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Panchdhuni Agni Tapasya: श्री श्री 1008 माता सती नंदगिरी (उज्जैन महामंडलेश्वर, अंतर्राष्ट्रीय किन्नर अखाड़ा) द्वारा गुजरात के बाबरा (अमरेली) में 7 दिवसीय पंचधुनी अग्नि तपस्या की जाती है | इस कठिन आध्यात्मिक साधना में भीषण गर्मी के बीच चारों ओर प्रज्वलित धुनों (अग्नि) के साथ सूर्य की धूप के बीच घंटों तक ध्यान और तप किया जाता है |यह तपस्या प्राचीन और गूढ़ हिंदू आध्यात्मिक परंपराओं का एक अनूठा उदाहरण है। इस साधना के मुख्य पहलू इस प्रकार हैं: तपस्या का स्वरूप: इस साधना में साधिका चारों ओर पाँच धुनें (अग्निकुंड) प्रज्वलित करती हैं। चिलचिलाती गर्मी के साथ इन अग्निकुंडों की भीषण ऊष्मा के बीच बैठकर घंटों तक ध्यान किया जाता है。 भौगोलिक स्थिति: यह अनुष्ठानिक साधना गुजरात के अमरेली जिले के अंतर्गत आने वाले बाबरा क्षेत्र में स्थित मंगलमुखी धाम किन्नर अखाड़ा आश्रम में संपन्न होता है。 आध्यात्मिक उद्देश्य: इस प्रकार की प्रचंड अग्नि तपस्या का उद्देश्य आंतरिक चेतना को जागृत करना, इंद्रियों पर पूर्ण विजय प्राप्त करना और सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर ईश्वर के प्रति संपूर्ण समर्पण साधना करना होता है।Panchdhuni Agni Tapasya: Tapati Garmi Me Panchdhuni Agni Tapasya Ka Rahasya,Mata Sati Nandgiri Kaun Hai ?

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~HT.504~PR.111~ED.464~VG.HM~

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Transcript
00:12बाहर का तापमान 45 डिगरी और चारों तरफ सुलगती हुई लाल लाल गारों की ये भीशन आग
00:19अगर कोई आम इंसान इसके करीब भी जला जाए तो इसकी तुचा जुलस जाए
00:25लेकिन जरा गोर से देखिए इस आग के ठीक बीचों बीच पवित्र मिटी अपने शरीर पर रमे हुए
00:32एक महिला बिना वचलित हुए शान्त मुद्रा में बैठी है
00:36आखिर कौन है ये महिला क्या ये कोई चमतकार है या फिर विज्ञान को चनौती देती सनातन धर्म की कोई
00:43गुप्त शक्ती
00:51दरसल ये है किनर अखाड़े की महा मंडलेश्वर सती माता नंदगिरी जी जिल्होंने हाल ही में पंच धुनी अगनी तपस्या
01:00को पूरा कर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया
01:02आफर उन्होंने ये खौफनाक तपस्या क्यों की और इसके अंतिम दिन क्या हुआ आईए से वीडियो में आपको बताते हैं
01:09आगे बढ़ने से पहले हमारे लिए जानना बहुत जरूरी है कि सती माता नंदगिरी जी आखर कौन है
01:15माता नंदगिरी जी जुना अखरी के अंतरगर आने वाले अंतराष्टिय किन्नर अखरी की एक बेहत सम्मानत और शक्तिशाली महमंडलेश्वर है
01:24इनका मुख्य ठिकाना बाबा महकाल की नगरी उज्जैन और गुजरात का बाबरा है
01:29एक समय था जब इन्होंने सांसारिक मुहमाया, परिवार और दुनिया के सभी आशोवाराम को त्याद कर दिया
01:35सन्यास लेने के बाद अपनी कठिन साधना और तंतर मंतर के कड़े नियमों का पालन करते हुए
01:40ये आज इस मुकाम पर पहुँची है
01:43आज वो केवल एक संत नहीं बलकि सनातन संस्करती, गौरक्षा और किनर समाज के सम्मान की एक बहुत बड़ी आवाज
01:50है
01:50अब बात करते हैं उस परिक्षा की जिसने सब को दातों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया
01:56पंचधुनी अगनी तपस्या इसे पंचागनी साथना भी कहते हैं
02:01साधक के चारो तरफ चार दशाओं में भारी मात्रा में गोबर की उपले और लकडियां जलाकर आग सुलगाई जाती है
02:07पंचभी अगनी स्वेम सूरिदेव होते हैं जो कड़कडाती गर्मी में उपर से सीधे नीचे आग बरसाते हैं
02:14इस भयंकर गर्मी के बीच बैठकर साधक को बिना हिलेडोले बिना पसीना पूछी लगातार कई घंटों तक भगवान श्रेव और
02:21शक्ति के मंत्रों का जाब करना होता है
02:24ये साधना शरीर को तपा कर आत्मा को शुद्ध करने और इंद्रियों पर वजय पाने के लिए की जाती है
02:29जिसे माता जी ने पूरी निष्ठा से नभाया
02:32बता दें कि ये चमतकारी द्रश कहीं दूर जंगलों में नहीं बलकि गुजरात के अमरेली जिले के बावरा इस्थित उनके
02:39आश्रम में देखा गया
02:40जब माता जी किस कठिन तपस्या का अंतिम दिन आया तो वहां का नजारा देखने लायक था
02:45कई दिनों से चल रही इस अगनी परिक्षा की पूना हूती देखने के लिए गुजरात और देश के कोने कोने
02:50से हजारों श्रद्धालों की भारी भीड उमर पड़ी
02:53चारों तरफ हर हर महादेव के जयकारे गुज रहे थे जैसे ही अंतिम दिन की अंतिम घड़ी आई आग की
03:00लपटे अपने चरम पर थी
03:02लेकिन जब माता जी उस धुनी से उठकर बाहर आई तो उनके चहरे पर कोई श्रकन या दर्द नहीं था
03:08बल्कि एक दिव्य तेज चमक रहा था
03:10फिल्हाल इस वीडियो में इतना है वीडियो पर आपकी क्या है राए हम नीचे कॉमन सेक्शन पर लिख कर बताना
03:16ना भूलिएगा तंगन चानल को ज़रूर सब्सक्राइब कर ले
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