00:00हमारे व्यदेश के आकरमणदारी आया हम रहता और हमारे नालंदा इलिवस्टी को नहीं जला दिया एक साल तक जलती रही
00:10तो उसक्त हमारे यतना भी पूच थी हमारे को बहुत नुशाल नहीं हुआ
00:14तो ऐसे इतने जो इतना बड़ा संकट था है ऐसे आदमियों को हम अभी अपने दिशने शमादा सकते हैं
00:19नहीं करना चाहिए और प्रतिशोद ही होता कि आप पांच और नालंदा खड़ी करते करी क्या
00:26बदला लिया कहां हमने जिसने मेरी एक नालंदा जलाई थी
00:30अगर मुझे में वाकई बदला लेने का जजबा होता तो मैं पांच नालंदा खड़ी करता
00:34बदला लिया कहां हमने मैं तो कह रहा हूँ बदला लो
00:42बरबर सेनाओं ने आ करके भारत को बार बार पददलित किया निश्चित रूप से किया
00:48भारत के पास कुछ ऐसा था जिसे वो बरबर सेनाओं छूबी नहीं पाई
00:53तुम क्या लूट के ले जा रहे हो तुम हमारे मंदिर तोड़ रहे हो
00:56तुम सोना लूट के ले जा रहे हो तुम क्या वो लूट सकते हो जो हमने भीतर प्राप्त किया है
01:01नहीं लूट सकते न
01:02और जिन्होंने खूब लूटा उनमें से ही फिर कुछ को सदबुद्धी भी आ गई
01:06उन्होंने का भाई भाई भारत वो जगह नहीं है जिसे लूटा जा सके
01:10ये लूटने कारिक्रम बंद करो
01:12भारत के तो चरणों में बैठना होगा
01:14और फिर बहुत सारे ऐसे विदेशी जो आये थे आकरानता बनकर
01:18वो भारत में शिष्य बन गए
01:19इस जगह में लूट खसोट नहीं चलेगी यहां तो सीखो
01:23लोगि वो भी जान गए कि भारत की असली संपदा बाहरी है यही नहीं
01:28भारत की असली संपदा भीतरी है
01:30तो बाहरी संपदा लूटने से क्या मिल जाएगा जब वो छोटी चीज है
01:34जो भीतरी असली बात है उसको प्राप्त करो न
01:36उन्होंने भी फिर यहां पर बसी गए उनमें से बहुत लोग भारत में रम गए
01:40भारत से उन्होंने बहुत सीखा भी
01:42और भारत की मिट्टी के फिर उन्होंने गीत भी गए
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