00:00बुद्ध बाड़ा साल जब तक जीए तब तक भटकते रहें लेकिन आपको दिखाया क्या जाएगा हमेशा कि बैठे हुए हैं
00:07और बैठना तो छोड़ दो लेटे हुए हैं जैसी विश्णू की शेशनाग वाली मुद्रा दिखाई जाती बिल्कुल ऐसे ये कि
00:16बुद्ध भ
00:28लपता चेहरा कभी दिखाया नहीं जाता है हमें तो यह दिखाया जाता है तो बस टांती में एक चवी पकड़
00:35लिए शांत आंतव कुछ नहीं होता है बहुत महनत अलगति है जूझना पड़ता है तूट जाते ओ भीतर से तो
00:43आपको तो भी बता दिया गया है है बस पालति
00:57तत्तों में उनके संघर्ष की गाथा होगी। चेहरे पर चोटों के निशान, उल्जे हुए बाल, बेतर्पीब दाढ़ी, हटे हुए वस्त्र,
01:07मजबूत शरीर। और जब ऐसा होता है न तब आँखों में तेज होता है।
01:12सच्ची जिन्दगी जीना माने तूटना, हमें हमारे ज्यानियों का रिशियों का कराहता हुआ चेहरा चाहिए, ललकारता हुआ चेहरा चाहिए, तूटता
01:24हुआ चेहरा चाहिए, और हम देखना चाहते हैं कि जब सब कुछ तूटराओ, तब भी वो कौन सी चीज है
01:30जो भीतर
01:31जुड़ी हुई रहती है उसी को आत्मा कहते हैं सच्चाई खुरदुरी होती है और सच्चाई की खुदराहट से न हमारी
01:42खाल छिल जाए तो हमें सच्चाई एकदम कोमल करके दिखा दी जाती है क्योंकि हम देखना चाहते हैं वैसे
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