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  • 6 months ago
जनसेवा का इरादा हो, तो नीयत होनी चाहिए, दौलत नहीं। केरल में एट्टुमानूर की आशना थंबी की यही सोच है. 26 साल की पत्रकार और नेता ने जब विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया, तो जेब में मात्र 84 रुपये थे. आशना 'सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट)' की उम्मीदवार हैं। वे छात्र आंदोलनों और कई विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रही हैं. उधर तमिलनाडु के अरियालुर में किसान सन्मुखसुंदरम ने चुनाव लड़ने के लिए जरूरी 10,000 रुपये की जमानत राशि जुटाने के लिए लोगों से मामूली चंदे मांगे. अक्सर वे हाथ में लिखित अपील लेकर राजमार्गों पर खड़े हो जाते, ताकि राहगीरों का ध्यान खींच सकें. निश्चित रूप से, दोनों उम्मीदवार धन शक्ति की बदौलत संचालित चुनावी ढांचे में एक दुर्लभ अपवाद हैं.

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00:00जन सेवा का इरादा हो तो नियत होनी चाहिए दौलत नहीं
00:04केरल में इटू मानूर की आशना थंबी की यही सोच है
00:0826 साल की पत्रकार और नीता ने जब विधानसवा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया
00:13तो जेब में मात्र 84 रुपई थे
00:16आशना शोचलिस्ट यूनिटी सेंटर ओफ इंडिया कमिनिस्ट की उमीदवार है
00:21वे चात्र आंदोलनों और कई विरूत प्रदर्शनों में सक्रिये रही है
00:57उधर तमिलनाडू की अर्यालूर में किसान सन्मुक सुन्दरम ने चुनाव लड़ने के लिए
01:02जरूरी 10,000 रुपई की जमानत राशी जुटाने के लिए लोगू से मामुली चंदे मांगे
01:08अक्सरवे हाथ में लिखित अपील लेकर राजमार्गों पर खड़े हो जाते ताकि रहगीरों का ध्यान खीट सके
01:16निश्चित रूप से दोनों उम्मीदवार धन शक्ती की बदौलत संचालिच चुनावी धाचे में एक दुरलब अपवाद है

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