00:05दो महाशक्तिया एक मेज और बीच मेद हिकता हुआ ताइवान
00:09बीजिंग की ग्रेट हॉल अफ दे पीपल में आज सिर्फ वियपारिक समझोते नहीं हुए
00:14बलकि शब्दों की वो चुंगारिया निकली जुसने पूरी दुनिया की धड़कन ने बढ़ा दी है
00:19श्री जिंपिंग ने डॉनल्ड ट्रम्प की आँखों में आखे डाल कर वो कह दिया जिसे कूटनीती की दुनिया में आखरी
00:25चेतावनी माना जा रहा है
00:26आज बात उस श्रिखर सम्मेलन की जहां हाथ तो गर्म जोशी से मिलाए गए लेकिन इरादे बर्फ की तरह ठंडे
00:33और सक्थ थे
00:34बीजिंग में जब श्री जिंपिंग और डॉनल्ड ट्रम्प आमने सामने बैठे तो चर्चा इरान, AI और ट्रेड वाल से शुरू
00:41हुई
00:41लेकिन अचानक श्री जिंपिंग ने माहौल बदल दिया
00:44उन्होंने ट्रम्प से सीधे तोर पर कहा ताइवान का मुद्दा चीन अमेरिका रिष्टों की वो नाजुक लखीर है जिसे पार
00:50किया तो फिर सिर्फ तकराव होगा समझ होता नहीं
00:53चीन के विदेश मंत्राले ने जो शब्द इस्तिमाल किये हैं वो साधारण नहीं है उन्होंने टाइवान की आजादी और शांती
00:59की तुलना आग और पानी से की है
01:01बीजिंग का संदेश साफ है ताइवान कोई बागिनिंग चिप नहीं है जिसे टेबल पर मोल भाव के लिए रखा जा
01:09सके लेकिन यहाँ एक दिल्चस्प मोड है
01:11जहाँ चीन ताइवान को लेकर आरपार के मूड में दिखा वही वाशिंटन की रिपोर्ट कुछ और ही कहानी कह रही
01:17है
01:17अमेरिका ने अपनी ब्रीफिंग में खेती बोईंग विमानों की खरीद और इरान पर तो खूब चर्चा की लेकिन ताइवान के
01:24जिक्र को जैसे हाशिये पर डाल दिया
01:26तो क्या अमेरिका इस चेतावनी को अंसुना कर रहा है या फिर डॉनल ट्रॉम्प की लेंदेन वाली नीती ने चीन
01:32को इस कदर बेचेन कर दिया है कि उसे विपार के बीच में युद्ध की धमकी देनी पड़ी
01:37क्या कुछ हुआ इस सम्मेलन में देखिए इस रिपॉर्ट
01:41आज बीजिंग में ग्रेट हॉल अफ दे पीपल के अंदर दो नेता एक दूसरे के सामने बैठे
01:45व्यापार पर चर्चा हुई इरान, AI, Rare Earths, वैश्विक शक्ती की पूरी सनरचना
01:51और फिर शी जिन पिंग ने डोनाल ट्रम्प की ओर देखा और कहा चलो ताइवान के बारे में बात करते
01:55हैं
01:56बीजिंग के विदेश मंत्राले द्वारा जारी एक विग्यप्ती के अनुसार शी ने सीधे ट्रम्प से कहा
02:00ताइवान का सवाल चीन अमेरिका संबंधों में सबसे महत्वपून और सबसे समवेधन शील मुद्दा है
02:06यदि इसे उचित रूप से संभाला जाता है तो द्वीपक्षिय संबंधों में समगर स्थिर्दा बनी रहेगी
02:11अन्य था दोनों देशों के बीच टकराव और यहां तक की संघर्ष होगा जिससे पूरा रिष्टा बड़े खत्रे में बढ़
02:16जाएगा
02:17ये कोई राजनाईक सुझाव नहीं था कोई हलकी फुल की बात नहीं थी बलकि एक सीधी चेतावनी थी
02:22इसे सही से संभाले या संघर्ष का सामना करें
02:25दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सैने शक्ती की ओर से दुनिया की पहली सैने शक्ती को व्यक्तिगत रूप से एक
02:30राजकिय शिखर सम्मेलन में
02:32बीजिंग की प्रवक्ता ने और भी आगे बढ़ कर कहा कि ताइवान की स्वतंचता और खाड़ी के आरपार शांती आग
02:37और पानी की तरह बेमेल हैं
02:38ये मुहावरा इत्तिफाक नहीं है इस तर पर चीनी कूटनीती हर शब्द का चुनाव सोच समझ कर करती है
02:43आग और पानी मोल भाव नहीं करते वे समझोता नहीं करते एक दूसरे को मिटा देता है
02:48वाशिंग्टन के लिए संदेश ये है ताइवान की स्थिती पर कोई मध्यम मार्ग नहीं है ऐसा कोई मार्ग जिसे बीजिंग
02:53स्विकार करेगा
02:54तो फिर ये चेतावनी यहां आज व्यापार और आर्थिक समझोतों के इर्दगिर्द बने शिखर संबेलन में क्यों दी गई
02:59क्योंकि बीजिंग नहीं चाहता कि व्यापार की अच्छे महौल में ताइवान का मुता तरकिनार हो जाए
03:03हर बार जब दोनों शक्तियां साज हार्थे काधार खोचती हैं तो इस बात का जोखिम होता है कि कठिन मुद्दों
03:08को टाल दिया जाए
03:09उन पर लीपा पोती की जाए या उन्हें चुपचाप ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए
03:12शी ये समिश्चित कर रहे हैं कि ऐसा ना हो
03:14ट्रम्प की सत्ता में वापसी ने ताइवान को लेकर नई अनिश्चित्ता पैदा कर दी है
03:18उनकी लेंदेन की शैली, कड़े टैरिफ और व्यक्तिकत कूटनीती
03:21बीजिंग को इस बात पर अनिश्चित कर देती है कि क्या ताइवान एक दिन मोल भाव का जरिया बन सकता
03:25है
03:25आज की चेतावनी आंशिक रूप से उस अनिश्चित्ता का जवाब थी
03:28ये मुद्दा चर्चा के लिए नहीं है
03:30इस बीच ताइवान की अपनी सरकार करीब से नजर रख रही थी
03:33ताइपे चुपचाप अपनी सुरक्षा मजबूत कर रहा है
03:35और चुपचाप उमीद कर रहा है कि वाशिंग्टन अपने रुख पर कायम रहेगा
03:39बैठक की अमेरिकी रिपोर्ट में आर्थे कुपलप्तियों पर ध्यान केंद्रित किया गया
03:42क्रिशी खरीद, बोईंग विमान, प्रद्योगिती प्रतिबंद, इरान
03:45ताइवान का वाशिंग्टन की ओर से बमुश्किल जिक्र किया गया
03:48वो विशमता अपनी ही कहानी बयां करती है
03:50चीनेस शिखर सम्मेलन में ताइवान को एजंडे में सबसे उपर रख कर आया था
03:53अमेरिका सौधे करने आया था
03:55दोनों पक्षों ने वो कह दिया जोवे कहने आये थे
03:57किसी को भी पूरी तरह से वो नहीं मिला जोवे सुनने आये थे
04:00ताइवान पर आज किसी सफलता की घोशना नहीं की गई
04:02कोई समझोधा नहीं, कोई ढाचा नहीं, कोई संयुक्त बयान नहीं
04:05बस एक चेतावनी
04:06बीजिंग द्वारा उस भाशा में सबस्ट रूप से दी गई
04:09जिसका उप्योग वो तब करता है जब वो अपनी बात पर गंभीर होता है
04:11अब सवाल ये है कि क्या वाशिंग्टन ने इसे उसी तरह सुना जैसा बीजिंग चाहता था
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