00:00अरे हीरन भाई हीरन भाई कहां से आये हो तुम
00:05अरे मित्र मैं बगल की जंगल से आया हूँ
00:10अच्छा फिर तो तुम हमारे जंगल में ने हो
00:14आपका इस जंगल में स्वागत है
00:17धन्यवाद को वे भाईया धन्यवाद
00:21अरे हिरन भाई क्या तुम उससे दोस्ती करोगे
00:26इस जंगल में मेरा कोई भी दोस्त नहीं है
00:31क्यों नहीं कवे भाईया मैं आपसे जरूर दोस्ती करूंगा
00:36कवे और हिरन की दोस्ती हो जाती है
00:42वहक जहां भी जाते एक साथ जाते और जहां भी घूमते साथ घूमते
00:51एक दिन उन दोनों के उपर लुमड़ी की नजर पड़ी
00:57औरे कितना स्वादिश्ट हीरन है ये हरी हरी गास खाता है
01:04मेरत दिल करता है कि मैं इसका शिकार करूं और इसको खा जाओं
01:11फिर एक दिन कववा और हीरन आपस में बात कर रहे थे
01:18मन ही मन ललचा रहा था कि कैसे मैं हीरन का शिकार करूँ
01:25एक दिन कववा किसी काम से कहीं गया हुआ था और उस दिन हीरन अकेला था
01:34मोगा देखते ही लूंबडी कववे के पास गई
01:39अरी नमशकार हीरन भाई कैसे हैं आप
01:43मैं तो ठीक हूँ तुम बताओ तुम कैसी हो
01:48मैं अच्छी हूँ मैं आपके जंगल में ही एक उफा के पास रहती हूँ
01:55क्या आप मेरे साथ दोस्ती करेंगे
01:59और नहीं नहीं लूंबडी मैं किसी भी अंजान जानवर से दोस्ती नहीं करता
02:07जिसके बारे में मैं जानता हूँ सिर्फ मैं उसी से दोस्ती करता हूँ
02:14देखिये ना इस जंगल में मेरा कोई भी नहीं है और मैं केली रहती हूँ
02:20कोई भी इस जंगल में मेरा दुखने सुखने ही पूछता
02:25कोई भी मुझे नहीं बुलाता
02:27अब देखिये न, आप ही इस जंगल में नहीं आए हो
02:32और आपको मैंने परस्ताव दिया दोस्ती का
02:35आपने भी मेरा कहना नहीं माना
02:38लूंबडी की मीठी मीठी बात सुनकर
02:42हिरन का दिल पसीच जाता है
02:46और वह लूंबडी से दोस्ती के लिए राजी हो जाता है
02:53फिर लूंबडी और हिरन दोनों दोस्त हो जाते हैं
02:59वह साथ साथ गूमते हैं
03:11अवी हिरन मित्र एक बात बोलूं
03:14मुझे जंगल में एक जगा मालूम है
03:17जहां पर बहुत सारा तुम्हारे लिए खाना है
03:22वहाँ पर तुम जी भरकर और पेट भरकर खाना खाना
03:26वहाँ पर कोई भी रोक टोक नहीं है
03:30लूंबडी की बात सुमकर हिरन बहुत खुश हुआ
03:35और कहने लगा ठीक है भाई हम लोग चलते हैं खाने के लिए
03:42वह हीरन को खेट में ले जाता है
03:48अरी वाँ इतना सारा खाना धन्याबाद भाई
03:52तुम एक अच्छे मित्र हो जिसने मुझे इतना अच्छा अच्छा खाना मोहिया करवाया
03:58आज के बाद तुम मेरे सच्छे मित्र हो वह खाना खाकर वापिस आते हैं
04:06पीछे जिस किसान का वह खेट होता है वह किसान वहाँ पर आ जाता है
04:12औरी किस जानवर ने खाया उसकी खैर नहीं
04:17दूसरे दिन फिर हिरन और लूंबडी प्लैन बनाते हैं
04:23और वही पर फिर खाने के लिए जाते हैं
04:26अरे इस हिरन को क्या पता है
04:29मैं इसे यहाँ पर इसलिए लाते हूं कि यह खा खाकर मोटी हो जाए
04:35फिर इसके बाद तो इसको मैंने ही खाना है
04:40फिर किसान खेट में आता है और वह जा लगाकर चले जाता है
04:45प्लान के मताबिक जब हीरन और लूम्बडी खेत में आते हैं तो हीरन उसमें फस जाता है जिसके बाद वह
04:56चिलाने लगता है
04:58बचाओ मुझे बचाओ कोई है कोई मुझे बचाओ
05:04उसके बाद सुनकर वहाँ पर कववा आता है
05:10और कववा हीरन से कहता है मित्र मैंने कहा था ये लूम्डी सही नहीं है
05:17तुम इससे मितरता मत करो मगर तुमने फिर भी इससे मितरता की
05:23वह है हीरन को बताता है कि कैसे तुमने किसान से बचना है
05:32वह हीरन को कहता है मित्र तुम जब वह किसान आएगा तो आप मरने की एक्टिंग करना
05:44जिसे उसे लगेगा कि तुम मर गए हो और वह जाल खोलेगा और तुम भाग लेना
05:53मैं तुम्हें बैठ कर टोंट मारूंगा जिसे उसे लगेगा कि मर गया हूँ
05:59ठीक है कोवे मित्र जैसा तुम कहोगे मैं वैसा ही करूँगा
06:06उसके बाद वहां किसान आता है और हीरन वैसे ही करता है
06:13किसान को लगता है कि हीरन मर गया है जैसे ये वह जाल खोलता है हीरन वहां से भाग जाता
06:22है