00:00ये जो हमारे आयोजित विवा होते हैं कतई अशलील किस्म के उसमें अभी भी ये होता है कि लड़के की
00:06ओर से जो महिलाएं जाती है लड़की को देखने वो उसे पीछे कमरे ले जाती है उसे कपड़े पड़े उतरवा
00:11के देखती है
00:14ये तुम्हारी पीट पर दाग कैसा है जैसे गायब है इसको देखा जाता है न कि मजबूत है की नहीं
00:19है और बढ़िया दूद देगी की नहीं इतनी तो तुम शर्ते रखते हो फिर कहते हो कि अरे मुझे कोई
00:26मिल नहीं रही कोई एकतम अकल की अंधी हो वो भी तुम कहोगे �
00:32नहीं ये हमारे क्राइटेरिया में नहीं आ रही कोई तुमसे ज्यादा समझदार हो तो कहोगे क्या जोरू का गुलाम बनना
00:37है कम पिड़ी लिखी हो तो भी समस्या ज्यादा पढ़ी लिखी हो तो भी समस्या ज्यादा लजाती हो तो कहोगे
00:45आहा टू कंसरबेटिव और ज्
01:00नहीं मिलने देता, हिंदू को मुसल्मान से नहीं मिलने देता, और नर को नारी से नहीं मिलने देता, नहीं तो
01:10मिलन तो सहज है, अचरज की बात यह है कि तुम उस मिलन को रोक कैसे लेते हो, मिलन तो
01:17होई जाए, है तो जिंदगी में रड़की कोई है, नहीं है तो नहीं है, �
01:21आज नहीं है तो कल होगी कल होगी परसो फिर नहीं होगी आते हैं जाते हैं प्रक्रति का प्रवा है
01:27मुझे उसमें बहुत कहानियां क्यों घड़ी करनी है यह सब तुमने कहानियां पाली है यह कहानियां तुम्हारा नासूर है यह
01:35कहानियां हटा तो देखो जीवन कितना आसा
01:43आया
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