00:00foreign
00:30foreign
01:00ौरब ।
01:30इस डिजिटल रिवॉल्यूशन का हिस्सा बन चुके है
01:32टीर टू और छोटे शेहरों से 60 फीसिदी से ज्यादा ओनलाइन खरीदार आ रहे है
01:36इसका मतलब साफ है
01:37इकॉमर्स अब गाओं कस्बों तक बहुत चुका है
01:40लेकिन जहां एक तरफ ये विकास हो रहा है
01:43ये डिवलप्मेंट हो रहा है
01:44वहीं दूसरी तरफ चोटे दुकांदारों की मुश्किलें भी बढ़ रही है
01:48फेडरेशन का आरोब है कि बड़ी इकॉमर्स कम्पनियां ऐसे तरीके अपना रही है
01:52जिससे लोकल दुकांदार मुकाबला नहीं कर पाई
01:54जैसे कि भारी डिसकाउंट देना
01:56कुछ चुनिंदा विक्रेताओं को प्रात्मिक्ता देना
01:59कुछ चुनिंदा कस्टमर्स को प्रायोरिटी देना
02:01लागत से भी कम कीमत पर सामान बेचना
02:03और सस्ते लेकिन कमजोर क्वालिटी वाले प्रोड़क बाजार में उतारना
02:24दुकानदारों के लिए ठीके रहना बेहत मुश्किल हो जाता है
02:27और इंडिया कंजियूमर प्रड़क्ट डिस्रिब्यूटर्स फेडरेशन के मुताबिक
02:30पिछले कुछ सालों में लाखों किराना स्टोर्स बंद हो चुके हैं
02:34मेट्रो शेहरों में लगभग 45 फीसदी और टीर वन शेहरों में लगभग 30 फीसदी दुकानों पर असर पड़ा है
02:39ये सिर्फ व्यापार का नुकसान नहीं है बलकि रोजगार पर भी सीधा असर डालता है
02:44क्योंकि देश का बड़ा हिस्सा आज भी छोटे व्यापार पर निर्फर है
02:48अब यही वज़ा है कि व्यापारी संगठन सरकार से मांग कर रहे हैं
02:51कि ये कॉमर्स कम्पनियों के लिए सक और पारदर्शी नियम बनाय जाएं
02:55ऐसा सिस्टम हो जहां छोटे और बड़े दोनों व्यापारियों को बराबरी का मौका मिले
03:00कीमतों में ट्रांस्परेंसी हो, किसी तरह का हेर फेर ना हो
03:04और नियम सभी पर समान रूप से लागू हो
03:06सीधी बात ये है कि तकनीक बुरी नहीं है और डिजिटल विकास भी जरूरी है
03:10लेकिन अगर ये विकास एक तरफा हो गया तो इसका फाइदा सिर्फ बड़ी कम्प्तियों को मिलेगा
03:15और नुकसान छोटे दुकानदारों को उठाना पड़ेगा
03:18देश के सामने असली चुनोती यही है कि डिजिटल और ट्रेडिशनल यानि पारंपरे बाजार के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा
03:26क्योंकि अगर यह संतुलन बिगड़ गया तो आने वाले समय में गली नुकड की दुकाने जिनसे हमारी रोज मर्रा की
03:32जिन्दकी जुड़ी हुई है
03:33सिर्फ यादों का हिस्सा बनकर रहचाएंगी
03:36अब सवाल आपसे क्या डिजिटल इंडिया की दौड में छोटे दुकानदार पीछे छूट जाएंगे
03:40या फिर कोई ऐसा रास्ता निकलेगा जिसमें सबका साथ और सबका विकास मुम्किन हो सके
Comments