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बेबाक भाषा के ख़ास कार्यक्रम Decoding RSS में प्रसिद्ध लेखक और मानवाधिकार कार्यकर्ता राम पुनियानी ने तमिलनाडु और RSS की Politics पर बात की। बताया कि लाख कोशिशों के बावजूद RSS तमिल समाज में घुसपैठ नहीं कर पाया है जिस वजह से BJP की वहां दाल नहीं गल पा रही है।
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00:03दोस्तो बेबाग भाशा पर आपका स्वागत है
00:07बेबाग भाशा में आज डिकोडिंग RSS की श्रंखला में हम बात करेंगे
00:13तमिल नाडू में RSS का क्या रोल है, कितनी शक्ति है और वहां के BJP को कितना मदद कर रही
00:20है
00:24ऐसी दिखा जाए, तो RSS वहां 1940 से ही उसने अपनी शाखाएं खोलना चालो किया
00:31पर उनका प्रभाव बहुत ज्यादा नहीं रहा
00:34अभी पिछले दो साल से उन्होंने ज्यादा जोर लगाया है तमिल नाडू पर ज्यादा शाखाएं खोलने में
00:42और जो शाखाएं पहले पंद्रा सो थी अभी तीन हजार के करीब हो गई है
00:47तमिल नाडू में मुख्य अवरोद क्या रहा है RSS के लिए
00:51पहली बात तो जो RSS की हिंदुत की कल्पना है उसमें आरे नसल का बहुत महत्व है
00:58तमिल नाडू में तमिल राष्ट्रवाद और जो चीजे आरे इससे अलग है उसका ज्यादा महत्व है
01:07तमिल में जो खोजे हुई है वो भी इनको हडपा मोहिंजदरोडो की संस्क्रत से जोडती है
01:14जबकि RSS का मानना है कि हडपा मोहिंजदरो ये तो आरे सब्विता का भाग है जो पूरी तोर से गलत
01:22है
01:23एक्चली वास्ताव में RSS आरे लोग जो आये वो हडपा मोहिंजदरो की संस्क्रती के नश्ट होने के बाद ही आये
01:30थे
01:30तो एक तो बात ये है और दूसरा इसका जो उत्तर भार्कती एक तरीका है उस तरीके से तमिलनाडू के
01:38लोगों को काफी नाराज़ गी है
01:39तीसरी बात है इसका जिस प्रकार के हिंदू धर्म पे जोर है उसका बहुत बड़ा विरोध पेरियार रामा स्वामी नायकरने
01:47किया था
01:48पेरियार तमिलनाडू के एक बहुत महत्पूर नेता रहे हैं जिन्नोंने नकिवल नास्तिकता का बलकि सेल्फ रिस्पेक्ट खुद के लिए आदर
01:58इस प्रकार का एक हंदोलन शुरू किया था
02:01जो महिलाओं के सिल्फ रिस्पेक्ट से जुड़ा था महिलाओं के अधिकारों की वो काफी हिमायत करते थे
02:08साथी साथ वर्ण विवस्था जाती विवस्था इसका भी बहुत विरोध था
02:13तो एक वहिचारी कारणों से जो PDR की परंपरा वहाँ चली है जिसके कारण बाद में द्रविड कजगम डी के
02:21बनी फिर डीम के बनी वो एक प्रवार रह गया जो RSS के विचारों से पूरी तरस से असहमत है
02:29पूरी तरस से विरोध में है
02:31फिर भी RSS में कोशिश की और बाद में जब DMK के दो टुक्रे हुए और उसमें AIDMK के निकला
02:39जिसमें हम जानते हैं कि जो जैलालिता उसकी लीडर थी जिनकी बाद में मृत्ती हुई या जो भी हुआ
02:46तो उसके बाद से ये खोज में थे कि कौन सा ऐसा नेता है तमिलाणू में जो थोड़ा सा इनके
02:54साथ ताल मेल पिठा सकता है
02:56तो खेर तमिलाणू में इसकी सम्भावना तो वैसे काफी कम थी और इसलिए BJP का वहां अस्तित नाम मात्र के
03:05लिए रहा है
03:05फिर भी RSS पिछले दो सालों से अपनी शाखाओं के संख्या बढ़ा रही है जैसे मैंने का अभी उनकी शाख्यां
03:12के संख्या तीन हजार हो गई है
03:14और मुक्के रुट से जो काम करते हैं एक तो यात्राय निकाल के करते हैं परेड निकाल के करते हैं
03:21तीसरा कॉलेज की गतिविदियों से जुड़ते हैं जो सनातन के नाम तकी जाती है
03:29बैसे बता दूँ कि तमिलाडोईव ये वो प्रदेश है जहां सनातन के लिए अभी स्टालिन के बेटे ने कहा था
03:37सनातन तो वो एक बहुत बुरी चीज है उसकी उन्होंने उपमा कई बीमारियों से दी थी
03:43तो खैर ये एक पक्ष है तो सनातन के नाम पे तो आरेसस वहाँ चलने से रहा तो वो फिर
03:49गोल मौल भाशा में जो बात करते हैं धर्म की और उसके आधार पे लोगों को जोड़ने की कोशिश करते
03:56हैं एक तो सेवा के माद्यम से दूसरा विध्यार्थियों के बीच में पहु
04:13जोड़ने की कोशिश करते हैं तो मौल रूप से तमिल लाडू में जो ज़्यादा प्रचलित विचारधारा है वो आरेसस की
04:20विचारधारा से काफी विरोध में है जैसे आरेसस हमेशा हिंदी का बुद्धा उठाती रही है और तमिल लाडू एक प्रदेश
04:28है जिसने हिंद
04:29का पूरा पूरा विरोध शुरू से किया था और अभी भी जो केंद्रिय सरकार की नीतियां हैं हिंदी के बारे
04:37में आरेसस की जो बात है हिंदी के बारे में उसका भी विरोध करते हैं तो खैर यह एक चीज़
04:43है जिसके कारण तमिल लाडू में उनका उतना विस्तार नहीं ह
04:50बेज़कर अलग-अलग ख्षेत्रों में खास्ताव से ब्रामिन ख्षेत्रों में अपनी व्रद्धी करना चाह रहे हैं और सुन मुख्य रूप
04:58से जो इनके मदुरई हैं, कोयमतूर है और चिन्नाई के तीन जगों पी इनकी मुख्य गतिविदिया चलती हैं।
05:06चिन्नाई में पहले और भी इन्होंने 20-25 साल एक प्रयोग किया था, वहां के हर स्लम में जाकर विनायक
05:15की यानि गणपती जी की मूर्तियां बाटकर वहां इसका प्रोग्राम करना।
05:21यह जब हुआ तो विनायक के नाम से इन्होंने काफी वहां खर्चा किया, स्थानी जगाओं पर गणपती जी, गणेश जी
05:30की मूर्तियों के आधार पर त्यवार किये और उत्तर भारती जो धार्मिक सांस्कृतिक परंपरा है, उसको वहां उन्होंने लाने की
05:39कोशिश की।
05:40इस पे काफी अध्यन भी हुआ है, जो काफी महतपूर्ण है कि कैसे यह चेन्नाई में, चेन्नाई के आसपार के
05:47शत्रों में, इन्होंने दलितों के बीच में तथा कथित जो सनातन मूल्य हैं और हिंदू देवी देवता हैं, उनको परचार
05:55करने की कोशिश की है। फिर भी
06:08अभी उसकी शाखाओं की संख्या बढ़ गई है, कारेकरम ज्यादा कर रहे हैं और कारेकरम ये विध्यार्थियों के बीच में,
06:15गाउं में ज्यादा कर रहे हैं और उससे जो बैक अप मिलता है, वो BJP को उससे एक सहरा मिलता
06:23है, एक संबल मिलता है, एक मजबूती जो मिलती
06:26है वो RSS के काम सही मिलती है तो उम्मीद करेंगे कि आने वाले समय में सब लोग जो भारती
06:34संस्कृती के मुल हैं उसके आधार पर देश को जोड़ने की कोशिश करेंगे और जो RSS का इरादा है हिंदु
06:41राष्ट का हिंदुतु का और जिसमें आरे नसल का काफी बड़ा जगा
06:45है उसके बदले एक जो जैसे आज कल हम जानते हैं कि अरे पहले आए थे आरे बाद में आये
06:55थे यह नसलों का कोई महत्व बहुत नहीं होना चाहिए जितना महत्व हमारी भारक की नागरिकता का होना चाहिए खैर
07:03उमीद करते हैं कि आप इस वीडियो को लाइक करेंगे शेय
07:10आपको बहुत जन्यवाद, thank you very much.
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