00:00क्या ऐसा हो सकता है कि तारीख की सबसे सफाक समझी जाने वाली सल्तनत अपने वक्त की सबसे ज्यादा रवादार
00:07भी हो।
00:08सुनने में ये बहुत अजीब लगता है ना लेकिन आज हम मंगोलों की इस हैरान कुन काम्याबी के पीछे चुपे
00:15उसी राज से परदा उठाएंगे। ये वो कहानी है जो अक्सर तारीख की किताबों में हमें पढ़ने को नहीं मिलती।
00:39तो फिर सवाल ये पैदा होता है कि खाना बदोशों का एक ग्रोह जो बजाहिर सिर्फ तलवार के जोर पर
00:45आगे बढ़ रहा था वो दुनिया पर च्छा जाने वाली एक हाईपर पावर में कैसे बदल गया इसका राज सिर्फ
00:53उनकी तलवारों में नहीं था बलकि एक ऐसी ह
00:55खिकमत अमली में था जिसकी उस दोर में किसी को तवक्को ही नहीं थी और यहीं पर आकर कहानी दिल्चस्प
01:02हो जाती है यहीं वो तजाद है जो मुंगोल सल्तनत के बिलकुल मरकज में है एक तरफ उनकी वहश्याना शोहरत
01:09और दूसरी तरफ एक आलमी ताकत के तोर पर उनक
01:25एक ऐसी ताकत होती है जो फौजी, मौशी, हर लिहाज से बाकी सब पर इसकदर हावी हो जाए कि दुनिया
01:32पर उसी का राज हो और मंगोल सिर्फ एक हाइपर पावर नहीं थे बलके वो इस तारीफ की एक चलती
01:39फिरती मिसाल थे अच्छा इसको जरा परस्पेक्टिव में र
01:55सलतनत बनाई यानि उन्होंने जो किया वो सिर्फ फतुहात नहीं थी बलके पूरी दुनिया की शकल बदल कर रखती थी
02:02तो आखर वो कौन सा खुफ्या हत्यार था जिसने उन्हें ये सब हासल करने में मदद दी जवाब सुनकर शायद
02:09आपको यकीन नाए वो थी रवादार
02:12जी हां रवादारी आईए देखते हैं कि इस एक लवज ने उनकी सलतनत की बुनियाद कैसे रखी एमेचोवा अपने किताब
02:20में यही दलील देती हैं कि मंगोलों की काम्याबी का असल राज उनकी बेमिसाल रवादारी में छुपा था ये सिर्फ
02:27कोई अच्छी बात नहीं �
02:28बलके एक सोची समझी हिकमत अमली थी जिसने उन्हें ना सिर्फ अपनी सलतनत को जीतने बलके उसे काइम रखने में
02:35भी मदद की अब यहां एक बात समझना बहुत जरूरी है ये आज कल वाले इंसानी होको का तसवर नहीं
02:42था इसे एक बहुत ही स्मार्ट बिसनिस डील समझ
02:45मंगोलों का मकसद ये था कि जो इलाके फता किये हैं वहां के सबसे काबिल और हुनरमंद लोगों इंजिनियर्स डॉक्टर्स
02:53कारीगरों को सलतलत का हिस्सा बनाया जाए और बगावत के इमकान को जड़ से खत्म कर दिया जाए तो इससे
02:59हुआ क्या सीधी सी बात है रवाद
03:15उनकी सलतनत दिन बदिन मजबूत होती चली गई लेकिन इतनी बड़ी और मुख्तलिफ किसम के लोगों से भरी सलतनत को
03:23सिर्फ बाहर की पॉलिसी से तो नहीं जोड़ा जा सकता ना इसे अंदर से जोड़ कर रखने के लिए किस
03:29चीज़ की जरूरत थी उसका जवाब मंगोल
03:32कल्चर की एक बुन्यादी कदर में है वफादारी मंगोल मौशे में जुबान की बहुत कदर थी आपका कहा हुआ लवज
03:40ही आपकी जमानत था ये सिर्फ कोई जाती उसूल नहीं था बलकि ये वो बुन्याद थी जिस पर पूरी सलतनत
03:46की इमारत खड़ी की गई थी और इस �
03:50सबसे बड़ी मिसाल सबसे जीती जागती तस्वीर हमें मिलती है चंगेज खान यानी तैमोजन और उसके पहले साथी बोर्चो की
03:58कहानी में इनका रिष्टा असल में मंगोल सलतनत के अंदरूनी इस तहकाम की अलामत है कहानी कुछ यू है कि
04:05जब नौजवान तैमोजन के घ
04:06भोड़े चोरी हुए तो बोर्चो ने बदले में कुछ मांगे बगएर उसकी मदद की उसने इनाम लेने से इनकार कर
04:13दिया और तैमोजन का साथी बन गया एक तूफानी रात में उसने पूरी रात खड़े होकर तैमोजन को बारिश से
04:20बचाया यही वो गयर मुतजल्जल व
04:36पहतराम की तवक्कु रखता था यह सिर्फ कोई कानून नहीं था बलकि यह वो गोन था जिसने मंगोल फौज और
04:42इंतजामिया को जोड़कर एक ऐसी एकाई बना दिया जिससे हराना नामुम्किन था तो आखिर हम मंगोलों की इस काम्याबी से
04:49क्या सीख सकते हैं उनकी सल्त
04:51दो बुनियादी सुतूनों पर खड़ी थी यह दोनों बजाहर एक दूसरे से मुख्तलिफ लगते हैं लेकिन मिलकर एक ऐसा फौरमिला
04:59बनाते हैं जिससे शिकस्त नहीं दी जा सकती तो यह था मंगोल फौरमिला बाहर की दुनिया के लिए स्ट्रटीजिक रवादारी
05:06जिस
05:19सिर्फ एक हिकमत अमली की नहीं थी बलकि इन दोनों चीजों के मिलाप की थी बाहर की दुनिया के लिए
05:25खुलापन और अंदर से चट्टान जैसी मजबूती इसी मुनफरिद इम्तिजाज ने एक खाना बदोश कौम को दुनिया पर गलबा पाने
05:33का मौका दिया जो इनसानी
05:48कदरों की कमी उन्हें ले डूपती है? तारीख हमें इस बारे में क्या सिखाती है? ये एक ऐसा सवाल है
05:54जो आज भी उतना ही एहम है जितना सदियां पहले था.
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