00:06पिछले कुछी हफ़ते में 36 गड के कावरदा जिले के पंदरिया में 200 से जादा आदिवासियों ने एक साथ हिंदू
00:14धरम में वापसी की है और इस पूरे मामले की सबसे बड़ी खबर ये है कि इन लौटने वालों में
00:20से एक खुद चर्च का पादरी भी शामिल था
00:24दर्शकों आदिवासी लाकों में कन्वोजन और घर वापसी का ये पूरा मामला अब एक नया मोड ले चुका है और
00:32आज हम इस मुद्दे की इन डेप्थ इन्वेस्टिगेटिव अनारसिस करेंगे और आपके सामने सच रख देंगे दर्शकों डेटा, डिमोग्रिफी और
00:41द
00:54मर्ज की क्या कहते हैं आकड़े, सबसे पहले बात उस ग्राउंड रियालिटी की जो इस वक्त हेडलाइन्स में हैं, 36
01:00गड़ के पंदरिया में एक बड़ा धार्मेक और सांस्कृतिक अनुस्थान हुआ, यहां लगभग 200 आदिवासियों का वेदिक रीदी रिवाजों से
01:08स्
01:09लोकल बीजेपी एमेले भावना बोहरा ने खुद इन लोगों के पैर धोकर उन्हें उनकी मूल संस्कृती में वापिस शामिल करवाया,
01:18लेकिन अगर आपको ऐसा लगता है कि एक आइस्सोलेटेड इंसिडेंट है तो इस पूरे रीजन का डेटा देखिए, पहले निवर
01:25�
01:25फॉरेस्ट एरिया की बात करें, यहां की अलग अलग गाउं से 115 आदिवासी मूल धरम में वापिस लोट चुके हैं
01:32और वापिस सन्नातन को स्विकार कर चुके हैं, इसके अलावा कुई कुगडू रीजन में 70 लोगों ने घर वापसी की,
01:40दमगड गाउं में 50 लोग अपनी
01:55संदू धरम में शामिल हो चुके हैं, ग्राउंड से आ रही रिपोर्ट के मुताबित ये पूरा अभियान प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र
02:01मोदी के बोद्दे के आसपार शामिल किये गए संकल्प से शुरू हुआ था, जो अब एक और्गनाइज मूवमेंट का रूप
02:07ले �
02:07चुका है, यहां पर लोकल एड्मिनिस्टरेशन और पॉलिटिकल लीडर्स का दावा है कि इन आदिवासियों को पहले दर या फिर
02:15फ्रॉड करके भ्रम से लालज दे के कनवर्ट किया जाता था, और अब जब उन्हें सच का हैसास हुआ है,
02:22तो वो बिना किसी दबाव के अ�
02:36पॉलिस ने दो पादरी और उनके साथियों पर इल्लीगल रिलिजिस कंवर्जन केस की दर्च कर ली है, यहां जो तरकीब
02:45अपनाई जा रही थी उसे जर्नलिजम की भाषा में हीलिंग प्रेयर्स या चेंगाई साभा का पैटन कहते हैं, वहिया सीधे
02:54साधे और भोले भाले
02:55लोगों को टार्गेट किया जाता है, उनसे दावा करा जाता है कि अगर आप अपना धरम बदन लेंगे तो आपका
03:02कैंसर ठीक हो जाएगा और सेवियर मेडिकल कंडिशन से जूंज रहे गरीब लोगों को बिना किसी मेडिकल साइंस के सिरफ
03:10अंद विश्वास के धंपर बह
03:25होती है, जब एक लाचार इंसान बिमारी से हार जाता है तो वो किसी भी चमतकार पर विश्वास करने को
03:30मजबूर हो जाता है, गुना में इसी मजबूरी का सौधा किया जा रहा था, भाई अब चार बड़े सवाल खड़े
03:37हैं, इस पूरे सिनारियो को देखने के बाद दे�
03:52हेल्थ केर सिस्टम की नाकामी नहीं तो और क्या है, लोग हॉस्पिटल्स की जगा इन सभाओं में क्यों जा रही
03:57है, भाई दूसरा, मध्य प्रदेश और च्छत्यसगर्ड दोनों ही राजों में सक्ट आंटी कन्वोर्जिन लॉज यानि धरमांतरन विरोधी कानून है,
04:06इ
04:18क्या ये सिर्फ सांस्कृतिक चेतना है या इसके पीछे आने वाले चुनावों के लिए डेमोग्रिफी और वोर्ड बैंक को सिक्योर
04:24करने की कोई स्ट्राटेजी भी है, कहीं सिर्फ वोर्ड बटोरने के लिए ही तो वापिस लोगों को हिंदू में तो
04:30नहीं बदला जा रह
04:31और जान बूच के पहले जब इनको क्रिश्चन में कनवर्ट किया गया था तब भी वो किसी और पार्टी का
04:37वोट तोड़ने की साज़श तो नहीं थी, भैया बाते हैं चौती बात पर आदिवासी समाज की अपनी एक अलग प्रकृती
04:44से जुड़िया इडेंटिटी होती है
04:46और इससे पॉलिटिकल और रिलिजिस टसल के बीच उनकी मूल पहचान और उनके असली विकास जैसे रोड, स्कूल, चॉप्स का
04:54मुद्दा कहीं दबा रह जाता है। एक तरफ लालच और अंदविश्वास के दम पर कन्वोर्जन के घबरा देने वाले केस
05:01हैं तो दूसरी �
05:02तरफ बड़े पॉलिटिकल बैकिंग के साथ चल रहे घर वापसी। अब आपको क्या लगता है इस कॉंप्लेक्स प्रॉब्लम का पॉमनेंट
05:08सेलूशन क्या है क्या कड़े कानून इसे रोब पाएंगे या फिर जब तक गाहों तक अच्छी शिक्षा और होस्पिटल नहीं
05:14पहुँचेंगे तब तक मजबूरी का ये सौधा चलता रहेगा अपनी राए कॉमेंट सेक्षिन में जरूर बताईएगा अब देख रहे हैं
05:21वान इंडिया मैं हूँ आंक रुष कौशिक
05:25प्रण सबस्क्राइब सिर्क प्रद्ट नग्या इंड आंक धन्स अब्स्टाइब कॉमेंट प्रण स्टैब कर दो मेंटिया अव्या अश्या अच्छी है
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