Skip to playerSkip to main content
  • 14 hours ago
देसी घी, पिंड खजूर और मखाने का वादा अधूरा

प्रत्येक महिला पर 1064 रुपए खर्च का प्रावधान, अब तक लाभार्थी वंचित

सवाईमाधोपुर. मुख्यमंत्री सुपोषण न्यूट्री किट योजना पर सरकार कुण्डली मारकर बैठी है। राज्य सरकार ने गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से बचाने के लिए भले ही मुख्यमंत्री सुपोषण न्यूट्री किट योजना शुरू हो मगर जिले में पोषण किट का अब तक वितरण नहीं हो पाया है। नजीजन, न तो सकार की मंशा पूरी हो रही है और न ही पात्र गर्भवती महिलाओं को पोषण किट उपलब्ध हो पा रहा है। उधर, प्रदेश के कई जिलों में किट का वितरण शुरू हो गया है लेकिन जिले में अब तक नहीं पहुंचे है। पिछले साल जुलाई में बड़े वादों और दावों के साथ इस योजना की शुरुआत की थी, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार मिल सके और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधर सके। लेकिन दस माह बीत जाने के बाद भी जिले में एक भी महिला तक न्यूट्री किट नहीं पहुंची। देसी घी, पिंड खजूर और मखाने जैसी पौष्टिक सामग्री वाली तीन किलो की किट का वादा तो किया गया, मगर टेंडर प्रक्रिया में अटकाव ने योजना को ठप कर दिया।सरकार ने पिछले साल जुलाई में योजना शुरू की थी।

यह था योजना का उद्देश्य

राज्य सरकार ने प्रदेश की आर्थिक रूप से कमजोर और मजदूरी करने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए वर्ष 2025-26 में मुख्यमंत्री सुपोषण न्यूट्री किट योजना चालू की थी। ताकि माताओं और बच्चों दोनों को कुपोषण से बचाया जा सकें। योजना को जुलाई 2025 में चालू होना था। महिला एवं बाल विकास विभाग को इसको लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। योजना यूनिसेफ की पोषण गाइडलाइंस के आधार पर तैयार की गई थी और इसे आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से लागू किया जाना था। लेकिन जिले में इस योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सकता है। इससे जिले की हजारो महिलाएं पोषण किट से वंचित हो रही है।
हर लाभार्थी महिला पर 1064 रुपए खर्च होन है खर्च

इस योजना में प्रत्येक लाभार्थी महिला पर 1064 रुपए खर्च करने का प्रावधान है। इसका सबसे अधिक लाभ ग्रामीण और दूर दराज क्षेत्रों की निर्धन गर्भवती महिलाओं को मिलने की उम्मीद जताई है। इस न्यूट्री किट में कुल छह प्रकार की पौष्टिक खाद्य सामग्री शामिल की है। इसमें प्रोटीन, आयरन, कैिल्श्यम और विटामिन जैसे आवश्यक पोषण तत्व शामिल किए है। इस किट का कुल वजन 3 किलो तय किया है। खास बात यह है कि इन खाद्य पदार्थो को स्थानीय जलवायु और महिलाओं की पोषण आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर चुना गया है। इससे महिलाओं का खून बढेगा साथ ही प्रजनन शक्ति भी बढे़गी।
अभी मिल रहा है केवल पोषाहार
आंगनबाड़ी केंद्रों पर मध्यम व निम्न वर्ग की गर्भवती महिलाएं पंजीकृत होती हैं। जिले में वर्तमान में 1140 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित है। इन पर 7 हजार 659 गर्भवती महिलाएं पंजीकृत है। फिलहाल इनको महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से केवल पोषाहार ही दिया जा रहा है।
किट में यह किया शामिल...
सामग्री न्यूट्रीकिट

पिंड खजूर 500 ग्राम
देशी घी 1000 ग्राम
रोस्टेड मूंगफली 500 ग्राम
रोस्टेड चना 500 ग्राम
गुड(लड््डूवाला) 100 ग्राम
फूल मखाना 100 ग्राम
एक्सपर्ट व्यू…
इनका कहना है...
मुख्यमंत्री सुपोषण न्यूट्री किट योजना की घोषणा के बाद भी जिले में एक भी महिला तक किट नहीं पहुंची है। यह स्थिति केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि मातृ-शिशु स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है। योजना का मकसद था कि गर्भवती महिलाओं को अतिरिक्त पोषण मिले, लेकिन आज महिलाएं सिर्फ सामान्य पोषाहार पर निर्भर हैं। सरकार ने योजना को लागू करने का वादा किया था, लेकिन हकीकत में यह सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई। ऐसे में जिले की हजारों महिलाएं इस योजना से वंचित हैं और संगठन अब मुख्यमंत्री के नाम जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपेगा।

गरिमा राजावत, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष, अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ एकीकृत सवाईमाधोपुर

Category

🗞
News
Transcript
00:04Snoring
00:05Snoring
00:06Snoring
00:06Snoring
00:07Snoring
Comments

Recommended