00:00इसकी इज़त लुट गई, इज़त कैसे लुट गई, और आपसे एक बात और बोल रहा हूं, कोई आपके तन को
00:05गंदा कर जाए, बुरा मानिये, पर कोई आपके मन को गंदा कर जाए, और ज्यादा बुरा मानिये, कोई आपके कपड़ों
00:13पर हमला करे, आपके जिस्म पर हमला
00:15करे बुरा मानिये पर कोई आपकी आजादी पर आपकी शान्ति पर आपकी सच्चाई पर हमला करे और ज्यादा बुरा मानिये
00:24इज़त इतनी छोटी चीज है कैसे कैसे लुट जाएगी हमें ये सोच अपनी संस्कृत से निकालनी पड़ेगी कि लड़की की
00:32इज़त तो उसके �
00:33यानांगों में बसती है वो मनुष्य है उसके पास भी कला मेधा प्रज्या प्रतिभा है उसकी भी ज्यान की मुक्ति
00:41की उतनी संभावना जितनी किसी पुरुष की और भारत जैसे देश में तो बहुत कम लड़किया होंगी जिनको कभी न
00:48कभी सेक्शुल दुर्वेभार से
01:05लड़की के साथ हर जगा हो रहे हैं तो लड़की क्या करें अपनी नजरों में गिर जाए नहीं सर उठा
01:11के चलो सीना तान के चलो हमने कुछ नहीं गलत करा है यह समाध वैशियों का है उसकी हुझे से
01:17हम अपनी नजर में क्यों गिरें
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