00:00سوچنے والی بات ہے, کیا کوئی شہر ہمیشہ کیلئے زندہ رہ سکتا ہے؟
00:04چلیں, آج ہم ملتان کی کہانی میں اسی سوال کا جواب ڈھونتے ہیں
00:08ایک ایسا شہر جو ہزاروں سال سے وقت کے ہر طوفان کا مقابلہ کرتا آ رہا ہے
00:14پانچ ہزار سال
00:16ذرا اس عدد پر غور کریں, یہ صرف ایک نمبر نہیں ہے
00:19یہ عمر ہے ایک ایسی تحزیب کی جو وادی سندھ جیسی قدیم ترین تحزیبوں کے ساتھ
00:26پلکل ان کے برابر کھڑی ہے
00:28ཤو پھر سوال یہی اٹھتا ہے
00:30آخر کوئی شہر لازوال
00:32یعنی اٹرنل بنتا کیسے ہے
00:34ایسی کیا خاص بات ہوتی ہے اس میں
00:36وہ کیا چیز ہے جو
00:37اسے حملہوروں سے بدلتی سلطنتوں سے
00:40اور سب سے بڑھ کر
00:41وقت کی دھول سے بچا کر زندہ رکھتی ہے
00:44اس جواب کو سمجھنے کے لیے
00:45ہم ملتان کے سفر کو چار حصوں میں دیکھیں گے
00:48پہلے اس کی پانچ ہزار
00:50سالہ داستان پھر دیکھیں گے
00:52कि ये ओलिया का शहर कैसे बना, फिर इसकी दौलत यानि सोने का शहर होने की कहानी और आखिर में
00:58इसका वो विर्सा जो आज भी जिन्दा है, तो चलिए सफर शुरू करते हैं इस शहर की बिलकुल इप्तिदा से,
01:05इसकी गहरी जड़ों से, आपको पता है, मुल्तान का सबसे क�
01:10अधिम नाम था मुल्स्थान, ये संस्कृत का लवज है और इसका मतलब है असल जगा, दि ओरिजिनल प्लेस, ये नाम
01:18ही काफी है इसकी कदामत बताने के लिए, बलके कुछ मुरखीन तो ये भी कहते हैं कि इसका तालुक कदीम
01:24सूरज देवता के मंदर से था, यानि इसकी �
01:27रुहानी एहमियत शुरू से ही थी, इसकी तारीख का कैनवस तो बहुत ही वसी है, जरा देखें, इसकी जड़ें तीन
01:35हजार कबली मसी, यानि वादी सिंद की तहजीब तक जाती हैं, फिर 326 कबले मसी में सिकंदर आजम की फौजों
01:42से इसका टकराओ हुआ, वहां मालोई क�
01:45पीले ने क्या खूब मकाबला किया था, और फिर 712 ऐस्वी में महम्मद बिन कास्म की आमद के साथ इस
01:52शहर की तारीख में एक बिलकुल नया इसलामी दोर शुरू हुआ, लेकिन मुलतान की जो असल पहचान है वो उस
01:59वक्त बनी, जब ये तलवारों और तिजारत के शोर से
02:02निकल कर रोहानियत के सुकून में दाखिल हुआ, इसलामी दोर में मुलतान को एक नया लकब मिला, जो आज भी
02:09इसकी सबसे बड़ी पहचान है, मदीना तुलिया, यानी The City of Saints, और ये सिर्फ एक टाइटल नहीं था, ये
02:17उस पूरे सकाफती और रोहानी इनकलाब की निशान
02:35ये सिर्फ नाम नहीं है, ये वो सुतून है जिन पर मुलतान की पूरी रोहानी इमारत खड़ी है, और इन
02:43बुजर्गों का विर्सा सिर्फ मजारों या इमारतों तक महदूद नहीं, नहीं, उनकी तालिमात ने मुलतान के लोगों के अंदर मजभी
02:52रवादारी, मुहबत औ
02:54और भाईचारे को जनम दिया, और ये ही वो चीज़े हैं जो किसी भी मुतनवे शहर को जोड़ कर रखती
03:00हैं, रोहानीत ने तो मुलतान को एक रूँ दी, ठीक है, लेकिन इसकी जो माशी ताकत थी ना, उसने इसे
03:06एक जिसम दिया, ये तिजारत और दौलत का भी एक जबर�
03:11अच्छा, तो मुलतान की इस दौलत का रास क्या था? वो था इसका जिगराफियाई महले वुकूग, जरा तसवर करें, ये
03:19वस्ती एशिया, एरान और मश्रिक वुस्ता को बरे सगीर से जोडने वाले तिजारती रास्तों के बिलकुल बीच में था, इसका
03:27नतीजा, यहां क
03:28बाजार हमेशा दुनिया भर के ताजरों और समान से भरे रहते थे, और इसी वज़ा से सोने का शहर भी
03:35कहा जाता था, अब जब दौलत हो और स्ट्रिटीजिक लोकेशन हो, तो बड़ी-बड़ी सल्तनते तो नजर रखेंगी ही, घजनवियों
03:42से लेकर डेहली सल्तनत और फ
03:58चले देखते हैं कि ये तारीख आज के मुल्तान में कैसे सांस लेती है, देखें, मुल्तान का विर्सा सिर्फ किताबों
04:06में नहीं, इसकी रोज मर्रा जिंदगी में है, फन तामीर की बात करें, तो शाह रुकने आलम का मगबरा है,
04:13जो दुनिया भर से लोगों को खेंचता ह
04:14जुरात में तो भई आमो की तो क्या ही बात है, आमो का दारुल हुकूमत के नाम से मशूर है,
04:21और दस्तकारी में उसकी जो नीली टाइलों का काम है, जो काशी कारी है, उसकी शोहरत तो पूरी दुनिया में
04:27है, तो आखिर में बात ये है कि मुल्तान सिर्फ एक शहर नहीं है
04:32This is a life-in-law. It has thousands of years of life. It has been a thousand years of
04:37life. But it has a self-inventure and a self-inventure. It has a life-in-law. It has a
04:48real reality. It has a real reality.