00:00ये हैं देश के नागरिक जीतू मुंडा और इनके हाथ में जो शव है वह इनकी बहन का है कालरा
00:08का जिनकी मौत दो महिने पहले हो गई और ये हड्डियों का धाचा उनकी कब्र से निकाल कर भरी सडक
00:18में ले जाने पर मजबूर हुए बैंक के पास
00:22क्योंकि बैंक वाले जीतू की बात नहीं मान रहे थे कि उनकी बहन मर चुकी हैं वे बार-बार कह
00:29रहे थे कि खाता धारक को लाओ खाता धारक को लाओ और मजबूर जीतू को समझ नहीं आया कि वह
00:36कैसे अपनी मरी हुई बहन को लेकर आये
00:39लिहाजा वह गए कालरा के कबर पर कबर खोदी हड़ियों का धाचा निकाला और कंधे पर उठाकर चल पड़े बैंक
00:52की तरफ
00:52दो हजार चब्श में यह तस्वीर मोदी जी के विकास की क्रूर कहानी कहती है आदिवासियों को किस स्थिती में
01:03पहुचा दिया है किस तरह से सिस्टम रोज उनकी हत्या करता है उनका अपमान करता है इसकी जीती जाकती तस्वीर
01:11यह वीडियो है
01:13यहां क्यों किया ऐसा जीतू ने वजह उननिस हजार तीन सो रुपे जो उनकी बहन के खाते में थे और
01:23बहन देना चाहती थी अपने भाई को
01:26लेकिन बैंक वाले यह मानने को तयार नहीं थे क्योंकि डेट्स सर्टिफिकेट नहीं था
01:32लिहाजा वे बार बार जलील कर रहे थे जीतू को कि जाओ अपनी बहन को लेकर आओ
01:39जीतू को कुछ समझ नहीं आया पीडा समझिये दर्द समझिये और सिस्टम की क्रुवैलिटी समझिये
01:47यह सिस्टम किस तरह से ट्रीट करता है कि जीतू को मजबूर होके जाना पड़ा कबर पर
01:54खोड डाली जीतू ने रोते रोते अपनी बहन की कबर और हड़ियों का ढाचा लेकर चल पड़े बैंक की तरफ
02:03क्या देश की राष्टपती द्रौबदी मुर्मू जो आदिवासी हैं इस पर बोलेंगी कुछ
02:08क्या उडिशा के मुख्यमंत्री जो खुद आदिवासी हैं बोलेंगे कुछ
02:13क्यों जर में हुई यह घटना दरसल मोदी जी के डबल इंजन विकास की क्रूर कहानी कहती है
02:20जो आदिवासीों को इसी तरह से हड्डियों को ढोने पर मजबूर कर रहा है क्या आप बोलेंगे कुछ
02:27आपको क्या लगता है यह विकास हड्डियों के धाचे पर तिका हुआ विकास नहीं है
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