00:08बिहार में अभी अप्रेल का महीना ही चल रहा है। इन सूरज के देवर ऐसे हैं जैसे जून की तपिश।
00:30पर दिख रहा है। काम पर निकले लोग सीधे अस्पताल पहुँच रहे हैं। और आएके रहने वाले नरेंद्र कुमार भी
00:37इसी का शिकार हुए। चार दिनों तक अस्पताल में भरती रहना पड़ा और करीब 9 बोतल सलाइन चड़ने के बाद
00:44उनकी जान बची। डॉक्टर
00:46अब उन्हें पूरी तरह बेड्रेस्ट की सलाह दी रहे हैं। यहाल सिर्फ एक मरीज का नहीं है। मुदफरपुर के सदर
01:08अस्पताल और SKMCH में हर तरफ मरीजों की लंबे कतारे हैं।
01:13रोजाना एक हजार से ज्यादा मरीज सिर्फ गर्मी जनत बिमारियों के कारण OPD पहुँच रहे हैं। सबसे जादा चिंता बच्चों
01:21की है। उनकी रोग अप्रतिरोधक्षमता कम होने के कारण वे जल्दी बिमार पड़ रहे हैं। सर्दी, खांसी, बुखार के साथ
01:28साथ
01:29उल्टी और दस्त के शिकायतें घर-घर में देखने को मिल रही हैं।
01:59सबसे बड़ा इलाज है। दोपहर बारा से चार बज़े के बीच घर से बाहर न निकलें और यदि निकलना जरूरी
02:06हो तो सिरधक कर और पाने साथ लेकर ही निकलें।
02:29आनी चम की बुखार का डर भी लाती है।
02:31हलाकि पिछले दो सालों से स्थिती नियंटर में हैं लेकिन 2019 का वो मंजर आज भी याद है जब सैकडों
02:38बच्चों ने जान गवाई थी।
02:40टॉक्टर ग्याने इंदु कुमार की अनुसार बढ़ती गर्मी को देखती हुए स्वास्ते विभाग पूरी तरह से तैयार है।
02:46लोगों को सतरकता बरतने के लिए जागरुख भी कर रहा है और अस्पताल में इलाज की पूरी व्यवस्था की गई
02:52है।
02:53मुजफर पूर से ETV भारत के लिए विवेक कुमार की रिपोर्ट
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