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फैक्ट्रियां बंद होने और रसोई गैस की मार ने हज़ारों मज़दूरों को गुजरात के सूरत से अपने गांव-घर लौटने पर मजबूूर कर दिया है। सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ उमड़ी है और उनकी व्यवस्था किए जाने की बजाय पुलिस-प्रशासन उनपर लाठीचार्ज कर रहा है। उधर गोदी मीडिया इसे गर्मियों की छुट्टियों का असर कहकर हक़ीक़त छुपाने की बेशर्म कोशिश कर रहा है।
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00:00आप नहीं आऊंगा दोस्त अब नहीं आऊंगा दोस्त इसमें कितना दर्ध है पीड़ा है आपने देखा इलाड़ी चार्ज ये गुजरात
00:15में सूरत के उध्रा
00:16रेलवे स्टेशन के दृश्य हैं यह है गुजरात मॉडल का सच जहां से हजारों मजदूर पलाइन करने को मजबूर हैं
00:25लेकिन आपने गोदी मीडिया के हेडलाइन देखी इसे गर्मियों की छुट्टियों का असर कहा जा रहा है जबकि पूरे देश
00:32समयत गुजरात में अ�
00:46मिदान शंशोदन और डिली मिशन बिल को महिला रक्षान बिल कहकर बेच देते हैं जो नौएड़ा के मजदूर आंदूलन में
00:52साजिश बताने लगते हैं उन्हें ही गर्मियों की छुट्टियों का असर दिखाई देगा छुट्टियों पर जाने वाला यह नहीं कहता
00:59अब
01:00नहीं आउंगा दोस्त और रेल्वी ने खुट माना है कि ऐसी अभूत्पूर भीड उसने पहली बार देख दिया यानि यह
01:06हर साल का मामूल नहीं है आपने कभी सुना है किसी फैक्ट्री में गर्मी की छुट्टियां होती हैं कुछ अकबार
01:12बले डके छुपे ढंक से वर्क
01:2710-15 दिनों के लिए फैक्ट्री मजदूरों की संख्या कम कर देते हैं मैई जून में वरना गुजरात में दिवाली
01:32के मौके पर गुजरातियों का नव वर्ष भी है उस पर छुट्टियां करते हैं लेकिन इस समय न दिवाली है
01:37न छट है जो यूपी बिहार के लोग अपने
01:57धीरे बढ़ता जा रहा है और इस बार गैस संकट के वज़े से ये चरम पर पहुंच गया है आपको
02:03पता है पश्चिमी एश्या का संकट इरान पर हमला जुद इसके चलते गुजरा सरकार ने तयारी या मैनेजमेंट के नाम
02:10पर क्या किया आप जानते हैं पहले उद्योग �
02:12दंदों के लिए इंडरिस्ट्रियल गैस में 50 फीजदी तक की कट उती की यानि इन फेक्ट्रियों का काम पहले ही
02:17आदा हो गया और फिर मजदूरों के सामने था रसोई गैस का संकट दिल्ली हो या कोई और जगा सब
02:23जगह गैस सिलिंडर की मारा मारी है या तो मिल नी रहा �
02:26या फिर 300-400 रुपए किलो गैस भरवानी पढ़ लगी है यही वज़ा है कि ऐसे ही दिल्ली में देखे
02:32मुंबई में देखे और सूरत में देख रहे हैं जितने भी बड़े अद्दोगिक शित्र हैं सबी जगह यही हालात है
02:38मजदूरों के सामने जीने मरने की नौबत है यह
02:41ही वज़े है कि अपने हालात से परिशान होकर कहीं मजदूर पलायन कर रहे हैं और कहीं आंदूलन इस सब
02:47को एक साथ रखकर देखेंगे तो समझ आएगा कि संकट कितना बड़ा है जो आप से छुपाया जा रहा है
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