00:15ुडिशा की नृत्यकला को पूरी दुन्या जानती है
00:26जिस उडिशी नृत्यको क्लासिकल डांस का दरजा मिल चुका है
00:30उस नृत्यकला को जन्म देने वाली गोती पुआ नृत्यकला सबसे मुश्किल दोर से गुजर रही है
00:38सकारी मदद नहीं मिलने की वजह से ये लोकला खत्म हो रही है
00:42अब कुछ ही गुरु ऐसे बचे हैं जो इस कला को संजोनी की कोशिशों में जुटे है
00:48इन्ही गुरुओं में एक है गुरु बसंत महराणा
00:52चार साल की उम्र से ही उन्होंने अपने पिता गुरु लक्षमन महराणा से ये कला सीखी
00:57और तब से ही वो इसका अभ्यास कर रही है
01:05इस कला का प्रचार प्रसार करने के लिए उन्होंने अभिन्य सुन्दर गोती पुवा नृत्य परिशत गुरुकुल की स्थापना की
01:17गुरुकुल को जिन्दा रखने के लिए मदद की जरूरत है
01:19बिना मदद ये आगे नहीं बढ़ सकता
01:22हम सिर्फ इस कला और परंपरा को जिन्दा रखने की कोशिस कर रहे हैं
01:26गुरुकुल में 50 से ज़्यादा बच्चों को डांस के सिक्षा की वेवस्था करना मुस्किल हो रहा है
01:34गुरु वसंत महराना ने सालों पहले इस गुरुकुल की अस्थापना की
01:39यहाँ 50 से ज़्यादा बच्चों को बिना फीस लिए डांस के सिक्षा दे रहे हैं
01:43मकसद इस परंपरा को जिन्दा रखना है
01:46सरकारी मदद के बगए गुरुकुल को चलाना और छात्रों के लिए विवस्था करना मुश्किल हो रहा है
01:53गोती पुआ का मतलब होता है एक
01:56इसका ये नाम इसलिए भी पड़ा क्योंकि परिवार का एक बेटा ही इसका अफ्यास करता है
02:02इसकी शुरुवात सन पंद्रा सो इसवी में हुई
02:04जब यहां राजा प्रताप देव का शाशन था
02:08उस वक्त मंदिरों में देवदासी नृत्य प्रचले था
02:12लेकिन मुगलों के आकर्मन की वजह से वो बंध हो गया
02:16और धीरे धीरे गोती पुआ नृत्य प्रचलन में आया
02:20और मंदिर में जूलन यात्रा, चंदन यात्रा डोला, शीतल शश्टी, रुपमणी विवाह के मौके पर इस नृत्य का आयोजन होता
02:29है
02:32गुरू बसंत महराणा ने पिता के अलावा गुरू पदमश्री, मगुनी दास और पदमवे भूशन गुरू कालू चरण, मुह पात्रा से
02:41भी सिक्षा ली
02:42अब वो बच्चों को मुफ्त में सिक्षा दे रही है
02:50गोतिपुआ डाम्स की ट्रेनिंग छोटी उम्रे से सुरू हो जाती है
02:53मैंने 4-5 साल के उम्रे से इसे सुरू किया और पिछले 21 सालों से ट्रेनिंग ले रहा हूँ
02:58ये डाम्स सिखने के लिए आपको कड़ी मेहनत करनी पड़ती है
03:02लगतार अभ्यास करना पड़ता है फिर बाद में ये आसान हो जाता है
03:05हम हर दिन 5 घंटे अभ्यास करते हैं
03:08हम 30 से ज़्यादा देशों में परफॉर्म कर चुके हैं
03:11लेकिन इसकी डिमान घट रही है क्योंकि लोग इसे जानते नहीं
03:17ये उडिशा की संस्कृती और लोक कला का अभिन हिस्सा है
03:22लिहाजा इसका संरक्षन जरूरी है
03:24ETV भारत के लिए उडिशा के पुरी से शक्ति प्रसाद मिश्रा की रिपोर्ट
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