00:00अचारी जी, हर हर महादेव, यह मैं नहीं नीचे राफ्टिंग वाले चला रहे हैं
00:03हर हर महादेव तो बहुत अच्छी, बहुत उंची, बड़ी शुद्ध वात है
00:10इसको इस तरह से अजीब तरिये से चला तर और जेपन के साथ नहीं बोला या मैं चड़िये
00:17हर कम अच्छी हो क्या होता है, जो तुमसे हर ले जाए, तुम देने को तयार हो और आया कोई
00:24तुमसे ले गया, क्या ले गया तुमसे, तुम जितना अपना हंकार रखते हो, जातिभाव रखते हो, अज्यान रखते हो, यह
00:32सब कोई तुमसे आगर के ले गया, ले गया, हरन हो �
00:37हरन, उसी से हरी भी आया है, लेकिन ये चीज़ें हंकार को वक्त रही होती है, वन को किसी को
00:44योई नहीं लगाने देगा, तुम भीतर जो गंदगी लेकर बैठे हुए हो, उसका हरन सिर्फ तभी हो सकता है, जब
00:50तुम उसकी अनुमसिस होगे, तुम चाहोगे, तो हरी भी अप
01:04को दोर से किला पांदिल का करें, कोई अधर चुक्चा आप ध्यान में गंगा के नारे बैठना चाहे, तो ध्यान
01:11लगा कर बैठ नहीं सकता, ये सब राफ्टिंग मारे निकलते हैं, और जोर-जोर से चिला, और एक ही सांस
01:16में ये भारत-माता की हर-हर महादेव भी बोल दे
01:35जिसने अपने आपको शरीर मानना बंद कर दिया, जिसके भीतर से लिंग का भाव चला गया, और संपन्नता का भाव
01:43चला गया, क्या मेरे पास है, क्या मेरे पास नहीं है, जो अपने आपको कुछ भी नहीं वानता, अपने सारे
01:49आग्रहों, सारी पहचानों से मुक्त हो चु
02:02यहां अभी हरन जैसा तो कुछ होने रहा अभी यह हरी को भी कुछ हरने की आगया द्राने को तयार
02:09नहीं है
02:09पर हर हर महादेव का ही खूप जोर से नारा लगा रहे हैं पता है नारा के सुद्धिश्व से लगाया
02:15जोड़ा दाम जाने लेकिन शिवत्तु क्या है यह जाने बिना पुंकार बड़ी बरी बला होता है वो अपने स्वारत की
02:24खातेर सत्य को भी खाने को तयार उसके लिए सब
02:29सिर्फ नाम है, राम, कृष्ण, गीता, ग्रंथ, शिव, महादेव, यह सिर्फ उसके लिए नाम है, जिने अपने स्वारत के लिए
02:36खापचा जारता है, और है महादेव कौन?
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