00:00ये वर्सतर चल रहा था, दिवी जी बैठी थी, शाम को शुरू हुआ, साथ आठ वजे, ग्यारा बज गए, और
00:06ऐसे जन्वरी के दिन थे, तो धुन-धुन-धुन होती, वो बोलती है कि अब मुझे जाना होगा, मैंने का
00:13बस हो रहा है समाप तो भी पंद्रमेट रुकिये, �
00:16बोलती ही नहीं जाना होगा, मैंने क्यों, तो अदा से मुस्कुरा कर बोलती है क्योंकि मैं किसी की बीवी हूँ,
00:23तो मैंने कहा, तो, उनकी अनुसार, it is understood, and I refuse to understand, आप किसी की पतनी है, तो,
00:35तुम्हारे देखे, इस वक्तवे से बहुत सारी चीजे अपने आप फॉलो करती
00:42है, मेरे देखे, नहीं फॉलो करती है, तुम्हारे अनुसार, तुम किसी की बीवी हो, तो, तुम्हें 11 बजे घर में
00:48होना ही चाहिए, मैं बस इतना पूछ रहा हूँ, क्यों, और तुम्हारे पास कोई जवाब है नहीं, इससे बस ये
00:55पता चल रहा है, तुम कठपुतली हो
00:57तुम भी भी नहीं हो, नहीं तुम्हारे पास जवाब होता, हाँ, उन्होंने ये बोला होता कि अचाहरे जी बाहर फॉग
01:02हो रहा है, और जन्वरी का महीना है, घर जाने में दिक्कत हो सकती, एक्स्रेंट हो सकता है, सेक्यूरिटी का
01:08इशू है, तो मैं कहता हाँ, आप जर�
01:24तुम पूर्ण होते हैं, यहीं जिन्दगी बन जाते है और फिर आप इनगी दोहाई देते मेरे पास आते हैं, कि
01:30जिम्मेदारियां निभानी है, ये करना है वो करना, मैं जिम्मेदारियों खिलाफ नहीं हूँ, मैं अस्पश्ठता के खिलाफ हूँ
01:54बीइंग लेड़ी, this is your duty towards your husband.
01:57और ये बात मैं बरदाश्ट करूँगा नहीं, कर्तववे तो बहुत उची बात होती है,
02:02मामेकम शर्णम बरज, है कर्तववे, ये रा कर्तववे लो,
02:05पर आपने अपना कर्तववे क्या कृष्ण से सीखा है,
02:07आपको कैसे पता आपका क्या कर्तववे है,
02:10और पूरी जिन्दगी इन ही क्या धार पर निकाल रहे हो,
02:13जीना है या कटपुतली की तरह नाचना है,
02:16कटपुतली को गिरने दो, तुम जीना शुरू करो,
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