00:00नमस्कार अचारा जी, एक एलिगेशन आपके ऊपर यह और लगाया जाता है, शादी को लेकर जैसे लोग बोलते हैं, इनोंने
00:06तो खुद शादी नहीं करिये, और दूसरी की भी शादी नहीं होने देते हैं
00:10नहीं होने देते हैं, क्या माने मैं सर शक्तिमान इश्वर हूं? मैं नहीं होने देता माने क्या, तुम कर लो
00:17कोने में जाके, मैं क्या कर लूँगा उसमें? ये किसी की शादी नहीं होने देते, मैं कौन हूं, मोगेंबो? और
00:26जब कोई मेरे सामने आता है, घर तूट गया, खो
00:40मेरी जिन्दगी में तुम घुसो, बिना बात के दूरबीन लेके, वैसे ही मैं तुम्हारी जिन्दगी में नि घुसना चाहता, मुझे
00:49कोई मतलब नहीं है तुम कहां शादी कर रहे हो, मेरा काम है बात करना सत्य की, उसके बाद कर्म
00:55क्या करना है वो तुम देख लो, मेरा काम
00:58करता से संबंदित है मेरा काम हंकार से संबंदित है मेरा काम है केंद्र को प्रदीप्त कर देना उसके बाद
01:06क्या कर्म होता है क्या फैसले क्या निरणे तुम जानो ना मेरा उसमें उझे क्या पता देखो किसी कर्म से
01:12दुख नहीं आता विवाह तो बस एक आयोजन है एक विव
01:27देखो, होश के साथ तुम शादी करोगे, बहुत अच्छी शादी होगी, बात शादी की नहीं, बात केंद्र की है, होश
01:34की है, तुम्हें पता भी है कि तुम क्या कर रहे हो, अगर पता है उसके बावजूद कर सकते हो,
01:39तो करो, और खूब करो.
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