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This evocative scene explores the profound emotional journey of Devdas, a young man navigating the complexities of societal expectations and personal identity. From his early introduction, we witness his initial awkwardness and the subtle judgments he faces, highlighting the stark contrast between his rural upbringing and the polished urban environment he encounters.

The narrative delves into the anxieties and hopes surrounding his education in Calcutta, hinting at a deeper narrative of growth and self-discovery. We see his struggles to adapt to new social norms and the underlying emotional turmoil that accompanies his transformation.

As the story progresses, the dynamics of relationships and familial expectations come to the forefront. The longing for connection and the fear of being forgotten resonate throughout, painting a poignant picture of a soul grappling with his place in the world. The dialogue touches upon themes of love, duty, and the enduring bonds of friendship, all while hinting at a potential union that could redefine his future.

#Devdas #IndianCinema #ClassicFilm #EmotionalJourney

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Transcript
00:00मत भूल मुसाफिर तुझे जाना ही पड़ेगा
00:11मत भूल मुसाफिर तुझे जाना ही पड़ेगा
00:28फुलवारी जब भूल खिले तो भूल नहीं समाती है
00:36अपनी अपनी सुन्दर तापर कली कली जिक जाती है
00:45शब नम जो रो रो कर
01:01हर फूल को ये कम जाती है मत भूल मुसाफिर तुझे जाना ही पड़ेगा
01:14मत भूल मुसाफिर एक मुसाफिर तुझे जाना है
01:28एक मुसाफिर खाना है जाना है
01:49गाफिर एक दिन सब को यहां से इतना कर जाना है
02:09अपसोथ ना जाना था के जाना ही पड़ेगा मत भूल मुसाफिर तुझे जाना ही पड़ेगा
02:24मत भूल मुसाफिर तुझे जाना ही पड़ेगा
03:10देधात आगिया
03:21तुमारे पिताजी का अच्छे हैं?
03:22जी हाँ, सब अच्छे
03:25हाँ, तुम्हे अपने लड़कों से बिला दो
03:31अच्छा, ये देधास कौन है?
03:34बाबु जी के एक बड़े अमीर दोस्त का लड़का
03:36कलकत्ते में तालीम हाफिल करने के लिए आया है
03:40तालीम?
03:43हुज़ूर के लिए एक नाया शीका
03:46ओ, तो क्या बेसे हो?
03:55क्या ये ही देधास है?
03:58हाँ, बैचो, अराव करो
04:20चिल गिया
04:22क्यों बेचारे को नाराज कर दिया?
04:25धर्मदाज, कहो
04:28वो लोग मुझ पर
04:30हस क्यों रहे हैं?
04:32हसने दो
04:34शेहर वाले द्यादवालों पहसा ही करते हैं
04:39वो नहीं जानते के शायद इस पर उन पहसता हो
04:44हसने दो
05:01आओ
05:16क्या हुआ, मिस्टर देवदास?
05:19तुम्हेतना परेशान क्यों हो?
05:24क्यों?
05:28लो
05:31लो, तकल्फ छोड़ो
05:34आप
05:35मैं? मैं चुनी डालूं
05:37दीमा कंपनी का एजेंट
05:40ये किदारनाथ
05:42शांती
05:43मेरे बड़े गहरे दोस्त है
05:46तुम्हें चाहिए है
05:48कि तुम्हें मुझे अपना खास
05:50दोस्त समझो
05:51अच्छा, तो उस वक्त
05:53वो लोग मुझे देखकर हस क्यों रहे थे?
05:56हस क्यों रहे थे?
05:57तुम्हाद लबादे करहत रहे थे?
06:01हुँ हुँ
06:05ये यहां ने चलेगा
06:08अच्छा
06:11यहाँ चलने के काबिल है
06:12यह धोती
06:15यह गंजी
06:16यह कोट
06:17बस अठीक कर लूँगा
06:19इसमें क्या बुराई है
06:22सुनते जाते हो
06:23यह धोती नहीं चलेगी
06:24गंजी के बर कोई कोट बहनता है
06:28यह शहर है शहर
06:30देहात नहीं है
06:32समझे
06:33यहाँ तुमको सुट बूट में रहना होगा
06:37हाँ
06:37इत्में आप रखो
06:39मैं साब ठीक कर दूँगा
06:42अच्छ
06:44अच्छ
06:46अच्छ
06:50बहुत अच्छा फिट हुआ है
06:51भई वहाँ हुआ
06:52भई वहाँ हुआ
07:02भई वहाँ हुआ
07:04तुम्हारे हाथ में यहीरे की उंगूथी क्या खूब जेद देती है
07:09क्या बाद है
07:10सच मुच
07:11अब कुछ ना पूछो नहाएख खूब
07:15अच्छा देवदास
07:16तुम जरा गारी में बैठो
07:18मैं इसकी कीमत प्या कर लूँ
07:30इसकी कीमत क्या होगी
07:32अजी आपसे क्या प्यारा लेना
07:35आठ सो रुपे सिर्फ आपसे
07:37हम
07:39एक काम करो
07:41रसीर हदार रुपे की बनाओ
07:43ना तुम्हारा लुकसान हो ना हमारा
07:45बहुत अच्छा
07:50मुझे मत देना
07:51भई वाब वाब
07:53तुम नहीं दियो बे
07:54मैं शराब नहीं ठीता
07:56क्यों
07:58मैंने सुना है कि ये बुरी चीज होती
08:01भी वाब
08:21अरे ये क्या
08:24कामल उबर रहे है
08:25और तुम्हें ख़वरी ही नहीं
08:45क्या तोच रही थी
08:48कलकत्य से कोई खत नहीं आया ना
08:51नहीं
08:54कलकत्य से
08:55कोई खत नहीं आया
08:57पारवती
08:58मुझे देवदास के बारे में
09:01कुछ अंदेशा है
09:02क्यों
09:04मर्द अक्सर भूल जाया काते है
09:06आप हुई ओट
09:08दिल में आई खोट
09:10मेरा देवदास औरों की तरह नहीं
09:13इस शर करे ऐसा ही हो
09:15लेकिन वो अबकी छुटियों में दोस्तों के साथ
09:18मचूरी क्यों चला गया
09:19यहां क्यों नहीं आया
09:22अपकी जरूर आएगा
09:24मेरा देवदास औरों की तरह नहीं
09:31देवदास सब जान हो गया है
09:33अब तो इसकी शादे
09:37पारवती की माँ
09:39आज बात लेकर आई थी
09:41कहती थी अगर पारवती की शादी देवदास की साथ
09:46तो फिर तुमने क्या कहा
09:47बहला मारका कह सकती थी
09:50माला के दोनों में बड़ा मेल जुल है
09:53लेकि उस करकी लगकी रिसकर में कैसे आव सकती है
09:58बेश्यक
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