00:00लोग यह भी आरव लगाते हैं आप पर कि आप जो traditional rituals हैं यह सब disrespect करते हैं
00:07यह कौन सा सत्य है कि जो कुछ परंपरा में चल रहा है
00:13परंपरा में न आपके हाथ में कभी माइक नहीं था
00:16परंपरा में आपके हाथ में या तो जाडू होना चाहिए था या नन्ना मुन्ना
00:30उसको समन देना जरूरी है, यह कहां की बात हो गई, अतीत में जो कुछ भी है, उसको विवेक से
00:38देखते हैं, कुछ उसमें सार है, तो सुचार कर लेते हैं, और सार नहीं है, तो थोठा दे उडाए, इसमें
00:46क्या इल्जाम की, क्या बात है, ऐसा दो है,
00:48कोई अतीत के बंधक थोड़े ही है
00:50कोई पुराने लोगों के पुरानी धाराओं के गुलाम थोड़े ही है
00:55कि जो चलता आ रहा है चलने देंगे
00:58कोई चीज सिर्फ इसलिए अच्छी है क्योंकि
01:01आप से नहीं जन्मी है पीछे से आ रही है
01:03यह तर्क क्या है, अपने अपमान का तर्क है
01:07कोई चीज सिर्फ इसली अच्छी है क्योंकि
01:10मैंने नहीं रची, किसी और ने रची, तो ठीक होगी
01:13कुल मिलाकर के बात ही है कि मैं ना काबेलू, मैं मूर्खू
01:16तो इसलिए जो कुछ भी मैंने नहीं किया है, वो मुझसे बहतर होगा
01:20तो जो किसी और ने करा, उसका पालन करो
01:22यह क्या तर्क है
01:25और भी, लोग बोलते हैं कि आप किसी परंपरा यार लीने से नहीं आते हैं
01:32तो आप आचारे जी कैसे हो गए, गुरू कैसे हो गए
01:34मैं क्या ही नहीं रहा है, मुझे परंपरा से आचारे कहलवाना है
01:38आप बोलते हो इसलिए हूँ, आप नहीं बोलो तो नहीं रहूँगा
01:42आचारे माने शिक्षक
01:44आपका शिक्षक हूँ तो आपका आचारे हूँ
01:47और आपका शिक्षक नहीं हूँ तो नहीं हूँ
01:49मैंने परंपरा से थोड़ी लिये पदवी
01:52परंपरा को एट्रिब्यूशन एरर हो रहा है
01:54उसको लग रहा है कि उसकी किसी चीज को मैंने उठा लिया है
01:58मैंने उसकी कोई चीज नहीं लिये
01:59मुझे जो चीज मिली है वो आपने दिये
02:03जब तक आपने धी हुई है तब तक है जिस दिन आप वापस ले लोगे उस दिन न ही रहेगी
02:07परमपरा से नहीं लिए आप से लिए
02:10या तो आप कह दो
02:13कि हम आपको अचारे नहीं मानते तो भी बात ठीक है
02:16नहीं रहा, या किसी दिन मेरा मूट बन गया, मैं कहा दूँगा, या अचारे अचार हटाओ सब, पर परमपरा वाले
02:22चिला रहे हैं, हमने अचारे नहीं बनाया, तुमसे लेने कोन आया था, तुम कहें फाल तुम्हें कूद रहे हो, तुमसे
02:30तु ली ही नहीं है, तुम क्यों
02:31कुदर रहु
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