अभियान कागजों पर, बच्चों का ठहराव अधूरा, प्रवेशोत्सव की चमक फीकी
सवाईमाधोपुर. सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने बड़े‑बड़े अभियान चलाए, हजारों अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी, लाखों रुपए उनके यात्रा कार्यक्रमों और प्रचार योजनाओं पर खर्च किए। मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान के तहत प्रवेशोत्सव को डिजिटल ऐप से जोड़ा और यह दावा किया गया कि 3 से 18 वर्ष तक के हर बच्चे को विद्यालय में नामांकित कर शत‑प्रतिशत ठहराव किया जाएगा। लेकिन समीक्षा रिपोर्ट ने इस पूरी कवायद की असलियत उजागर कर दी। अपेक्षित बढ़ोतरी तो दूर, कई विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या सौ से भी अधिक घट गई। परिणामस्वरूप प्रदेशभर के 175 विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जिनमें सवाईमाधोपुर जिले के भी पांच विद्यालय शामिल हैं।
जिले में नामांकन में ये स्कूल रहे फिसड्डी
जिले में प्रवेशोत्सव के तहत गंगापुरसिटी के पीएमश्री राजकीय उमावि में वित्तीय वर्ष 2025-26 में 950 छात्र-छात्राओं का नामांकन था जबकि वित्तीय वर्ष 2026-27 में यह घटकर 675 ही रहा। पिछले साल के मुकाबले इस बार नामांकन -275 रहा है। इसी प्रकार चौथकाबरवाड़ा के राउमावि में वित्तीय वर्ष 2025-26 में नामांकन 1075 था, जो इस बार घटकर 900 रहा। पिछले साल के मुकाबल इस बार नामांकन -175 रहा। वहीं गंगापुरसिटी के राउमावि में गत वर्ष प्रवेशोत्सव के तहत नामांकन 823 था जो इस बार घटकर 690 रहा। पिछले साल की तुलना में इस बार नामांकन -142 रहा है। जिला मुख्यालय पर राजकीय उमावि मानटाउन भी नामांकन भी फिसड्डी रहा है। विद्यालय में जहां पिछले साल प्रवेशोत्सव के तहत नामांकन 601 था। वह इस बार घटकर 493 रहा है। पिछले साल के मुकाबले नामांकन का अंतर -108 रहा है। इसी प्रकार पीएम श्री राजकीय उमावि सवाईमाधोपुर में पिछले साल नामांकन 673 था। वह इस बार घटकर 568 रहा। नामांकन का अंतर -105 रहा है। अभियान की चमक, नतीजा रहा फीका प्रवेशोत्सव कार्यक्रम को लेकर शिक्षा विभाग ने मार्च और अप्रेल में कई बार दिशा‑निर्देश जारी किए। अधिकारियों को ग्राम पंचायत से लेकर नगर निगम तक क्षेत्रों का आवंटन कर प्रभावी कार्ययोजना बनाने का आदेश दिया। लेकिन अधिकांश अधिकारी केवल खानापूर्ति कर लौट आए। लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद अभियान की चमक केवल कागजों तक सीमित रही। जमीनी स्तर पर न तो बच्चों तक पहुंच बनाई गई और न ही अभिभावकों को विद्यालयों की ओर आकर्षित करने के लिए ठोस प्रयास हुए। परिणाम यह हुआ कि अभियान का असर नगण्य रहा और नामांकन में गिरावट दर्ज हुई।
नोटिस थमाकर मांगा स्पष्टीकरण
शाला दर्पण रिपोर्ट में सामने आया कि कई विद्यालयों की सहभागिता अत्यंत कम रही। प्रवेशोत्सव अभियान के दौरान नामांकन में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई, बल्कि पिछले वर्ष की तुलना में कमी दर्ज की गई। इसे विभाग ने उदासीनता और आदेशों की अवहेलना माना है। शिक्षा विभाग ने 175 विद्यालयों के संस्था प्रधानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें सवाईमाधोपुर जिले के भी पांच विद्यालय शामिल हैं। वहीं स्कूलों से स्पष्टीकरण मांगा है। कागजों तक ही सीमित रहा अभियान सरकार ने नामांकन बढ़ाने के लिए लाखों रुपए खर्च किए, हजारों अधिकारियों को जिम्मेदारी दी, लेकिन नतीजा उल्टा निकला। सवाल यह है कि जब अभियान और आदेशों के बावजूद नामांकन घट रहा है, तो जिम्मेदारी केवल विद्यालयों की है या उन अधिकारियों की भी जिन्होंने योजनाओं को कागजों तक सीमित कर दिया। कई अधिकारी केवल क्षेत्र में जाकर खानापूर्ति कर लौट आए और प्रभावी कार्ययोजना बनाने का प्रयास नहीं किया। प्रवेशोत्सव की असफलता ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए है। अब सवाल उठता है कि जब सरकार की ओर से योजनाओं और अभियानों पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, तो आखिर क्यों विद्यालयों में नामांकन घट रहा है।
पिछले साल के मुकाबले नामांकन घटा है। प्रवेशोत्सव के तहत कम नामांकन वाले जिले के स्कूलों से भी स्पष्टीकरण मांगा है। नोटिस देकर नामांकन बढ़ाने के निर्देश दिए है। मीना लसारिया, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, सवाईमाधोपुर
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