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नोएडा में मज़दूरों की आवाज़ सुनने की जगह सरकार उनके आंदोलन में ही साज़िश तलाश रही है। पत्रकारों, एक्टिविस्टों को मास्टरमाइंड कहकर पकड़ा जा रहा है।
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00:00गिर गिर के समल जाते हैं मजदूर के बच्चे, सडकों पे ही पल जाते हैं मजदूर के बच्चे, जब मांगते
00:06हैं अपनी वो मेहनत का खरादाम, दुश्मन में बदल जाते हैं मजदूर के बच्चे.
00:11जिहाँ अब नौएडा में यही हो रहा है अपना हक मांगने वाले मजदूर अब दुश्मन में बदल गए हैं
00:17उनके आंदोलन की पीछे तरह तरह की साजिशे डूनी जा रही है
00:20पत्रकार बहुत देख एक्टिविस्ट को मास्टर माइंड कहकर पकड़ा जा रहा है
00:24तेरा अप्रेल को नौएडा में जो मजदूर आंदोलन हुआ पहले उसके तार पाकिस्तान से जोड़े जा रहे थे
00:31अब पश्ममंगाल और तमिलनाडू से जोड़कर राजनेतिक साजिश भी तलाशी जा रही है
00:35क्यों क्योंकि दोने जोगे चुनाओ है
00:37तमिलनाडू से नौएडा निवासी एक साफ्टवेर इंजीनियर आदित्य आनंद को गृफ्तार किया गया है
00:42इस से पहले एक जनवादी पत्रकार सक्त्यम वर्मा को उठा लिया गया था
00:46तमाम मजदूर पहले ही गृफ्तार कर लिये गये हैं
00:49कई का अब तक पता नहीं वह घर नहीं लोटे हैं
00:52मीडिया हेडलाइन बना रहा है कि आरोपी अदित्य ने गुना कबूला
00:55क्या गुना किया मजदूरों के हक में आवाज उठाई क्या यह गुना है
00:59उनके आंदोलन में उनके साथ खड़ा होना क्या गुना है
01:02लेकिन अब मोदीयोगी सरकार में यही गुना हो गया है
01:06किसान आंदोलन करें तो खालिस्तानी
01:08मजदूर आंदोलन करें तो पाकिस्तानी
01:10अल्टरलेट भीमा कुरेगां हो तो अर्बन अकसल
01:13शाहिन बाग हो तो कोई और साजश
01:15इस सरकार को हर आंदोलन में साजिश नजर आती है
01:19अब मानिसर से नॉड़त के तार जुड़ जा रहे हैं
01:21पता नहीं कौन सी कमपनी का चश्मा लगा रखता है
01:24मजदूरों से जुड़े तमाम संगठन इन्हें अपने
01:27यानि सरकार और मालिकों के दुश्मन नजर आते हैं
01:29कहा जा रहा कि कई महीने पहले से इसकी साजिश की जा रही थी
01:32जबकि हम सब जानते हैं महीनों से नहीं
01:35सालों से मजदूर अपनी मांगो को लेकर आंदोले थे हैं
01:39उन्हें ना समय पर सेलरी मिलती है, ना इंक्रिमेंट, ना काम के घंटेते हैं, ना कोई और सुरक्षा, उपर से
01:45अब चार लेबर कोट और थुप दिये गए है, इस सब को लेकर कप से हवाई उठाई जा रही है,
01:49राश्ट व्यापी हर्ताले तक की गई, लेकिन कोई सुनवा�
01:54उग्र हो जाते हैं, तो उसमें साजिश तलाशे जाती है, मैं तो कहूंगा कि सब के सब खामोश हैं, तुम
02:01ही कहो, बोलो सरल, कौन खा जाता है मेहनत का मेरे हिस्से कफल, और राद दिन खटकर भी हम नाकाम
02:08हैं, नाशाद हैं, जो हमारा सर पलस खाते, वो कहलाते सफल,
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