00:00माराजी, लople
00:03देखते हैं कि प्रेम को प्रेम को अंता उसके उसके उसके उता है
00:21देखें, जिसको हम प्रेम कहते हैं
00:25वो प्रेमे है नहीं
00:27वो अधिकांश्तह बस शारेरिक आकरशन है जिसका आकरशित होने वाले को पता भी नहीं होता
00:36और जहां तक शादी की बात है दो व्यक्ति साथ रहने का फैसला करते हैं
00:44उस संगति के निरणे में जो पवित्रता होनी चाहिए वो विवाह के निरणे में कहीं दिखाई नहीं देती चाहे वो
00:51प्रेम विवाह हो और चाहे वो आयोजेत विवाह हो
00:54और इन सब के मूल में बात यही है कि वैक्ते जब स्वयम होई नहीं जानता तो उसे यह कैसे
01:01पता कि मेरे लिए किसकी संदती उचित है वो तो फिर यही करता है कि जब एक ओम्र आ गई
01:06इतने साल के हो गए तो उसको लगता है कि अब मेरे पास विप्रीत लिंगर का कोई होना �
01:12जाये है और वो उसकी तरफ खिचा चला जाता है जैसे उसके संस्कार रही है जैसे उसकी कंडीशनिंग रही है
01:18उसके हिसाब से वो किसी को चुन लेता है उसमें बहुत बार तो काफी वेवसाइक किसम के सौधे भी होते
01:25हैं यह लडगे की नौकरी कैसी है नड़की लिखने
01:29में कैसी है, जातपात का मिलान कैसा है, दहेज कितना मिलेगा, भाई भेहन कितने है, संपत्थी कितनों में बटनी है,
01:37ये सब होता है, इसमें पुइंदरता कहा है, उसमें अज्ञान है, उसमें अधेरा है, उसमें खोखला आकरशण है, और उसमें
01:45लेन देन है.
Comments