महीने के पहले दस दिन इसलामे बहुत मुबारक
00:28माने गए हैं कुरान में भी इन दिनों की एहमियत की तरफ इशारा मिलता है कई मुफस्सिरीन के मताबिक सूरह
00:34अल-फजर में जिन दस रातों क
00:36जिक्र है वो जिलहिज्जा की पहली दस राते हैं अब सबसे जरूरी सवाल क्या पूरे दस रोजे रखना फर्ज है
00:43जवाब है नहीं उलिमा एकराम के मताबिक ये रोजे नफल यानि वॉलिंटरी रोजे होते हैं इनको रखना बहुत सवाब का
00:50काम माना गया है लेकिन ये �
00:51फर्ज या जरूरी नहीं यानि अगर कोई ना रख पाए तो उस पर गुना नहीं होगा बहुत से लोग समझते
00:57हैं कि पूरे दस दिन रोजे रखने होते हैं लेकिन असल में इदुलदा वाले दिन रोजा रखना हराम माना गया
01:02है इसलिए रोजे एक जिलहिज्जा से लेकर
01:04नौ जिलहिज्जा तक रखे जाते हैं यानि कुल नौ रोजे लेकिन अगर कोई पूरे ना रख पाए तो सिर्फ नौवा
01:09रोजा यानि यौम अरफा का रोजा रखना भी बहुत अफजल माना गया है
01:14हदीस में आता है कि यौम अरफा यानि नौ जिलहिज्जा का रोजा पिछले और आने वाले एक साल के गुनाहों
01:19का कफारा बन सकता है
01:20ये हदीस सही मुसलिम में मिलती है इसलिए दुनिया भर के मुसल्मान इस रोजे को बहुत एहम मानते हैं
01:25इंतिहान रहे जो लोग हज पर आरफा में मौजूद होते हैं उनके लिए रोजा ना रखना बहतर माना गया है
01:31ताकि वो इबादत में कमजोरी महसूस ना करें
01:34कुरान में सीधे तोर पर जिलहिज्जा के इन रोजों को फर्ज नहीं बताया गया लेकिन हदीस और उलिमा की टीचिंग्स
01:39में इन दिनों की अबादत को बहुत फजीलत वाला बताया गया है
01:42एक हदीस में आता है कि अल्ला को इन दस दिनों में की गई नेकियां बहुत पसंद है इसलिए रोजा
01:48तजबी तकदीर सदका नमाज इन सब की एहमियत बढ़ जाती है
01:52अगर आप इंडिया में हैं और बकराईद 28 माई को मनाई जा रही है तो यौम अरफा का रोजा 27
01:56माई को रखा जाए
01:57इसलाम में नौ जिलहिज्जा यानि यौम अरफा, दस जिलहिज्जा, एदुल, अधा, यानि एद से एक दिन पहले अरफा का रोजा
02:03रखा जाता है
02:04एक अधिस में आता है कि अल्ला को इन दस दिनों में की गई नेकें बहुत पसंदें इसलिए रोजा, तजबी,
02:10तकबीर, सद्का, नमाज इन सब की एहमियत बढ़ जाती है
02:13अगर किसी की तबियत खराब हो, काम बहुत मुश्किल हो या कोई और मजबूरी हो तो रोजा ना रखना भी
02:18कोई गुना नहीं है
02:19इसलाम असानी का दीन है लेकिन इन दिनों में जिक्र, दुआ, नमाज, सद्का इन चीज़ों पर ध्यान देना चाहिए
02:24कई बड़े उलेमा अकराम का कहना है कि जिलहज़ा के पहले नौ दिनों के रोजे रखना बहुत अच्छा आमल है
02:29लेकिन सबसे ज्यादा जोल नौ जिलहज़ा यानि यौम अरिफा के रोजे पर दिया जाता है
02:53झाल
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